सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 902 · Raag Raamkalee · Guru Tegh Bahaadur Ji

1जब अन्तिम समय पापी अजामल को नारायण की याद आई तो

2उसने एक क्षण में ही ऐसी गति प्राप्त कर ली, जिस गति के बड़े-बड़े योगीश्वर भी अभिलाषी हैं।२॥

3गजिन्द्र हाथी में न कोई गुण था, न उसने कुछ विद्या पढ़ी थी, फिर उसने कौन-सा धर्म-कर्म किया था ?

4हे नानक ! राम जी का विरद देखो, उसने मगरमच्छ के मुँह से बचाकर उसे भी अभयदान दिया था।॥ ३॥ १॥

5रामकली महला ९ ॥

6हे साधुजनो ! अब कौन-सी युक्ति की जाए,

7जिससे सारी दुर्मति नाश हो जाए और मन राम की भक्ति में भीग जाए॥ १॥ रहाउ॥

8यह मन तो माया में उलझा रहता है और ज्ञान को बिल्कुल नहीं जानता।

9जगत में ऐसा कोन-सा नाम है, जिसका सिमरन करने से निर्वाण पद प्राप्त हो जाता है॥ १ ॥

10जब संतजन दयालु कृपालु हो गए तो उन्होंने यह ज्ञान की बात बताई है कि

11जिसने प्रभु का कीर्तिगान किया है, समझ लो उसने सब धर्म-कर्म कर लिए हैं।२ ।

12हे नानक ! जो व्यक्ति रात-दिन एक पल भर के लिए राम नाम को अपने हृदय में धारण करता है,

13उसका मृत्यु का भय मिट जाता है और वह अपना जन्म संवार लेता है॥ ३ ॥ २ ॥

14रामकली महला ९ ॥

15हे प्राणी ! नारायण का ध्यान करो; चूंकि

16क्षण-क्षण तेरी आयु कम होती जा रही है और रात-दिन तेरा शरीर व्यर्थ जा रहा है॥ १॥

17तेरा बचपन अज्ञानता में बीत गया और तरुणावस्था विषय-विकारों में गंवा दी।

18अब तू बूढ़ा हो गया है, पर अभी भी तू नहीं समझ रहा, फिर कौन-सी खोटी बुद्धि में उलझा हुआ है।॥ १॥

19जिस ठाकुर जी ने तुझे मनुष्य-जन्म दिया है, तूने उसे क्यों भुला दिया है ?

20जिसका सिमरन करने से मुक्ति हो जाती है, तूने क्षण भर भी उसका यशगान नहीं किया।॥ २॥

21तू धन-दौलत का इतना अभिमान क्यों करता है ? अंतिम समय यह किसी के साथ नहीं जाती।

22नानक कहते हैं कि अरे भाई ! चिंतामणि परमेश्वर का स्मरण करो; अन्त में वही तेरा मददगार होगा ॥३॥३॥८१॥

23रामकली महला १ असटपदीआ

24ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

25आसमान में वही चाँद और सितारे चमक रहे हैं तथा वही सूर्य तप रहा है।

26वही धरती है और वही पवन झूल रही है। यह किस तरह माना जा सकता है कि कोई युग जीवों में क्रियाशील होता है ?॥ १॥

27अपने जीवन की लालसा छोड़ दो।

28जो व्यक्ति मासूमों पर अत्याचार करता है, उसकी सत्ता को माना जाता है। इसे कलियुग के लक्षण समझो।॥ १॥ रहाउ॥

29किसी से ऐसा नहीं सुना कि कलियुग किसी देश में आया है और न ही यह केिसी तीर्थ के पास बैठा हुआ है।

30जिधर कोई दानी दान कर रहा है, उधर भी कलियुग नहीं और किसी विशेष स्थान पर महल का निर्माण करके भी नहीं बैठा हुआ ॥ २॥

31यदि कोई सत्य, धर्म या नेक आचरण करता है तो वह ख्वार होता है। यदि कोई तपस्या करता है तो उसकी तपस्या सफल नहीं होती।

32यदि कोई परमात्मा का नाम लेता है तो लोगों में उसकी बदनामी होती है। यही कलियुग के लक्षण हैं।॥ ३॥

33जिस व्यक्ति को शासन मिलता है तो वह भी ख्वार होता है। नौकरों को केिसी प्रकार का कोई डर नहीं होता ?

34जब शासक को जंजीरें पड़ती हैं तो नौकरों के हाथों ही उसकी मृत्यु होती है अर्थात् नौकर ही मालिक से धोखा करते हैं।॥ ४॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं