गुरु ग्रंथ साहिब 36 · Siree Raag · Guru Amar Daas Ji
1परमात्मा हमारा सब-कुछ कहा व किया, सुनता व देखता है, फिर उसके समक्ष कैसे इन्कार किया जा सकता है।
2स्वेच्छाचारी जीव असंख्य पाप कमाते हैं, पापों में गलते-सड़ते रहते हैं।
3उनको वह परमात्मा दृश्यमान नहीं है,क्योकि स्वेच्छाचारी जीव ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता।
4नानक देव जी कथन करते हैं कि जिस गुरुमुख जीव को परमात्मा शुभ-मार्ग दिखाता है, वही उस मार्ग द्वारा परमात्मा को देख पाता है॥ ४ ॥ २३॥ ५६॥
5श्रीरागु महला ३ ॥
6गुरु के बिना नाम की प्राप्ति संभव नहीं, नाम-सिमरन के बिना अहंकार रूपी रोग का निवारण नहीं होता और इस रोग के निवारण के बिना जीव आवागमन के चक्र से मुक्त नहीं होता।
7गुरु की कृपा द्वारा मन में नाम बसता है और वह जीव नाम में समाया रहता है।
8गुरु के उपदेश द्वारा हरि परमात्मा को पाया जा सकता है, इसके बिना मनमुख व्यक्ति भ्रम में ही भटकते हैं II १॥
9हे मेरे मन ! नाम-सिमरन के कारण ही परमात्मा के स्वरूप में निवास होता है।
10इसलिए तुम राम-नाम की स्तुति करो, तभी तुम्हारा आवागमन छूट सकेगा ॥ १॥ रहाउ॥
11हरि-परमेश्वर दाता एक ही सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है, इसके अतिरिक्त दूसरा अन्य कोई नहीं है।
12गुरु-उपदेश द्वारा परमात्मा का चिन्तन मन में बस जाए तो सुख सरलता से प्राप्त हो जाता है।
13वह परमात्मा अपनी दृष्टि में सभी को देखता है, जिसे वह चाहता उसी को सुख प्रदान करता है॥ २॥
14समस्त प्राणी अहंकार में लिप्त होकर पाप-पुण्य, धर्म-कर्म अथवा शुभ कर्मों आदि की गणना करते हैं, किन्तु गणना करने वाले को कोई सुख नहीं मिलता।
15ऐसे जीव विषय-विकारों की कमाई ही करते हैं और अंततः इस विष में ही समा जाते हैं।
16परमात्मा के नाम के बिना विशेष स्थान प्राप्त नहीं कर पाते तथा परलोक में जाकर दुख सहारते हैं।॥ ३॥
17जीव को शरीर आदि सब कुछ उस परमात्मा का दिया हुआ है, सभी को उस परमेश्वर का ही आसरा है।
18गुरु की कृपा द्वारा उस परमात्मा को जाने, तभी मोक्ष द्वार की प्राप्ति होती है।
19नानक देव जी कहते हैं कि हे जीव ! उस परमात्मा का स्तुति गान करो, जिसके गुणों का अंत नहीं पाया जा सकता ॥ ४॥ २४॥ ५७ ॥
20श्रीरागु महला ३ ॥
21उन जीवों को सुख आनंद की प्राप्ति होती है, जिनको सत्य नाम का आश्रय प्राप्त है।
22गुरु का उपदेश ग्रहण करने वालों ने सत्य स्वरूप परमात्मा को पाया है, जो समस्त दुखों की निवृति करता है।
23प्रायः सत्य स्वरूप परमात्मा के गुणों का गायन करें तथा सत्य नाम के साथ प्रेम करें।
24परमात्मा ने अपनी कृपा-दृष्टि द्वारा उन्हें भक्ति का भण्डार प्रदान किया है।॥ १॥
25हे मेरे मन ! उस परमात्मा के गुणों का गायन करते रहो, तुम्हें सदा आनंद बना रहेगा।
26सतिगुरु के उपदेश द्वारा हरि-नाम को प्राप्त करें, तो जीव हरि के संग ही समाया रहता है॥ १॥ रहाउ॥
27सत्य भक्ति करने वाले जीव का मन गहन रंग में रंग जाता है तथा स्वतः ही परमात्मा में लीन रहता है।
28गुरु-उपदेश द्वारा गुरुमुख जीवों का मन परमेश्वर में ऐसा मोहित हो गया है कि कुछ कथन ही नहीं किया जा सकता।
29ऐसे जीवों की जिव्हा सत्य उपदेश में रत है, नाम-अमृत का पान करती है और प्रेम सहित गुणों का गायन करती है।
30इस परमात्मा के आनंद को गुरु के मुख से उच्चारण होने वाले उपदेश द्वारा वही जीव पाते हैं, जिन पर उस परमात्मा की कृपा होती है।॥ २॥
31यह संसार संशय रूप है, इसमें जीव आयु रूपी रात सोकर (अज्ञानता में) व्यतीत करता है।
32कुछेक को वह अपनी इच्छानुसार इस संसार-सागर में से निकाल लेता है, और अपने साथ मिला लेता है।
33उनके मन में परमात्मा स्वयं ही विद्यमान होता है, जिन्होंने माया का मोह त्याग दिया है।
34परमात्मा ने स्वयं ही उन्हें सम्मान प्रदान किया है, जिन्हें वह गुरु द्वारा समझा देता है॥ ३॥
35समस्त जीवों का दाता परमेश्वर एक है, जो विस्मृत प्राणियों को समझा लेता है।
36किन्हीं जीवों को उसने स्वयं से विस्मृत आप ही किया हुआ है, उन्हें द्वैत-भाव में लगाया हुआ है।
37गुरु के उपदेश द्वारा परमात्मा प्राप्त होता है तथा आत्मा को परमात्मा से मिलाता है।
38नानक देव जी कथन करते हैं कि नित्य-प्रति हरि-नाम के चिन्तन में लीन होकर नाम में ही अभेद होता ॥४॥२५॥५८॥
39श्रीरागु महला ३ ॥
40गुणों से विभूषित जीवों ने तृष्णादि विकारों का त्याग करके सत्य स्वरूप को प्राप्त किया है।
41उसका हृदय गुरु के उपदेश में रंग गया है और जिव्हा परमात्मा के भक्ति प्रेम में रंग गई है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं