सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 896 · Raag Raamkalee

1रामकली महला ५ ॥

2जिस परमात्मा की यह सृष्टि, धन-सम्पदा इत्यादि है,

3उसकी ही मान और अपना घमण्ड छोड़ दो।

4जिसका तू पैदा किया हुआ है, सब कुछ उसी का है।

5उसकी आराधना करने से सदा ही सुख मिलता है॥ १॥

6अरे बेगाने जीव ! क्यों भ्रम में भटक रहा है,

7नाम के बिना कुछ भी काम नहीं आता और ‘मेरा-मेरा' करके बहुत सारे लोग पछताए हैं।॥ १॥ रहाउ ॥

8जो जो परमात्मा करता है, उसे भला मान लो ।

9उसकी मर्जी को अस्वीकार करने से जीव मिट्टी में मिलकर खाक हो जाता है।

10किसी कौ ही उसकी इच्छा मीठी लगती है

11और गुरु की कृपा से किसी विरले के ही मन में बसता है । २॥

12ईश्वर बेपरवाह है, वह मन वाणी से परे है,

13आठों प्रहर मन में उसका ही जाप करना चाहिए।

14जिसे वह याद आता है, उसके दुख नाश हो जाते हैं।

15लोक-परलोक में तेरा मुख उज्जवल हो जाएगा।॥ ३॥

16भगवान का गुणगान करके कौन-कौन से जीव का उद्धार हो गया है,

17उनकी गणना नहीं की जा सकती और न ही सही कीमत आंकी जा सकती है।

18जैसे डूबता हुआ लोहा नाव द्वारा पार हो जाता है, वैसे ही पापी जीव भी संतों की संगति करके संसार-सागर से पार हो जाता है।

19हे नानक ! जिस पर कृपा करता है, उसे ही सुसंगति मिलती है॥ ४॥ ३१॥ ४२॥

20रामकली महला ५ ॥

21मन में भगवंत का जाप करो

22पूर्ण गुरु ने यही मंत्र दिया है।

23इससे सब भय एवं कष्ट मिट जाते हैं और

24हर कामना पूर्ण होती है॥ १॥

25गुरुदेव की सेवा फलदायक है,

26उस परम सत्य, अलक्ष्य, अभेद परमेश्वर की महिमा की सही कीमत कुछ भी आंकी नहीं जा सकती॥ १॥ रहाउ॥

27वह स्वयं ही करने-करवाने में समर्थ है,

28मन में सदैव उसका जाप करो। हे मित्र ! नित्य उसकी उपासना करनी चाहिए,

29इससे सहज सुख एवं सत्य की प्राप्ति होगी॥ २ ॥

30मेरा मालिक सर्वशक्तिमान है,

31वह एक क्षण में ही बनाने एवं नष्ट करने वाला है।

32उसके अतिरिक्त अन्य कोई भी समर्थ नहीं है और

33वही सेवक का रखवाला है॥ ३॥

34हे भगवंत ! कृपा करके मेरी प्रार्थना सुनो;

35अपने सेवक को दर्शन दीजिए।

36नानक तो उस परमात्मा के नाम का जाप जपता रहता है,

37जिसका प्रताप सबसे ऊँचा है॥ ४ ॥ ३२ ॥ ४३ ॥

38रामकली महला ५ ॥

39लोगों पर भरोसा करना व्यर्थ है।

40हे प्रभु! मुझे तो केवल तेरा ही सहारा है।

41अन्य सब आशाएँ छूट गई हैं और

42अकस्मात, गुणों का भण्डार प्रभु मुझे मिल गया है॥ १॥

43हे मेरे मन ! केवल नाम का ही ध्यान करो,

44‘हरि-हरि' नाम का गुणगान करने से तेरा कार्य सम्पूर्ण हो जाएगा ॥ १॥ रहाउ॥

45हे परमेश्वर ! तू ही सब बनाने वाला है।

46मैंने तो हरि-चरणों की ही शरण ली है,

47अपने मन-तन में उसका ही ध्यान किया है।

48गुरु ने मुझे आनंद रूप हरि के दर्शन करवाएं हैं।॥ २॥

49मैंने सदैव उसका ही आसरा लिया है,

50जिसने सब जीवों की उत्पतेि की है ।

51हरि का सिमरन करने से सर्व सुखों के भण्डार प्राप्त होते हैं एवं

52अन्तिम समय वही रक्षा करता है॥ ३॥

53सबकी चरण-घूलि बन जाना चाहिए और

54अपना आत्माभिमान मिटाकर सत्य में मिल जाना चाहिए।

55प्रतिदिन नाम का ध्यान करना चाहिए,

56हे नानक ! जीवन में यही कार्य सफल है॥ ४॥ ३३ ॥ ४४॥

57रामकली महला ५ ॥

58दयालु परमेश्वर करने-करवाने वाला है,

59वह बड़ा रहमदिल है, सबका पालनहार है।

60वही अल्लाह अदृष्ट एवं अपरम्पार है।

61उस महान् खुदा का हुक्म अटल है, उसकी महिमा बेअन्त है॥ १॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं