गुरु ग्रंथ साहिब 889 · Raag Raamkalee · Guru Arjan Dev Ji
1उस अटल स्थान की कीर्ति बेअंत है।२॥
2वह स्थान कभी गिरता एवं डोलता नहीं और
3गुरु की कृपा से ही कोई इस स्थान को प्राप्त करता है।
4वहाँ भक्तजनों को भ्र्म, भय एवं मोह-माया का जाल प्रभावित नहीं करता।
5शून्य समाधि में रहने वाले पर प्रभु कृपालु हो जाता है॥ ३॥
6उसका कोई अन्त एवं आर-पार नहीं।
7वह स्वयं ही गुप्त है एवं स्वयं ही जगत्-प्रसार में प्रगट हो रहा है।
8हे नानक ! जिसके अन्तर में हरि-नाम का स्वाद पैदा हो जाता है,
9ऐसा अद्भुत स्वाद बयान नहीं किया जा सकता ॥४॥९॥२०॥
10रामकली महला ५ ॥
11संतों से भेंट करने पर परब्रह्म स्मरण आया है,
12उनकी संगति करने से मन में संतोष प्राप्त हो गया है।
13मेरा माथा संतों के चरणों में ही झुकता है और
14अनेक बार उन्हें दण्डवत प्रणाम करता हूँ॥ १॥
15यह मन संतजनों पर बलिहारी जाता है,
16जिनकी ओट लेकर सच्चा सुख प्राप्त हुआ है और कृपा करके उन्होंने ही मेरी रक्षा की है॥ १॥ रहाउ ॥
17मैं तो संतों के चरण धो धोकर पीता रहता हूँ और
18उनके दर्शन देख-देखकर ही जीवन पा रहा हूँ।
19मेरे मन में संतों की ही आशा बनी हुई है और
20उनकी सेवा ही हमारी निर्मल राशि है॥ २॥
21संतों ने हमारा पर्दा रख लिया है अर्थात् पापों को ढंक लिया है।
22उनकी कृपा से मैं कभी दुखी नहीं होता।
23कृपालु प्रभु ने ही संतों का साथ दिया है और
24दयालु संत मेरे सहायक बन गए हैं।॥ ३॥
25अब अन्तर्मन में मति एवं बुद्धि का आलोक हो गया है।
26संत गहन गंभीर एवं गुणों के भण्डार हैं और
27वही सब जीवों के प्रतिपालक हैं।
28नानक तो संतों को देखकर निहाल हो गया है॥ ४॥ १० ॥ २१ ॥
29रामकली महला ५ ॥
30हे प्राणी ! घर, राज्य एवं धन संपदा तेरे किसी काम नहीं आने।
31माया रूपी विष के ये जंजाल भी तेरे काम नहीं आने।
32यह भी समझ लो केि घनिष्ठ मित्र भी छल ही हैं
33केवल हरि-नाम ही तेरे साथ जाएगा ॥ १॥
34हे प्यारे, राम नाम का गुणगान कर ले, हरि-स्मरण से ही तेरी लाज रहेगी।
35हरि का सिमरन करने से यम तुझे तंग नहीं करेगा।॥ १॥ रहाउ॥
36परमात्मा की स्मृति के बिना सब कार्य व्यर्थ हैं।
37सोना, चांदी एवं रुपए-पैसे मिट्टी के समान हैं।
38गुरु का शब्द जपने से ही मन को सुख हासिल होगा और
39लोक-परलोक में तेरा मुख उज्ज्वल होगा ॥ २॥
40तेरे पूर्वज भी संसार के धंधे कर करके थक चुके हैं,
41किन्तु माया ने किसी का कार्य पूरा नहीं किया।
42जो भी व्यक्ति हरि-नाम का जाप करता है,
43उसकी सब आशाएँ पूरी हो जाती हैं।॥ ३॥
44भगवान के भक्तों को उसके नाम का ही आसरा है और
45अमूल्य मानव-जन्म को संतों ने ही जीता है।
46हरि का संत जो भी करता है, वह मंजूर हो जाता है।
47दास नानक उन संतों पर ही कुर्बान जाता है॥ ४॥ ११॥ २२॥
48रामकली महला ५ ॥
49हे जीव ! लोगों को दुख देकर तू बड़ा धन इकट्टा करता है,
50लेकिन यह तेरे किसी काम नहीं आना, अपितु दूसरों के उपयोग के लिए यहाँ ही रह जाएगा।
51तू धन में अंधा होकर बड़ा अहंकार करता है,
52लेकिन यम की फॉसी में बांधकर तुझे परलोक में ले जाया जाएगा ॥ १॥
53अरे मूर्ख ! दूसरों से ईर्षा करना छोड़ दे,
54तूने इस दुनिया में केवल एक रात ही रहना है।
55हे माया के मतवाले ! तूने एक दिन यहाँ से चले जाना है,
56तू सपने में लीन हो रहा है।१॥ रहाउ॥
57बाल्यावस्था में बालक ज्ञानहीन होता है और
58यौवनावस्था में विकारों में लग जाता है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं