सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 273 · Raag Gauree · Guru Arjan Dev Ji

1ब्रह्मज्ञानी की दृष्टि से अमृत बरसता है।

2ब्रह्मज्ञानी बन्धनों से मुक्त रहता है।

3ब्रह्मज्ञानी का जीवन-आचरण बड़ा पवित्र है।

4ब्रह्मज्ञानी का भोजन ज्ञान होता है।

5हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी भगवान के ध्यान में ही मग्न रहता है॥ ३॥

6ब्रह्मज्ञानी की एक ईश्वर पर ही आशा होती है।

7ब्रह्मज्ञानी का विनाश नहीं होता।

8ब्रह्मज्ञानी नम्रता में ही टिका रहता है।

9ब्रह्मज्ञानी को परोपकार करने का उत्साह बना रहता है।

10ब्रह्मज्ञानी सांसारिक विवादों से परे होता है।

11ब्रह्मज्ञानी अपने भागते मन को नियंत्रण में कर लेता है।

12ब्रहाज्ञानी के कर्म श्रेष्ठ हैं, वह जो भी करता है, भला ही करता है।

13ब्रह्मज्ञानी भलीभाँति सफल होता है।

14ब्रह्मज्ञानी की संगति में रहने से सबका उद्धार हो जाता है।

15हे नानक ! सारी दुनिया ब्रह्मज्ञानी की प्रशंसा करती है॥ ४॥

16ब्रह्मज्ञानी केवल एक ईश्वर से ही प्रेम करता है।

17ईश्वर ब्रह्मज्ञानी के साथ-साथ रहता है।

18ईश्वर का नाम ही ब्रह्मज्ञानी का आधार है।

19ईश्वर का नाम ही ब्रह्मज्ञानी का परिवार है।

20ब्रह्मज्ञानी हमेशा जाग्रत रहता है।

21ब्रह्मज्ञानी अपनी अहंबुद्धि को त्याग देता है।

22ब्रह्मज्ञानी के हृदय में परमानन्द वास करता है।

23ब्रह्मज्ञानी के हृदय-रूपी घर में सदा आनंद बना रहता है।

24ब्रह्मज्ञानी हमेशा सहज सुख में निवास करता है।

25हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी का विनाश नहीं होता।॥ ५॥

26ब्रह्मज्ञानी ब्रह्म ज्ञाता होता है।

27ब्रह्मज्ञानी एक ईश्वर से ही प्रेम करता है।

28ब्रह्मज्ञानी के हृदय में हमेशा बेफ्रिक्री रहती है।

29ब्रह्मज्ञानी का मन्त्र पवित्र करने वाला होता है।

30ब्रह्मज्ञानी वही होता है, जिसे ईश्वर स्वयं लोकप्रिय बनाता है।

31ब्रह्मज्ञानी का बड़ा प्रताप है।

32ब्रह्मज्ञानी के दर्शन किसी भाग्यशाली को ही प्राप्त होते हैं।

33ब्रह्मज्ञानी पर हमेशा बलिहारी जाना चाहिए।

34ब्रह्मज्ञानी को शिवशंकर भी खोजते रहते हैं।

35हे नानक ! परमेश्वर स्वयं ही ब्रह्मज्ञानी है॥ ६ ॥

36ब्रह्मज्ञानी के गुणों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।

37सब गुण ब्रह्मज्ञानी के हृदय में विद्यमान हैं।

38ब्रहाज्ञानी के भेद को कौन जान सकता है ?

39ब्रह्मज्ञानी को सदैव प्रणाम करना चाहिए।

40ब्रह्मज्ञानी की महिमा का एक आधा अक्षर भी वर्णन नहीं किया जा सकता।

41ब्रह्मज्ञानी समस्त जीवों का पूज्य स्वामी है।

42ब्रह्मज्ञानी का अनुमान कौन लगा सकता है।

43केवल ब्रह्मज्ञानी ही ब्रह्मज्ञानी की गति को जानता है।

44ब्रह्मज्ञानी के गुणों का कोई आर-पार नहीं।

45हे नानक ! ब्रह्मज्ञानी को हमेशा ही प्रणाम करते रहो ॥ ७ ॥

46ब्रह्मज्ञानी सारी दुनिया का कर्तार है।

47ब्रह्मज्ञानी सदैव ही जीवित रहता है और मरता नहीं।

48ब्रह्मज्ञानी जीवों को मुक्ति, युक्ति एवं जीवन देने वाला दाता है।

49ब्रह्मज्ञानी पूर्ण पुरुष विधाता है।

50ब्रह्मज्ञानी अनाथों का नाथ है।

51ब्रहाज्ञानी का रक्षक हाथ समस्त मानव जाति पर है।

52यह सारा जगत्-प्रसार ब्रह्मज्ञानी का ही है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं