गुरु ग्रंथ साहिब 806 · Raag Bilaaval · Guru Arjan Dev Ji
1उस विधाता का सिमरन कर कर के मेरी साधना पूरी हो गई है॥ ३॥
2नानक ने साधु की संगति में आनंद प्राप्त किया है।
3पूर्ण गुरु की कृपा से प्रभु हृदय-घर में आ गया है॥ ४॥ १२॥ १७ ॥
4बिलावलु महला ५ ॥
5पूर्ण गुरुदेव सर्व सुखों का भण्डार है॥ १॥ रहाउ ॥
6भगवान् का नाम जपने से ही मनुष्य जीते हैं किन्तु
7शाक्त आदमी मर कर ख्वार होते हैं।॥ १॥
8राम नाम मेरा रखवाला बन गया है लेकिन
9शाक्त बेचारा यूं ही समय बर्बाद करता रहता है।२॥
10अनेक व्यक्ति संत-महापुरुषों की निंदा कर-करके बहुत दुखी होते हैं और
11मृत्यु की फाँसी उनके गले, सिर एवं पैरों में पड़ी रहती है॥ ३॥
12हे नानक ! जो नाम जपते हैं,
13यम उनके निकट नहीं आता ॥ ४ ॥ १३ ॥ १८ ॥
14रागु बिलावलु महला ५ घरु ४ दुपदे
15ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
16वह कौन-सा संयोग है, जब मैं अपने प्रभु को मिलूंगा ?
17मैं पल-पल एवं हर क्षण सदैव हरि को जपता रहता हूँ॥ १॥
18मैं नित्य प्रभु के चरण-कमल का ध्यान करता रहता हूँ।
19वह कौन-सी सुमति है, जिस द्वारा प्रियतम को पा लूंगा ॥ १॥ रहाउ ॥
20नानक प्रार्थना करता है कि हे मेरे प्रभु! ऐसी कृपा करो
21ताकि मैं कभी भी तुझे विस्मृत न करूं ॥ २॥ १॥ १६॥
22बिलावलु महला ५ ॥
23प्रभु के चरण-कमल का हृदय में ध्यान करने से
24रोग दूर हो गए हैं और सर्व सुख पा लिए हैं।॥ १॥
25गुरु ने दुख काट दिया है और मुझे नाम का दान दिया है।
26अब मेरा जन्म सफल हो गया है और यह जीवन परवान हो गया है॥ १॥ रहाउ॥
27हे नानक ! प्रभु की अमृत वाणी की कथा अकथनीय है और
28ज्ञानी पुरुष इसे जपकर ही जीते हैं।॥ २॥ २॥ २० ॥
29बिलावलु महला ५ ॥
30पूर्ण गुरु-सतगुरु ने हृदय में शान्ति कर दी है।
31सुख उत्पन्न हो गया है और मन में अनहद ध्वनियों वाले बाज़े बज रहे हैं।१॥ रहाउ ॥
32ताप, पाप एवं संताप नाश हो गए हैं।
33हरि का सिमरन करने से सारे किल्विष दूर हो गए हैं।१॥
34हे (सत्संगी रूपी) सुन्दर नारी ! मिलकर आनंद करो,
35गुरु नानक ने मेरी लाज रख ली है॥ २॥ ३॥ २१॥
36बिलावलु महला ५ ॥
37ममता, मोह एवं छल-कपट के नशे में मतवाला मनुष्य बन्धनों में फंसा हुआ अति विकराल नजर आता है।
38पाप करते हुए उसकी आयु दिन-ब-दिन नाश होती रहती है तथा फाँसी में फँसा हुआ यम के जाल में पड़ा हुआ है॥ १॥
39हे दीनदयाल प्रभु ! मैं तेरी शरण में आया हूँ।
40यह संसार सागर महाविषम एवं अति भारी है, इसलिए मुझे साधु की संगति में उनकी चरण-धूलि देकर उद्धार कर दो ॥ १॥ रहाउ॥
41हे मेरे स्वामी-प्रभु ! तू सुखों का दाता है और सर्वकला समर्थ है। मेरी जिंदगी एवं शरीर इत्यादि सब कुछ तेरी ही संपति है।
42हे परमेश्वर ! मेरे भ्रम के बन्धन काट दो। हे नानक के प्रभु ! तू सदैव कृपालु है॥ २॥ ४॥ २२॥
43बिलावलु महला ५ ॥
44परमेश्वर ने अपने विरद् का पालन करते हुए सब आनंद कर दिया है।
45वह साधुजनों पर कृपालु हो गया है और सारा परिवार भी प्रसन्न हो गया है॥ १ ॥
46मेरा कार्य सतगुरु ने स्वयं ही संवार दिया है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं