गुरु ग्रंथ साहिब 769 · Raag Soohee · Guru Amar Daas Ji
1करोड़ों में किसी विरले व्यक्ति ने ही हरि-नाम के भेद को पहचाना है, जगत् में केवल हरि-नाम ही सत्य है।
2हे नानक ! नाम द्वारा ही सत्य के दरबार में बड़ाई मिलती है। लेकिन द्वैतभाव में फंसकर इन्सान अपनी इज्जत गंवा लेता है॥ ३॥
3भक्तों के घर में सच्चा कार्य यही किया जाता है कि वे सदा हरि का गुणगान करते रहते हैं।
4हरि ने स्वयं ही उन्हें भक्ति का खजाना दिया है। वे भयानक यम को नियंत्रण में करके हरि में समाए रहते हैं।
5वे भयानक यम को वश में करके प्रभु में लीन रहते हैं और हरि को बहुत अच्छे लगते हैं। उन्होंने नाम रूपी सच्चा खजाना हरि से पा लिया है।
6हरि ने सहज स्वभाव ही यह कोष दिया है, जो सदैव अक्षय है और कभी कम नहीं होता।
7हरि-भक्त सर्वोत्तम हैं, सदैव सर्वोपरि है और गुरु के शब्द द्वारा उनका जीवन सुन्दर बन गया है।
8हे नानक ! परमात्मा ने उन्हें स्वयं ही कृपा करके अपने साथ मिला लिया है और युग-युगांतर उन्हें शोभा प्राप्त हुई है॥ ४॥ १॥ २॥
9सूही महला ३ ॥
10जहाँ सच्चे परमात्मा का चिंतन होता रहता है और सच्चे शब्द द्वारा परम सत्य का यशगान किया जाता है,
11वहाँ से अहंकार एवं सारे पाप दूर हो जाते हैं और वहाँ सत्य को ही हृदय में बसाया जाता है।
12जिसने सत्य को अपने हृदय में बसा लिया है, परमात्मा ने उसे दुस्तर भवसागर से तार दिया है और उसे फिर से भवसागर से पार होने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
13जिसने परम-सत्य प्रभु के दर्शन करवा दिए हैं, वह सतिगुरु भी सत्य है और उसकी वाणी भी सत्य है।
14जो व्यक्ति सत्य का गुणगान करता है, वह सत्य में ही लीन हो जाता है और उसे सर्वत्र सत्य ही दिखाई देता हैं।
15हे नानक ! सबका मालिक परमेश्वर सत्य है, उसका नाम सत्य है और उस सत्य-नाम के सिमरन द्वारा ही जीव को मुक्ति मिलती है॥ १॥
16सच्चे सतिगुरु ने जिस जीव को सत्य का ज्ञान दिया है, वह सत्यस्वरूप परमात्मा ही उसकी प्रतिष्ठा रखता है।
17परमात्मा का सच्चा प्रेम ही उसका सच्चा भोजन बन जाता है और सत्य-नाम द्वारा ही उसे सुख हासिल होता है।
18जिस व्यक्ति को सत्य-नाम द्वारा सुख मिलता है, वह फिर कभी मरता नहीं और न ही वह गर्भ-योनियों में निवास पाता है।
19उसकी ज्योति परम ज्योति में मिल जाती है, वह सत्य में ही समा जाता है और सत्य-नाम द्वारा उसके हृदय में प्रभु-ज्योति का प्रकाश हो जाता है।
20जिन्होंने सत्य के भेद को जान लिया है, वे सत्यवादी बन गए हैं और रात-दिन परम-सत्य का ही ध्यान करते रहते हैं।
21हे नानक ! जिनके हृदय में सत्य-नाम स्थित हो गया है, वह बिछुड़ कर दुख नहीं पाते॥ २॥
22जहाँ सच्ची वाणी द्वारा भगवान् का गुणगान किया जाता है, उस घर में मंगल बन जाता है।
23सत्य का निर्मल करने से तन-मन भी सच्चा हो जाता है और सत्यस्वरूप प्रभु उसके हृदय में आ बसता है।
24फिर उसके मन में सत्य ही व्याप्त होता है, वह सत्य ही बोलता है और वही होता है जो प्रभु आप करता है।
25मैं जहाँ भी देखता हूँ, वहाँ सत्य का प्रसार है, उसके अतिरिक्त अन्य कोई नहीं।
26जीव सत्यस्वरूप परमात्मा से उत्पन्न होता है और सत्य में ही समा जाता है। जिसमें दैतभाव होता है, वह जन्मता-मरता रहता है।
27हे नानक ! ईश्वर स्वयं ही सबकुछ करता है और जीवों से करवाता है॥ ३॥
28भगवान् के सच्चे भक्त उसके दरबार में शोभा के पात्र बनते हैं और सत्य का ही बखान करते रहते हैं।
29उनके ह्रदय में सच्ची वाणी रहती है और सत्य द्वारा अपने आत्मस्वरूप को पहचान लेते हैं।
30जब वे अपने आत्मस्वरूप को पहचान लेते हैं तो वे सत्य को जान लेते हैं और उन्हें सत्य की सूझ हो जाती है।
31शब्द-ब्रह्म सत्य है, इसकी शोभा भी सत्य है और सत्य से ही सुख हासिल होता है।
32सत्य में रंगे हुए भक्त एक प्रभु के रंग में ही रंगे रहते हैं और उन्हें माया का कोई रंग नहीं होता।
33हे नानक ! जिसके मस्तक पर भाग्य में लिखा होता है, उसे ही सत्य (परमात्मा) की प्राप्ति होती है॥ ४॥ २॥ ३॥
34सूही महला ३ ॥
35जीव-स्त्री चाहे चारों युग भटकती रहे, लेकिन सतिगुरु के बिना उसे पति-प्रभु प्राप्त नहीं होता।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं