गुरु ग्रंथ साहिब 580 · Raag Vadhans · Guru Nanak Dev Ji
1जो सच्चे दरबार में सम्मानित होते हैं, वही आगे शूरवीर कहलाते हैं।
2वे आदरपूर्वक जाते हैं व भगवान के दरबार में प्रतिष्ठा प्राप्त करते है और परलोक में उन्हें कोई दुःख नहीं होता।
3वे एक परमात्मा को सर्वव्यापक समझकर उसका ही ध्यान करते हैं तो उन्हें दरबार से फल प्राप्त होता है और आराधना करने से उनके तमाम भय दूर हो जाते हैं।
4अभिमान करके ऊँचा नहीं बोलना चाहिए और अपने मन को काबू में रखना चाहिए क्योंकि सर्वज्ञाता भगवान सब कुछ स्वयं ही जानता है।
5उन शूरवीरों का मरना सफल है, जिनकी मौत भगवान के दरबार में स्वीकृत होती है॥ ३॥
6गुरु नानक का कथन है कि हे बाबा ! किसी के देहांत पर क्यों विलाप करें ? जबकि यह दुनिया तो केवल एक नाटक अथवा खेल ही है।
7भगवान अपनी सृष्टि-रचना को देखता है और अपनी कुदरत पर विचार करता है।
8वह अपनी कुदरत पर विचार करता है और जगत को उसने अपना सहारा दिया हुआ है।
9वह स्वयं ही देखता है, स्वयं ही समझता है और स्वयं ही अपने हुक्म की पहचान करता है।
10जिसने सृष्टि-रचना की है, वही इसे जानता है और उस भगवान का रूप अपार है।
11गुरु नानक का कथन है कि हे बाबा ! किसी की मृत्यु पर हम क्यों विलाप करें, क्योंकि यह संसार तो केवल एक नाटक अथवा खेल ही है॥ ४ ॥ २॥
12वडहंसु महला १ दखणी ॥
13सच्चे सृष्टिकर्ता परमपिता को ही सत्य समझना चाहिए; वह सच्चा परमेश्वर सारी दुनिया का पालनहार है।
14जिसने स्वयं ही अपने आप को उत्पन्न किया हुआ है, वह सत्यस्वरूप परमेश्वर अदृष्ट एवं अपार है।
15उसने पृथ्वी एवं गगन दोनों को जोड़कर उन्हें अलग कर दिया है। इस दुनिया में गुरु के बिना घोर अन्धेरा है।
16सूर्य एवं चन्द्रमा की रचना भी परमेश्वर ने ही की है जो दिन एवं रात को उजाला करते हैं। उसकी इस जगत-लीला का विचार करो ॥ १॥
17हे सच्चे मालिक ! तू ही सत्य है, कृपा करके मुझे अपना सच्चा प्रेम दीजिए॥ रहाउ॥
18हे परमपिता ! तूने ही सृष्टि-रचना की है और तू ही जीवों को दुःख-सुख देने वाला है।
19स्त्री एवं पुरुष तेरी ही रचना है और तूने ही मोह-माया का विष एवं (वासना का) प्रेम उत्पन्न किया है।
20उत्पत्ति के चारों स्रोत एवं विभिन्न वाणियाँ भी तेरी ही रचना है एवं तू ही जीवों को आधार प्रदान करता है।
21अपनी कुदरत को तूने अपना सिंहासन बनाया हुआ है और तू ही सच्चा न्यायकर्ता है॥ २॥
22हे विश्व के रचयिता ! जीवों का आवागमन अर्थात् जन्म-मृत्यु का चक्र तूने ही बनाया है और तुम सदा अमर हो।
23जीवात्मा विकारों में ग्रस्त होकर जन्म-मरण, आवागमन के चक्र में फंसी हुई है।
24दुष्टात्मा वाले जीव ने भगवान के नाम को विस्मृत कर दिया है, जिसके फलस्वरूप वह मोह-माया में प्रवृत्त है और इसका अब क्या उपचार है ?
25गुणों को त्यागकर इसने बुराइयों को लाद लिया है और वह अवगुणों का व्यापारी बन बैठा है॥ ३॥
26सच्चे करतार के हुक्म द्वारा प्यारी आत्मा को निमंत्रण आता है तो पति (आत्मा) पत्नी (शरीर) से जुदा हो जाता है।
27किन्तु उन बिछुड़ों हुओं को परमात्मा ही मिलाने वाला है।
28हे सुन्दरी ! मृत्यु सौन्दर्य की परवाह नहीं करती और यमदूत भी अपने मालिक के हुक्म में बंधे हुए हैं।
29यमदूत बालक एवं वृद्ध के बीच कोई फर्क नहीं समझते और दुनिया से स्नेह एवं प्रेम को तोड़ देते हैं।॥ ४॥
30सच्चे परमेश्वर के हुक्म द्वारा शरीर के नौ द्वार बन्द हो जाते हैं और हंस रूपी आत्मा आकाश को चल देती है।
31देह रूपी स्त्री अलग हो गई है; झूठ में ठग कर वह विधवा हो गई है और मृतक लाश आंगन के द्वार पर पड़ी है।
32मृतक व्यक्ति की पत्नी द्वार पर जोर-जोर से रोती-चिल्लाती है। वह कहती है कि हे माँ! पति के देहांत से मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।
33हे पति-परमेश्वर की वधुओ ! यदि रुदन करना है तो सच्चे मालिक के गुणों को याद करके उसके प्रेम के अश्रु बहाओ॥ ५ ॥
34प्यारे जीव को जल से मल-मल कर नहलाया जाता है और उसे बहुत सारे रेशमी वस्त्र पहनाए जाते हैं।
35सच्ची वाणी के कीर्तन सहित बाजे बजते हैं और शून्य मन से सभी सगे-संबंधी मृतक समान हो जाते हैं।
36पति के देहांत पर स्त्री पुकारती है कि मेरे जीवन-साथी की जुदाई मेरे लिए मृत्यु समान है और इस दुनिया में मेरा जीवन भी धिक्कार-योग्य है।
37जो अपने सच्चे पति-प्रभु के प्रेम हेतु सांसारिक कार्य करती हुई विरक्त रहती है, वही जीवित समझी जाती है॥ ६॥
38हे स्त्रियो ! जो तुम रोने के लिए आई हो, रुदन करो परन्तु मोह-माया में ठगी हुई दुनिया का विलाप झूठा है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं