सिख धर्म
वापस

गुरु ग्रंथ साहिब 859 · Raag Gond

1ऑकार एक है, उसका नाम सत्य है, वही संसार का रचयिता है, सर्वशक्तिमान है, उसे किसी से कोई भय नहीं है, वह वैर भावना से रहित है, वह कालातीत ब्रह्म-मूर्ति सदा शाश्वत है, वह जन्म-मरण से रहित है, वह स्वयं ही प्रकाशमान हुआ है, जिसे गुरु-कृपा से पाया जा सकता है।

2रागु गोंड चउपदे महला ४ घरु १ ॥

3हे जीव ! यदि मन में भगवान् पर आशा रखोगे तो अनेकों ही मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो जाएगी।

4जो तेरे दिल में है, परमात्मा सबकुछ जानता है। प्रभु इतना दयालु है कि वह किसी की मेहनत को तिल भर भी व्यर्थ नहीं होने देता।

5हे मेरे मन ! उस ईश्वर पर आशा रखो, जो सबमें समा रहा है॥ १॥

6हे मेरे मन ! ईश्वर की ही आशा करो,

7जो व्यक्ति प्रभु के अलावा किसी अन्य पर आशा करता है, उसकी वह आशा निषफल है और वह सारी व्यर्थ हो जाती है॥ १॥ रहाउ I।

8यह जो सारा परिवार नजर आता है, यह माया का मोह है, इस परिवार की आशा में लगकर अपना जन्म मत गंवाना।

9परिवार के इन सदस्यों के वश में कुछ भी नहीं है, ये बेचारे कुछ नहीं कर सकते। इनके करने से कुछ नहीं होता और इनका कुछ वश नहीं चलता।

10हे मेरे मन ! अपने प्यारे प्रभु की आशा करो, जो तुझे भवसागर से पार कर देगा और तेरे पूरे परिवार को भी यम से छुड़ा देगा॥ २॥

11यदि तू अपने किसी पराए मित्र की आशा करता है तो यह मत समझ लेना कि यह तेरे कहीं काम आएगी।

12पराए मित्र की आशा तो द्वैतभाव है, जो झूठी होने के कारण क्षण में नाश हो जाती है।

13हे मेरे मन ! अपने सच्चे प्रियतम प्रभु की आशा करो, जो तेरी सारी मेहनत को साकार कर देता है॥ ३॥

14हे मेरे स्वामी ! यह आशा एवं अभिलाषा सब तेरी ही हैं, तू जैसी आशा करवाता है, वैसी ही कोई आशा करता है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं