गुरु ग्रंथ साहिब 539 · Raag Bihaagraa · Guru Raam Daas Ji
1नानक का कथन है कि हे मेरी आत्मा ! परमात्मा के दास त्राहि-त्राहि करते हुए उसकी शरण में आते हैं और गुरु परमात्मा उनके रक्षक बन जाते हैं।॥ ३॥
2हे मेरी आत्मा ! परमात्मा के भक्तजन उस में सुरति लगाने से संसार-सागर पार कर लेते हैं, प्रारम्भ से ही अहोभाग्य से वे अपने परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं।
3हे मेरी आत्मा ! परमात्मा का नाम एक जहाज है और गुरु खेवट अपने शब्द के माध्यम से जीव को उस नाम द्वारा भवसागर से पार कर देते हैं।
4हे मेरी आत्मा ! परमात्मा सर्वशक्तिमान तथा बड़ा दयालु है और गुरु सतगुरु की कृपा से वह मनुष्य को मीठा लगने लग जाता है।
5हे परमात्मा ! कृपा करके मेरी प्राथना सुनो, चूंकि नानक ने तेरे नाम की ही आराधना की है। ४॥ २ ॥
6बिहागड़ा महला ४ ॥
7हे मेरी आत्मा ! परमात्मा के नाम का यशगान करना ही इस दुनिया में एक सुकर्म है, परमात्मा की कीर्ति करने से ही वह मन में बस जाता है।
8हे मेरी आत्मा ! परमेश्वर का नाम बड़ा पवित्र है, उसके नाम का जाप करने से जीव का उद्धार हो जाता है।
9हे मेरी आत्मा ! परमात्मा के नाम से सभी किल्विष, पाप एवं दुःख नाश हो जाते हैं और गुरु ने परमात्मा के नाम से हमारी अहंत्व की मैल उतार दी है।
10नानक का कथन है कि बड़े पुण्य-कर्म से ही हरि के नाम की आराधना की है और इस तरह हम जैसे मूर्ख एवं अज्ञानियों का उद्धार हुआ है॥१॥
11हे मेरी आत्मा ! जो व्यक्ति हरि के नाम का ध्यान-चिंतन करते हैं, कामादिक विकार उनके वश में आ जाते हैं।
12हे मेरी आत्मा ! अन्तरात्मा में ही हरि के नाम की नवनिधि है, किन्तु इस अलक्ष्य को गुरु-सतिगुरु दिखा देता है।
13हे मेरी आत्मा ! गुरु ने हमारी आशा एवं मंशा पूरी कर दी है, प्रभु को मिलने से सारी भूख मिट जाती है।
14नानक का कथन है कि हे मेरी आत्मा ! भगवान ने प्रारम्भ से ही जिनके माथे पर भाग्य लिख दिया है, वही हरि का गुणगान करते हैं।॥ २॥
15हे मेरी आत्मा ! हम अज्ञानी पापी एवं छल-कपटी हैं तथा दूसरों से द्रोह करने वाले और (पराया) धन ठगने वाले ठग हैं।
16हे मेरी आत्मा ! सौभाग्य से ही गुरु प्राप्त हुआ है और पूर्ण गुरु के माध्यम से गति (मोक्ष) का मार्ग प्राप्त हुआ है।
17हे मेरी आत्मा ! गुरु ने हरिनामामृत मेरे मुख में डाल दिया है और फिर मेरी मृतक आत्मा दुबारा जीवित हो गई है।
18नानक का कथन है कि हे मेरी आत्मा ! जो सच्चे गुरु को मिले हैं, उनके सारे दुःख नष्ट हो गए हैं।॥ ३॥
19हे मेरी आत्मा ! हरि का नाम अति उत्तम है, जिसकी आराधना करने से पाप नाश हो जाते हैं।
20हे मेरी आत्मा ! गुरु-हरि ने पतितों को भी पवित्र कर दिया है और वे चारों दिशाओं एवं चारों ही युगों में प्रख्यात हो गए हैं।
21हे मेरी आत्मा ! हरि-नामामृत के सरोवर में स्नान करने से मनुष्य की अहंकार की सारी मैल दूर हो गई है।
22नानक का कथन है कि हे मेरी आत्मा ! एक क्षण भर के लिए भी हरि के नाम में लीन होने से अपराधी पापी जीवों का भवसागर से उद्धार हो गया है॥ ४॥ ३ ॥
23बिहागड़ा महला ४ ॥
24हे मेरी आत्मा ! मैं उन पर बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने परमेश्वर के नाम को अपने जीवन का आधार बनाया हुआ है।
25हे मेरी आत्मा ! गुरु-सतगुरु ने मेरे मन में परमात्मा का नाम बसा दिया है और उन्होंने मुझे भवसागर से पार कर दिया है।
26हे मेरी आत्मा ! जिन्होंने एकाग्रचित होकर ईश्वर का ध्यान किया है, उन संतजनों की मैं जय-जयकार करता हूँ।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं