गुरु ग्रंथ साहिब 914 · Raag Raamkalee · Guru Arjan Dev Ji
1कोई माता-पिता एवं पुत्र के संग जीवन गुजार देता है,
2कोई राज्य, धन-सम्पति एवं व्यापार में जिंदगी बिताता है,
3लेकिन संतों की जिन्दगी हरि-नाम के आधार पर व्यतीत हो जाती है।१॥
4यह जगत्-रचना परम-सत्य ने बनाई है
5और सबका मालिक परमेश्वर ही है॥ १॥ रहाउ॥
6कोई वेदों के अध्ययन एवं वाद-विवाद में अपनी जिंदगी गुजार देता है,
7कोई जीभ के स्वाद में जीवन बिता देता है।
8किसी कामुक व्यक्ति का जीवन नारी के संग कामपिपासा में ही बीत जाता है,
9लेकिन संत केवल प्रभु के नाम में ही जिंदगी भर लीन रहते हैं।॥ २॥
10किसी का जीवन जुआ खेलते ही व्यतीत हो जाता है।
11कोई नशे में अपना जीवन गुजार देता है,
12कोई पराया धन चोरी करने में जिंदगी काट देता है,
13किन्तु भक्तजन परमात्मा के नाम-ध्यान में अपना जीवन साकार कर लेते हैं।॥ ३॥
14किसी का जीवन योग साधना, तपस्या एवं पूजा में ही गुजर जाता है,
15कोई रोग-शोक एवं भ्रम में पड़कर जिन्दगी बिता देता है,
16कोई योगासन से प्राणायाम करके जीवन व्यतीत कर देते हैं,
17लेकिन संतों का जीवन ईश्वर का भजन-कीर्तन करते ही व्यतीत हो जाता है॥ ४ ॥
18किसी का जीवन दिन-रात सफर करते ही गुजर जाता है,
19कोई रणभूमि में डटकर लड़ता हुआ ही जिंदगी काट देता है,
20कुछ लोग अध्यापक बनकर बच्चों को विद्या देने में ही समय बिता देते हैं,
21परन्तु संतों की जिन्दगी भगवान का यशोगान करने में व्यतीत हो जाती है॥ ५॥
22किसी का जीवन कलाकार बनकर नाटक एवं नृत्य में ही गुजर जाता है,
23कोई जीव-हत्या एवं लूटपाट में जिंदगी बिता देते हैं,
24कोई अपना जीवन राज-भाग के कामों में डरता व्यतीत कर देता है,
25परन्तु संत प्रभु का यशोगान करते ही जिन्दगी बिता देते हैं।॥ ६॥
26किसी का सारा समय सलाह-मशकिरा एवं परामर्श देने में ही कट जाता है,
27कोई जिन्दगी की आवश्यकताओं को पूरा करने एवं सेवा करते ही वक्त निकाल देता है,
28किसी का जीवन-संशोधन करने में ही समय गुजर जाता है,
29परन्तु संतों की पूरी जिंदगी हरि-नाम रूपी रस का पान करने में ही गुजर जाती है॥ ७॥
30सच तो यही है कि ईश्वर ने जीव को जिस कार्य में लगाया है, वह उस में लग गया है।
31न कोई मूर्ख है और न ही कोई चतुर है।
32परमात्मा कृपा करके जिसे अपना नाम देता है, नानक उस पर बलिहारी जाता है ॥८॥३॥
33रामकली महला ५ ॥
34जैसे जंगल की आग में कुछ पौधे बचकर हरे रह जाते हैं,
35जैसे माता के गर्भ के संकट में से बच्चा छूट जाता है,
36जिसका नाम स्मरण करने से हर प्रकार का भय दूर हो जाता है,
37ईश्वर अपने संतजनों की रक्षा करता है॥ १॥
38दयालु ईश्वर सबकी रक्षा करने वाला है।
39हे दीनदयाल ! जिधर-किधर भी देखता हूँ, केवल तू ही हमारा प्रतिपालक है॥ १॥ रहाउ॥
40जैसे जल पीने से प्यास मिट जाती है,
41जैसे पति के घर में आने से पत्नी प्रसन्न हो जाती है,
42जैसे लोभी इन्सान का धन ही उसके प्राणों का आधार होता है,
43वैसे ही भक्तजनों का हरि-नाम से प्यार होता है। २॥
44जैसे कृषक अपनी कृषि की रक्षा करता है,
45जैसे माता-पिता अपने बच्चे पर दया करते हैं,
46जैसे प्रियतम को देखकर प्रियतमा उसमें ही आसक्त हो जाती है,
47वैसे ही भक्तजनों को परमेश्वर अपने कंठ से लगाकर रखता है॥ ३॥
48जैसे अन्धे को देखने पर आनंद होता है,
49जैसे कोई गूंगा बोलने लग जाए तो वह प्रसन्न होकर गीत गाने लगता हैं,
50जैसे कोई लंगड़ा आदमी पर्वत पर चढ़कर खुशी व्यक्त करता है,
51वैसे ही हरि का नाम जपने से सबका उद्धार हो जाता है।४॥
52जैसे अग्नि जलने से शीत का प्रकोप नाश हो जाता है,
53ऐसे ही संतों की संगति करने से हर प्रकार के पाप नाश हो जाते हैं।
54जैसे साबुन लगाकर कपड़े धोने से उज्ज्वल हो जाते हैं,
55वैसे ही नाम जपने से सब भ्रम दूर हो जाते हैं।॥ ५ ॥
56जैसे चकवी को सूर्योदय की आशा रहती है,
57जैसे चातक को स्वाति बूंद की प्यास लगी रहती है,
58जैसे हिरन को संगीत के स्वर से सुख उपलब्ध होता है,
59वैसे ही प्रभु का नाम भक्तों के मन में सुख प्रदान करता है॥ ६॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं