गुरु ग्रंथ साहिब 917 · Raag Raamkalee
1रामकली महला ३ अनंदु
2ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
3हे मेरी माँ! मन में आनंद ही आनंद हो गया है, क्योंकि मैंने सतगुरु को पा लिया है।
4सतगुरु को सहज स्वभाव ही प्राप्त कर लिया है, जिससे मन में खुशियों पैदा हो गई हैं।
5यूं प्रतीत हो रहा है रत्नों जैसे अमूल्य राग-रागनियाँ एवं परियाँ परिवार सहित शब्दगान करने के लिए आई हैं।
6जिन्होंने परमात्मा को मन में बसा लिया है, वे सभी उसकी स्तुति का शब्दगान करो।
7नानक कहते हैं कि सतगुरु को पाकर मन में परमानन्द पैदा हो गया है। १॥
8हे मेरे मन ! तू सदा परमात्मा के साथ लीन रह,
9हे मन ! परमात्मा के साथ लीन रहेगा तो वह तेरे सभी दुख भुला देगा।
10वह तेरा ही साथ देता रहेगा और तेरे सभी कार्य सम्पूर्ण करने वाला है।
11जो स्वामी सभी बातें पूरी करने में समर्थ है, उसे क्यों मन से भुला रहे हो।
12नानक कहते हैं कि हे मेरे मन ! सदा परमात्मा के साथ आस्था बनाकर रहो ॥ २ ॥
13हे सच्चे मालिक ! तेरे घर में क्या कुछ नहीं है?
14तेरे घर में तो सबकुछ है, परन्तु जिसे तू देता है, वही प्राप्त करता है।
15जो सदा तेरी महिमागान करते हैं, उनके मन में नाम का निवास हो जाता है।
16जिनके मन में नाम आ बसता है, उनके हृदय में अनहद शब्द के बाजे बजते रहते हैं।
17नानक कहते हैं कि हे सच्चे मालिक ! तेरे घर में भला क्या कुछ नहीं है॥ ३॥
18ईश्वर का सच्चा नाम ही मेरा आधार है।
19उसका सच्वा नाम ही मेरा आधार है, जिसने हर प्रकार की भूख को मिटा दिया है।
20जिस नाम ने मेरी सब कामनाएँ पूरी कर दी हैं, वह सुख शान्ति करके मेरे मन में आ बसा है।
21मैं उस गुरु पर सदा कुर्बान जाता हूँ, जिसने यह बड़ाई प्रदान की है।
22नानक कहते हैं कि हे संतजनो, जरा ध्यानपूर्वक सुनो; गुरु-शब्द से प्रेम करो।
23प्रभु का सच्चा नाम ही मेरा जीवनाधार है।४ ॥
24उस भाग्यशाली हृदय-घर में रबाब, पखावज, ताल, धुंघरू एवं शंख-पाँच प्रकार की ध्वनियों वाले अनहद शब्द बजते हैं।
25उस भाग्यवान हृदय-घर में पाँच शब्द बजते हैं, जिस घर में परमात्मा ने अपनी शक्ति रखी हुई है।
26हे परमेश्वर ! तूने कामादिक पाँच दूतों को वशीभूत करके भयानक काल को भी मार दिया है।
27प्रभु के नाम में वही जीव लगे हैं, जिनकी किस्मत में प्रारम्भ से ही ऐसा लिखा है।
28नानक कहते है की हृदय - घर में अनहद शब्द बज रहा है वंहा सुख उपलब्ध हो गया है ॥ ५ ॥
29ईश्वर से सच्ची लगन के बिना यह देह तुच्छ है।
30सच्ची लगन के बिना बेचारी तुच्छ देह क्या कर सकती है ?
31हे बनवारी ! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई समर्थ नहीं है, अपनी कृपा करो।
32इस देह को अन्य कोई स्थान नहीं है, शब्द में लगकर ही इसका सुधार हो सकता है।
33नानक कहते हैं कि ईश्वर से लगन के बिना यह बेचारी देह क्या कर सकती है॥ ६ ॥
34हर कोई आनंद आनंद की बात कहता है किन्तु सच्चा आनंद गुरु से जान लिया है।
35सच्चा आनंद गुरु से जान लिया है, जो सदा ही अपने प्रिय सेवकों पर कृपा करता है।
36गुरु कृपा करके सारे पाप नष्ट कर देता है और ऑखों में ज्ञान का सुरमा डाल देता है।
37जिनका अन्तर्मन से मोह टूट गया है, सच्चे प्रभु ने शब्द द्वारा उनका जीवन सुन्दर बना दिया है।
38नानक कहते हैं कि यही सच्चा आनंद है, जिस आनंद की जानकारी गुरु से हासिल की है॥ ७॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं