सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 579 · Raag Vadhans · Guru Nanak Dev Ji

1जब ईश्वर का हुक्म आ जाता है तो प्यारी आत्मा यमलोक में धकेल दी जाती है और सभी सगे-संबंधी, भाई-बहन फूट-फूट कर रोने लग जाते हैं।

2हे मेरी माता ! जब जीव की जिन्दगी के दिन समाप्त हो जाते हैं तो शरीर एवं आत्मा जुदा हो जाते हैं।

3जीव पूर्व-जन्म में जैसे कर्म करता है, वैसे ही कर्म-फल की प्राप्ति होती है और उस ही उसका भाग्य लिखा होता है।

4वह जगत का रचयिता सच्चा पातशाह, परमेश्वर धन्य है, जिसने जीवों को (कर्मो के अनुसार) धन्धे में लगाया हुआ है॥ १॥

5हे मेरे भाइयो ! उस मालिक को याद करो चूंकि सभी ने दुनिया से चले जाना है।

6इहलोक का झूठा धंधा केवल चार दिनों का ही है, फिर जीव निश्चित ही आगे परलोक को चल देता है।

7जीव ने निश्चितं ही संसार को छोड़कर चले जाना है और वह यहाँ पर एक अतिथि के समान है, फिर क्यों अहंकार कर रहे हो ?

8जिसकी उपासना करने से उसके दरबार में सुख प्राप्त होता है, उस प्रभु के नाम का भजन करना चाहिए।

9आगे परलोक में परमात्मा के अलावा किसी का हुक्म नहीं चलता और प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है।

10हे मेरे भाइयो ! परमात्मा को याद करो, चूंकि सभी ने संसार को छोड़कर चले जाना है॥ २॥

11उस सर्वशक्तिमान प्रभु को जो मंजूर है, वही घटित होता है। जगत के जीवों का उद्यम तो एक बहाना ही है।

12सच्चा सृजनहार जल, धरती, आकाश-पाताल में सर्वव्यापी है।

13वह सच्चा सृजनहार परमात्मा अदृष्ट एवं अनन्त है, उसका अन्त पाया नहीं जा सकता।

14जो लोग एकाग्रचित होकर परमात्मा का ध्यान करते हैं, उनका इस दुनिया में जन्म लेना सफल है।

15वह स्वयं ही सृष्टि का निर्माण करता है और स्वयं ही इसका नाश कर देता है और अपने हुक्म द्वारा स्वयं ही संवारता है।

16उस सर्वशक्तिमान परमात्मा को जो कुछ मंजूर है, वही घटित होता है और यह संसार उद्यम करने का एक सुनहरी अवसर है॥ ३॥

17गुरु नानक का कथन है कि हे बाबा ! वही सच्चा रोता समझा जाता है, यदि वह प्रभु के प्रेम में रोता है।

18हे बाबा ! सांसारिक पदार्थों की खातिर जीव विलाप करता है, इसलिए सभी विलाप व्यर्थ हैं।

19यह सारा विलाप करना निरर्थक है। संसार प्रभु की ओर से विमुख होकर धन-दौलत के लिए रोता है।

20भले एवं बुरे की जीव को कुछ भी सूझ नहीं और इस शरीर को वह व्यर्थ ही गंवा देता है।

21इस दुनिया में जो भी आता है, वह इसे छोड़कर चला जाता है। इसलिए अभिमान करना तो झूठा ही है।

22गुरु नानक का कथन है कि हे बाबा ! जो प्रभु प्रेम में विलाप करता है, वही मनुष्य सच्चा वैराग्यवान एवं सही रूप में रोता समझा जाता है॥४॥१॥

23वडहंसु महला १ ॥

24हे मेरी सखियो ! आओ हम मिलकर भगवान के सत्य-नाम का सिमरन करें।

25आओ, हम भगवान से अपनी आत्मा के विरह पर संवेदना व्यक्त करें और अपने मालिक का चिंतन करें।

26आओ, हम भगवान की आराधना करे एवं परलोक के मार्ग का ध्यान करें, क्योंकि हमने भी वहाँ जाना है।

27जिस ईश्वर ने उसे पैदा किया था, अब उसने ही उसे वापिस लें लिया है और यह (मृत्यु) ईश्वरेच्छा से हुई है।

28जो कुछ उसने किया है, वही आगे आया है। हम कैसे कोई हुक्म परमात्मा को कर सकते हैं ? अर्थात् हम जीवों के वश में कुछ भी नहीं।

29हे सखियो ! आओ, मिलकर भगवान के सत्य-नाम का स्तुतिगान करें।॥ १॥

30हे लोगो, मौत तो अटल है, इसे बुरा नहीं कहना चाहिए क्योंकि कोई विरला ही ऐसा जीव है, जो मौत को जानता है।

31इसलिए सर्वशक्तिमान भगवान की आराधना करो, इस तरह तुम्हारे परलोक का मार्ग सुखद हो जाएगा।

32यदि तुम सुखद मार्ग जाओगे तो अवश्य फल की प्राप्ति होगी एवं परलोक में भी तुझे प्रशंसा मिलेगी।

33यदि तुम भजन-सिमरन की भेंट सहित जाओगे तो तुम सत्य में विलीन हो जाओगे और तुम्हारी इज्जत स्वीकृत हो जाएगी।

34तुझे भगवान के महल में स्थान मिल जाएगा, उसे अच्छा लगेगा तथा प्रेमपूर्वक आनंद प्राप्त करोगे।

35हे लोगो ! मौत तो अटल है, इसे बुरा नहीं कहना चाहिए, चूंकि कोई विरला ही है जो मौत को जानता है॥ २॥

36उन शूरवीरों का मरना सफल है, जो मर कर परमात्मा को स्वीकृत हो जाते हैं।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं