सिख धर्म
वापस

गुरु ग्रंथ साहिब 444 · Raag Aasaa · Guru Raam Daas Ji

1जिसकी अन्तरात्मा में राम नाम का प्रकाश हो जाता है, उसका जन्म एवं शरीर सभी सफल हो जाते हैं।

2हे नानक ! रात-दिन सदैव ही हरि का भजन करो और गुरुमुख बनकर ही मनुष्य अपने आत्मस्वरूप में निवास करता है॥ ६॥

3जिनकी श्रद्धा राम के नाम में लगी है, उनका किसी अन्य पदार्थ में चित्त नहीं लगा।

4यदि सम्पूर्ण धरती स्वर्ण बनाकर उन्हें दे दी जाए तो भी राम-नाम के बिना वे किसी अन्य पदार्थ से स्नेह नहीं करते।

5राम का नाम उनके मन को भाता है और इसी द्वारा उन्हें परम सुख प्राप्त होता है। अन्तिम क्षण संसार से कूच करते यह परलोक में भी उनका साथ देता है।

6उन्होंने राम नाम रूपी धन-पूंजी संचित कर ली है, जो न जल में डूबती है और न ही साथ छोड़ कर जाती है।

7राम का नाम ही इस युग में नाव का कार्य करता है और यमकाल इसके निकट नहीं आता।

8हे नानक ! गुरुमुख बनकर ही राम को पहचाना जाता है। कृपा करके वह मनुष्य को अपने साथ मिला लेता है॥ ७॥

9राम का नाम ही सत्य है और गुरुमुख बनकर ही इसे जाना जाता है।

10प्रभु का सेवक वह है, जो गुरु की सेवा में लगता है, जिसने अपना तन-मन गुरु को अर्पण किया है, उसके मन में श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है।

11जो सेवक अपना मन-तन अर्पण करता है और बहुत श्रद्धा रखता है, उसे गुरु सेवा-भाव के कारण प्रभु से मिला देता है।

12दीनानाथ एवं जीवों का दाता पूर्ण गुरु के माध्यम से प्राप्त होता है।

13गुरु ही शिष्य है और शिष्य ही गुरु है अर्थात् दोनों एक रूप हैं। दोनों ही गुरु के उपदेश को प्रचलित करते हैं।

14हे नानक ! गुरु राम-नाम का मंत्र शिष्य के हृदय में बसाता है और सहज ही उसका राम से मिलन हो जाता है॥ ८ ॥ २ ॥ ६ ॥

15ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।

16आसा छंत महला ४ घरु २ ॥

17सृष्टि का रचयिता हरि दु:खों का नाश करने वाला है, हरि का नाम पतितों को पावन करने वाला है।

18जिन्हें हरि की सेवा-भक्ति प्रिय लगती है, उन्हें परमगति प्राप्त हो जाती है, हरि का नाम-सुमिरन उत्तम कर्म है, इसलिए हरि की आराधना करनी चाहिए।

19प्रत्येक दृष्टि से हरि-नाम का जाप उत्तम कर्म है, हरि का जाप करने से मनुष्य आत्मिक स्थिरता प्राप्त कर लेता है।

20यह जन्म-मरण दोनों के दु:ख को मिटा देता है और सहज ही सुख में सोता है।

21हे हरि ! मुझ पर कृपा करो, हे हरि ठाकुर ! मैं अपनी आत्मा में तेरा ध्यान करता रहूँ।

22जग का रचयिता परमात्मा दुःखों का नाश करने वाला है, हरि का नाम पतितों को पावन करने में समर्थ है॥ १॥

23कलियुग में हरि नाम उत्तम पदार्थ है, लेकिन सच्चे गुरु के प्रेम द्वारा ही हरि का नाम जपा जा सकता है।

24गुरुमुख बनकर ही हरि-नाम का अध्ययन करना चाहिए, और गुरुमुख बन कर ही हरि-नाम को सुनना चाहिए, हरि-नाम का जाप करने एवं सुनने से दु:ख दूर हो जाते हैं।

25जिस व्यक्ति ने हरि-नाम जपा है, उसका दुख मिट गया है और उसने परम सुख देने वाला हरि नाम पा लिया है।

26जिस व्यक्ति के हृदय में सतिगुरु का ज्ञान रूपी दीपक प्रज्वलित हो गया है, उसके आलोक से उसका अज्ञानता का अँधेरा दूर हो गया है।

27उन्होंने ही हरि-प्रभु के नाम की आराधना की है, जिनके मस्तक पर प्रभु ने प्रारम्भ से ही ऐसा लेख लिखा हुआ है।

28कलियुग में हरि-नाम उत्तम पदार्थ है, लेकिन सतिगुरु के प्रेम में लीन रहने से ही हरि का नाम जपा जा सकता है ॥ २॥

29जिस व्यक्ति के मन को हरि का नाम प्रिय लगा है, उसे ही परम सुख मिला है उसने हरि नाम रूपी लाभ प्राप्त कर लिया है और निर्वाण पद प्राप्त कर लिया है।

30उसने हरि (नाम) के साथ प्रीति लगाई है और हरि का नाम उसका सखा बन गया है, जिससे उसका भ्रम एवं जन्म-मरण का चक्र मिट गया है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं