सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 451 · Raag Aasaa · Guru Raam Daas Ji

1अपने हाथों से वे पूर्ण सच्चे गुरु की सेवा करते हैं और उनकी अहंत्व की भूख दूर हो जाती है।

2गुरु-सिक्खों की तमाम भूख दूर हो जाती है, उनकी संगति करके बहुत सारे लोग (नाम-स्मरण की) पेट-पूजा करते हैं।

3नानक ने हरि के नाम का पुण्य बोया है और दोबारा हरि के नाम के पुण्य-फल में कमी नहीं आती ॥ ३॥

4हे प्रभु ! गुरु के सिक्खों के मन में शुभकामनाएँ हैं, जिन्होंने मेरे सच्चे गुरु के दर्शन प्राप्त किए हैं।

5यदि कोई उन्हें हरि-नाम की कथा सुनाए तो वह गुरु के सिक्खों के मन को मीठा लगता है।

6गुरु के सिक्ख जिन पर मेरा सच्चा गुरु सुप्रसन्न है, प्रभु के दरबार में उन्हें सम्मान की पोशाक पहनाई जाती है।

7नानक खुद भी हरि का रूप बन गया है, चूंकि उसके मन में हरि बस गया है ॥४॥१२॥१९॥

8आसा महला ४ ॥

9जिन्होंने मेरे पूर्ण सतिगुरु से भेंट की है, गुरु उनके मन में हरि का नाम दृढ़ कर देता है।

10जो लोग हरि-नाम का ध्यान करते हैं, उनकी तृष्णा एवं माया की तमाम भूख दूर हो जाती है।

11जो पुरुष हरि-नाम को याद करते हैं, उनके समीप यमदूत भी नहीं आता।

12हे भगवान ! नानक पर कृपा करो, ताकि वह नित्य हरि नाम का जाप करता रहे और हरि नाम ही उसका उद्धार करता है॥ १ ॥

13जो मनुष्य गुरुमुख बनकर नाम का ध्यान करते हैं, उन्हें दोबारा जीवन मार्ग में कभी विध्न नहीं आता।

14जिन्होंने महापुरुष सच्चे गुरु को प्रसन्न कर लिया है, उनकी सारी दुनिया पूजा करती है।

15जिन्होंने अपने प्यारे सतिगुरु की सेवा की है, वे सदा सुखी रहते हैं।

16हे नानक ! जिन्हें सच्या गुरु मिल गया है, उन्हें ही भगवान मिला है॥ २॥

17जिन गुरुमुखों के ह्रदय में भगवान का प्रेम है, परमात्मा खुद ही उनका रखवाला है।

18कोई मनुष्य उनकी कैसे निन्दा कर सकता है, जिन्हें प्रभु का नाम प्यारा लगता है।

19जिनका मन प्रभु के साथ रम जाता है, दुष्ट लोग उनकी निन्दा चारों ओर करने के लिए टक्करें मारते रहते हैं।

20नानक ने नाम का ध्यान किया है, भगवान खुद उसका रखवाला है॥ ३॥

21ईश्वर ने प्रत्येक युग में अपने भक्त उत्पन्न किए हैं और संकट के समय उनकी रक्षा करता आ रहा है।

22दुष्ट हिरण्यकशिपु का हरि ने संहार कर दिया और अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की।

23अहंकारी एवं निन्दकों को प्रभु ने पीठ देकर अपने भक्त नामदेव को दर्शन दिए।

24नानक ने भी ऐसे अपने भगवान की भक्ति की है कि अंतकाल वह उसे भी बचा लेगा ॥ ४ ॥ १३ ॥ २० ॥

25आसा महला ४ छंत घरु ५

26ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।

27हे मेरे प्यारे परदेसी मन ! तू अपने घर में लौट आ।

28हे मेरे प्यारे ! हरि रूपी गुरु से मिल चूंकि प्रभु तेरे चित्त में बस जाए।

29हे मेरे प्यारे ! यदि प्रभु तुझ पर कृपा करे तो तू उसके प्रेम में मौज कर ।

30नानक का कथन है कि जब गुरु प्रसन्न हो जाता है तो वह ईश्वर से मिला देता है॥ १॥

31हे मेरे प्यारे ! मैंने अपने प्रभु के प्रेम का स्वाद नहीं चखा

32क्योंकि मेरे मन की तृष्णा नहीं बुझी है। हे मेरे प्रियतम ! तुझे देखने की आशा मुझे सदैव लगी रहती है।

33नित्य यौवन बीतता जा रहा है और मृत्यु मेरी सांसें चुरा रही है।

34नानक का कथन है कि हे मेरे प्यारे ! वही जीव-स्त्री भाग्यवान प्रभु को अपने हृदय में बसाए रखती है॥ २॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं