सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 891 · Raag Raamkalee · Guru Arjan Dev Ji

1वह सहज समाधि में अनहद ध्वनि को सुनता है और गहनगंभीर होता है।

2वह सदा बंधनों से मुक्त रहता है और उसके सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं,

3जिसके हृदय में हरि नाम बस जाता है। ॥ २॥

4वह सर्व सुख-आनंद प्राप्त करता और आरोग्य रहता है,

5वह निर्लिप्त एवं समदर्शीं होता है।

6उसका जन्म-मरण समाप्त हो जाता है और कभी पथभ्रष्ट नहीं होता

7जिसके मन में नाम स्थित हो जाता है।॥ ३॥

8दीनदयाल गोविन्द गोपाल

9गुरुमुख बनकर यह जाप करने से सब चिन्ताएँ समाप्त हो जाती हैं।

10नानक को गुरु ने हरि-नाम ही दिया है,

11अब वह संतों की सेवा एवं उनके कार्य में ही लगा रहता है॥ ४॥ १५ ॥ २६ ॥

12रामकली महला ५ ॥

13मूलमंत्र हरि का कीर्तन गान करो,

14इससे बेसहारा को भी परलोक में सहारा मिल जाता है।

15पूर्ण गुरु के चरणों में लगने से

16जन्म-जन्मांतर का सोया हुआ मन जाग जाता है॥ १i।

17जिसने हरि-नाम का जाप किया है,

18गुरु कृपा से वह उसके हृदय में बस गया है और वह भवसागर से पार हो गया है॥ १॥ रहाउ॥

19हे मन ! नाम-भण्डार अटल है,

20उसका ध्यान करने से माया के बंधन छूट जाते हैं।

21गुरु का शब्द अमृतमय रस है,

22इसका पान करने से तेरा हृदय निर्मल हो जाएगा ॥ २॥

23खोज-खोजकर सोच-समझकर मैंने यही विचार किया है केि

24हरि की भक्ति के बिना किसी का छुटकारा नहीं होता।

25इसलिए साधुओं की संगति में हरि का भजन करना चाहिए,

26इस प्रकार मन-तन हरि के रंग में लीन हो जाता है॥ ३॥

27अपनी अक्लमंदी एवं चतुराई को छोड़ दो।

28हे मन ! हरि के नाम बिना पापों की मैल दूर नहीं होती।

29हे नानक ! ईश्वर ने मुझ पर दया की है,

30इसलिए हरि-नाम का ही सहारा लिया है॥ ४॥ १६॥ २७ ॥

31रामकली महला ५ ॥

32जो संतों के संग मिलकर राम-रंग की क्रीड़ा करता है,

33उसका आगे परलोक में यमों से मिलाप नहीं होता।

34उसकी अहम्-भावना मिट जाती है और

35सारी दुर्मति भी नाश हो जाती है।॥ १॥

36हे पण्डित ! राम नाम का गुणगान कर ले,

37कर्मकाण्ड एवं तेरा अहंकार किसी काम नहीं आना, राम की स्तुति करने से तू सहर्ष मोक्ष प्राप्त कर लेगा।॥ १॥ रहाउ॥

38हरि का यश ही सुख का कोष है, जिसने इसका लाभ प्राप्त किया है,

39उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो गए हैं।

40उसके दुख दूर हो गए हैं, और हृदय-घर में सुख उपलब्ध हो गया है।

41संतों की कृपा से उसका हृदय कमल खिल गया है॥ २॥

42जिसने नाम रूपी रत्न का दान प्राप्त किया है,

43उसे सब भण्डार हासिल हो गए हैं।

44उसके मन में पूर्ण संतोष आ गया है और

45फिर वह पुनः पुनः किसी से माँगने के लिए नहीं जाता॥ ३॥

46हरि की कथा सुनने से मन पवित्र हो जाता है।

47जो जिव्हा स्तुतिगान करती है, उसकी गतेि हो जाती है।

48हे नानक ! जिसने इसे हृदय में बसाया है, वह मंजूर हो गया है और

49वही व्यक्ति सर्वोत्तम हो गया। ॥ ૪ ॥ ૧७ ॥ २८ ॥

50रामकली महला ५ ॥

51माया को अगर सावधानी से पकड़ा भी जाए तो यह किंसी के हाथ में नहीं आती।

52अगर इससे प्रीति भी की जाए तो यह साथ नहीं देती।

53हे नानक ! जब इसे त्याग दिया जाए तो

54तब यह चरणों में आ जाती है।॥ १ ॥

55हे सज्जनो ! यह निर्मल विचार सुनो;

56राम-नाम के बिना किसी की गति नहीं होती, पूर्ण गुरु से भेंट करने से उद्धार हो जाता है॥ १॥ रहाउ॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं