सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 718 · Raag Todee

1टोडी महला ५ ॥

2मैंने भगवान के सुन्दर चरण अपने हृदय में बसा लिए हैं और

3अपने स्वामी सतगुरु का सिमरन करने से मेरे सभी कार्य सफल हो गए है ॥ १ ॥ रहाउ ॥

4समस्त विचारो का परम तत्त्व यही है कि हरि-परमेश्वर का कीर्तिगान ही पूजा एवं दान-पुण्य है।

5उस अगम्य एवं अपरंपार ठाकुर जी का स्तुतिगान करने से मुझे अतुलनीय सुख उपलब्ध हुआ है।१॥

6परमात्मा ने जिन भक्तों को अपना बना लिया है, वह उनके गुणों-अवगुणों पर दोबारा विचार नहीं करता।

7हे नानक ! मैं तो हरि-नाम रूपी रत्न की शोभा सुन-सुनकर एवं उसका जाप करके ही जीवित रहता हूँ और उसे ही मैंने अपने गले में पिरो लिया है। २॥ ११॥ ३० ॥

8टोडी महला ९

9ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

10मैं अपनी अधमता के बारे में क्या बताऊँ ?

11मैं तो केवल स्वर्ण एवं नारी के स्वादों में ही फंसा रहा और कभी भी प्रभु का कीर्तिगान नहीं किया। १॥रहाउ॥

12मैंने तो इस झूठे जगत को ही सत्य समझकर उसके साथ रुचि उत्पन्न की है।

13मैंने दीन-बन्धु परमात्मा का कभी भी सिमरन नहीं किया, जो हमारा सदैव ही सहायक बनता है। १ |

14मैं तो रात-दिन माया में ही मग्न रहा, जिससे मेरे मन की (अहंकार रूपी) मैल दूर नहीं हुई।

15हे नानक ! अब तो भगवान की शरण में आने के सिवाय मुक्ति प्राप्त करने का अन्य कोई उपाय नहीं है। २ ॥ १ ॥ ३१॥

16टोडी बाणी भगतां की

17ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

18कोई कहता है कि ईश्वर हमारे निकट ही है और कोई कहता है कि वह कहीं दूर रहता है।

19यह बातें तो यूं ही अनहोनी लगती हैं जैसे यह कह दिया जाए कि जल की मछली खजूर पर चढ़ रही है। १॥

20हे अज्ञानी जीव ! तू क्यों व्यर्थ बकवास कर रहा है,

21चूंकि जिसने भी ईश्वर को प्राप्त किया है, उसने तो इस भेद को गुप्त ही रखा है। १॥ रहाउ ॥

22तू तो पण्डित बनकर वेद की व्याख्या करता है

23किन्तु मूर्ख नामदेव केवल राम को ही जानता है। २ ॥ १॥

24राम का नाम लेने से ही बताओ किस मनुष्य का कलंक (शेष) रह गया है?

25राम नाम कहते ही पापी मनुष्य पवित्र हो गए है ॥ १ ॥ रहाउ ॥

26राम के संग ही नामदेव की पूर्ण आस्था हो गई है।

27अब वह एकादशी का व्रत क्यों रखे और तीर्थो पर भी स्नान करने के लिए क्यों जाये ? ॥१ ॥

28नामदेव कहते हैं कि राम-सिमरन रूपी शुभ कर्म करने से सुमति प्राप्त हो गई है।

29बताओ, गुरु की मति द्वारा राम कहकर कौन-कौन बैकुण्ठ में नहीं गए। २ ॥ २॥

30यह तीन छंदों वाला शब्द खेल रूप है। १॥ रहाउ॥

31कुम्हार के घर में मिट्टी के बर्तन हैं, राजा के घर शक्ति रूपी सांडनी है और

32ब्राह्मण के घर विद्या है, इस प्रकार यह बर्तन, शक्ति एवं विद्या की कहानी है। १॥

33बनिए (दुकानदार) के घर में हींग है, भैंसे के माथे पर सींग है और

34मंदिर में शिवलिंग स्थापित है यह हींग, सींग और शिवलिंग की कहानी है ॥ २ ॥

35तेली के घर में तेल है, जंगल में बेल है और

36माली के घर में केले हैं, यह तेल, बेल और केले की कहानी है॥३॥

37संतों की सभा में गोविन्द है, गोकुल में श्याम (कृष्ण) प्रमुख है और

38नामदेव के हृदय घर में राम है। यह राम, श्याम और गोविन्द की कहानी है। ४ । ३ ॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं