गुरु ग्रंथ साहिब 1301 · Raag Kaanraa · Guru Arjan Dev Ji
1एक बार परमात्मा का स्मरण करने से करोड़ों पाप-दोष मिट जाते हैं।॥२॥
2उसका गुणानुवाद करने से दुख नाश हो जाते हैं और हृदय को शान्ति प्राप्त होती है।॥३॥
3नानक की विनती है कि ईश्वर के रंग में लीन होकर रसना से हरिनाम रूपी अमृत रस का पान करो॥४॥४॥१५॥
4कानड़ा महला ५ ॥
5हे सज्जनो, संत पुरुषो ! मेरे पास आओ॥१॥रहाउ॥
6संतों के संग परमात्मा का गुणानुवाद करने से आनंद एवं खुशियां मिलती हैं और सब पाप-दोष मिट जाते हैं।॥१॥
7संतों के चरणों में शीश नवाने से अंधेरे घर में रोशनी हो जाती है।॥२॥
8संतों की कृपा से हृदय कमल खिल उठता है और ईश्वर को निकट मानकर उसका ही भजन होता है।॥३॥
9हे नानक ! प्रभु की कृपा से जब संतों को पाया था, उस शुभ समय पर कुर्बान जाता हूँ॥४॥५॥१६॥
10कानड़ा महला ५ ॥
11हे ईश्वर ! मैं तेरे चरणों की शरण में आया हूँ।
12मोह, अभिमान, धोखे एवं भ्रम की जंजीर को काट कर मुझे बचा लो॥१॥रहाउ॥
13मैं संसार-सागर में डूब रहा था लेकिन
14परमात्मा के स्मरण से संसार-समुद्र से पार हो गया हूँ॥१॥
15हे परमेश्वर ! तेरा नाम मन को शीतलता प्रदान करने वाला है,
16तू ही मेरा पूर्ण मालिक है॥२॥
17तू दीनों का दर्द दूर करके पार उतारने वाला है।
18परमात्मा कृपा का भण्डार है, पतितों का उद्धार करने वाला है॥३॥
19करोड़ों जन्म दुख ही पाया था,
20नानक का कथन है कि जब से गुरु ने हरिनाम दृढ़ करवाया है, सुखी हूँ॥४॥६॥१७॥
21कानड़ा महला ५ ॥
22परमात्मा के चरणों में लगा वह प्रेम धन्य है।
23इससे करोड़ों जप, तपस्या का फल एवं सुख प्राप्त हुआ है और पूर्ण भाग्यशाली हूँ, जो प्रभु से आ मिला हूँ॥१॥रहाउ॥
24हे प्रभु ! मैं अनाथ तेरा दास हूँ, मैंने अन्य सब आसरे त्याग दिए हैं।
25प्रभु के स्मरण से छोटा-सा भ्रम भी कट गया है और ज्ञान का अंजन लगाने से मोह-माया की नींद से जाग गया हूँ॥१॥
26तू अथाह है, बहुत बड़ा स्वामी है, कृपा का समुद्र एवं पूर्ण रत्नों की खान है।
27नानक विनती करता है कि हे प्रभु ! मैं याचक बनकर हरिनाम ही मांगता हूँ और अपना मस्तक भी तेरे चरणों में धरता हूँ॥२॥७॥१८॥
28कानड़ा महला ५ ॥
29मैं मैला, कठोरदिल, धोखेबाज एवं कामी हूँ।
30हे स्वामी ! जैसे भी ठीक लगे, मुझे संसारसागर से मुक्त कर दो॥१॥रहाउ॥
31तू समर्थ है, शरण देने योग्य है, अपनी शक्ति से मुझे बचा लो॥१॥
32पूजा-पाठ, तपस्या, नियम, शुद्धता एवं संयम इत्यादि इन तरीकों से छुटकारा संभव नहीं।
33नानक प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! मैं माया के घोर अंधेरे में गत हूँ, कृपा-दृष्टि करके बाहर निकाल लो।॥२॥८॥१६॥
34कानड़ा महला ५ घरु ४
35ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
36जो नारायण-स्वरूप परम परमेश्वर को प्रणाम करता है,
37ऐसे गुरु को कुर्बान जाता हूँ, जो स्वयं तो संसार के बन्धनों से मुक्त है, मुझे भी पार उतार देता है॥१॥रहाउ॥
38उसके किस-किस गुण का कथन किया जाए, कोई अंत एवं आर-पार नहीं।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं