गुरु ग्रंथ साहिब 925 · Raag Raamkalee
1रामकली महला ५ ॥
2हे मन ! परमात्मा का मनन करो और उसे एक क्षण के लिए भी नहीं भुलाना चाहिए।
3प्यारे राम को हृदय एवं कण्ठ में धारण करके उसकी महिमागान करो।
4उस परमपुरुष, पूर्ण परब्रह्म, मायातीत ईश्वर को हृदय में बसाकर रखो ।
5वह सब भय दूर करने वाला, पाप नाश करने वाला, असह्य दुख नष्ट करने वाला और जन्म-मरण का चक्र खंडन करने वाला है।
6उस जगदीश, ईश, गोपाल, माधो गोविंद के गुणों का चिंतन करते रहो।
7नानक की विनती है कि साधुओं की संगति में मिलकर दिन-रात उसे स्मरण करना चाहिए ॥ १॥
8परमात्मा के चरण-कमल ही भक्तजनों का आसरा है।
9प्रभु का अनंत नाम ही धन-सम्पति एवं सुखों का भण्डार है।
10प्रभु का नाम ही निधि है, नारायण का नाम जपना ही सब रसों को भोगना है।
11श्वास-श्वास से नाम का ध्यान करना ही के रस, रूप, रंग एवं अनंत भण्डार हैं।
12प्रभु नाम सब पापों को नष्ट करने वाला प्रायश्चित कर्म है और नाम ही यम के भय को दूर करने वाला है।
13नानक प्रार्थना करते हैं कि भगवान के चरण-कमल का आसरा ही दास की जीवन राशि है॥ २॥
14हे स्वामी ! तेरे गुण बेअंत हैं, पर कोई भी तेरे गुणों को नहीं जानता।
15हे दीनदयाल ! तेरी अद्भुत लीला को देखकर एवं सुनकर भक्त तेरी महिमा का ही बखान करते हैं।
16हे पुरुषोत्तम परमेश्वर ! सब जीव तेरा ही ध्यान करते रहते हैं।
17हे करुणामय जगदीश्वर ! केवल एक तू ही दाता है, अन्य सब जीव तेरे याचक हैं।
18जिसे प्रभु गौरव देता है, वही साधु, संत एवं ज्ञानवान है।
19नानक विनती करते हैं कि हे प्रभु ! जिस पर तू कृपा करता है, वही तुझे पहचानता है॥ ३॥
20मैं गुणविहीन अनाथ तेरी शरण में आया हूँ।
21मैं अपने गुरुदेव पर कुर्बान जाता हूँ जिसने मुझे नाम स्मरण करवाया है।
22गुरु ने मुझे नाम-दान दिया है, जिसे जपने से सब कामनाएँ पूरी हो गई हैं और सुखी हो गया हूँ।
23नाम ने मेरी सारी जलन बुझा दी है, मन को शान्ति मिल गई है और चिरकाल से बिछुड़े हुए को मिला दिया है।
24मैंने सच्चे परमेश्वर की महिमा का मंगलगान केिया है, जिससे मन में आनंद, हर्ष एवं सहज सुख उपलब्ध हो गया है।
25नानक विनती करते हैं कि पूर्ण गुरु से मुझे प्रभु का नाम प्राप्त हो गया है॥ ४॥ २॥
26रामकली महला ५ ॥
27नित्य सुबह उठकर संतों के साथ सुरीले अनहद शब्द का गान करना चाहिए।
28गुरु-उपदेश द्वारा हरि-नाम का जाप करने से सब पाप एवं दोष नष्ट हो जाते हैं।
29हरि-नाम स्मरण करो, नामामृत का पान करो और दिन-रात उसकी हो आराधना करो।
30प्रभु के चरणों में लगने से योग, दान-पुण्य, एवं शुभ कर्मो का फल प्राप्त हो जाता है।
31दयालु प्रभु की प्रेम-भक्ति से सब दुख नाश हो जाते हैं।
32नानक विनती करते हैं केि स्वामी परमेश्वर का मनन करने से जीव संसार-सागर से पार हो जाता है॥ १॥
33हे गोविंद ! तू सुखों का सागर है, सब भक्त तेरा ही सिमरन एवं स्तुतिगान करते रहते हैं।
34गुरु के चरणों में लगकर उन्हें बड़ा आनंद, कल्याण एवं अनेक सुख उपलब्ध होते हैं।
35प्रभु ने कृपा करके रक्षा की है, उनके सब दुख दूर कर दिए हैं और उन्हें सुखों की निधि मिल गई है।
36प्रभु के चरणों में लगने से सारा भ्रम एवं भय दूर हो जाता है और जीभ हरि-नाम ही जपती रहती है।
37जो भक्तजन एक परमात्मा का स्मरण करते हैं, उस एक का ही गुणगान करते हैं, उन्हें हर तरफ एक परमेश्वर ही नजर आता है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं