सिख धर्म
वापस

गुरु ग्रंथ साहिब 321 · Raag Gauree · Guru Arjan Dev Ji

1हे नानक ! पूर्ण गुरु की कृपा से उसने राम के नाम को अपना धन बनाया है॥ २॥

2पउड़ी ॥

3जगत् के मालिक प्रभु के साथ किसी प्रकार का धोखा सफल नहीं हो सकता। लोभ एवं मोह द्वारा प्राणी नष्ट हो जाता है।

4माया के नशे में सोए हुए मनुष्य नीच कर्म करते हैं

5और वह बार-बार योनियों में धकेले जाते हैं तथा यमराज के मार्ग में छोड़ दिए जाते हैं।

6दुःखों से बंधे हुए वह अपने कर्मों का फल पाते हैं।

7हे नानक ! यदि भगवान के नाम को विस्मृत कर दिया जाए तो सभी ऋतु व्यर्थ ही हैं।॥ १२॥

8श्लोक महला ५॥

9उठते-बैठते, सोते समय हमेशा सुख बना रहता है

10हे नानक ! भगवान के नाम की सराहना करने से मन एवं तन शीतल हो जाते हैं ॥ १॥

11महला ५॥

12प्राणी हमेशा लोभ में फँसा हुआ भटकता रहता है और कोई भी शुभ कर्म नहीं करता।

13हे नानक ! जिस इन्सान को गुरु मिल जाता है, उसके हृदय में ईश्वर निवास कर जाता है।॥ २॥

14पउड़ी॥

15संसार की समस्त वस्तुएँ कड़वी हो जाती हैं, लेकिन एक ईश्वर का नाम ही सदा मीठा रहता है।

16(परन्तु) यह स्वाद भगवान के उन भक्तों को आता है, जिन्होंने यह नाम-रस चखकर देखा है।

17उसी मनुष्य के मन में यह नाम (रस) बसता है, जिसके लिए पारब्रह्म ने ऐसा लिख छोड़ा है।

18एक निरंजन प्रभु ही हर जगह पर दिखता है। (मनुष्य का) द्वैतभाव नष्ट हो जाता है।

19नानक भी दोनों हाथ जोड़कर ईश्वर का नाम मॉगता है, लेकिन ईश्वर जिस पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करता है, उसे ही देता है॥ १३॥

20श्लोक महला ५॥

21वही याचना सर्वोत्तम है जो एक ईश्वर (के नाम) को माँगना है।

22हे नानक ! विश्व के मालिक परमेश्वर के नाम के सिवाय सब बातें व्यर्थ हैं॥ १॥

23महला ५॥

24जिसका मन ईश्वर के प्रेम में बिंधा हो, ऐसा (प्रभु की) पहचान करने वाला कोई विरला पुरुष ही होता है।

25हे नानक ! संत भगवान से मिलाने में समर्थ होता है और प्रभु को मिलने हेतु सन्मार्ग दिखा देता है॥ २॥

26पउड़ी ॥

27हे मेरे मन ! उस ईश्वर को याद कर, जो सबका दाता एवं क्षमाशील है।

28गोबिन्द का भजन करने से पापों का विनाश हो जाता है।

29गुरु ने ईश्वर के मिलन का मार्ग बतलाया है।गुरु का मन्त्र सदैव याद करना चाहिए।

30माया के तमाम रस फीके लगते हैं और केवल ईश्वर ही मन में प्रिय लगता है।

31हे नानक ! जिस परमेश्वर ने यह प्राण दिए हैं, उसका हमेशा ही ध्यान करना चाहिए ॥ १४ ॥

32श्लोक महला ५॥

33सत्यनाम रूपी बीज बोने हेतु शुभ समय आया है, जो व्यक्ति नाम रूपी बीज बोता है, वही इसका फल सेवन करता है।

34हे नानक ! यह वस्तु उस पुरुष को ही प्राप्त होती है, जिसकी किस्मत में लिखा होता है। १ ।।

35महला ५॥

36यदि इन्सान ने मॉगना है तो उसे एक सत्य-नाम ही मॉगना चाहिए। यह सत्य-नाम उसे ही मिलता है, जिसे ईश्वर स्वयं अपनी खुशी से प्रदान करता है।

37हे नानक ! यह परमेश्वर की ही देन है, जिसे खाने से मन तृप्त हो जाता है।॥ २॥

38पउड़ी॥

39दुनिया में वहीं लोग लाभ प्राप्त करते हैं, जिनके पास हरि नाम-रूपी धन एवं पूंजी है।

40वे किसी दूसरे के साथ मोह करना नहीं जानते, उन्हें एक ईश्वर पर ही भरोसा होता है।

41वे सारी दुनिया को नश्वर समझते हुए एक अटल परमेश्वर की ही भक्ति करते हैं।

42जिस व्यक्ति को ईश्वर भूल जाता हैं, उसका प्रत्येक श्वास निष्फल हो जाता है।

43हे नानक ! जिस ईश्वर ने अपने सेवकों को स्वयं अपने गले से लगाकर बचाया है, मैं उस पर हमेशा ही न्यौछावर हूँ॥ १५॥

44श्लोक महला ५॥

45जब भगवान का हुक्म हुआ तो सहज स्वभाव ही बरसात होने लगी।

46इससे अधिक मात्रा में अन्न एवं घन उत्पन्न हुए और पृथ्वी भलीभांति तृप्त एवं संतुष्ट हो गई।

47साधु हमेशा ही प्रभु की महिमा उच्चरित करता है और उसके दुःख-दरिद्रता दूर हो गए हैं।

48इन्सान वही कुछ हासिल करता है, जो आदि से उसकी किस्मत में लिखा होता है और यह परमेश्वर की इच्छानुसार मिलता है।

49हे नानक ! जिसने यह अमूल्य जीवन प्रदान किया है, उस परमेश्वर को स्मरण कर ॥ १॥

50महला ५॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं