गुरु ग्रंथ साहिब 310 · Raag Gauree · Guru Raam Daas Ji
1हे नानक ! तुम प्रभु के नाम की महिमा-स्तुति करो, सचमुच तेरी यह सेवा ईश्वर के द्वार पर स्वीकृत होगी ॥ १६ ॥
2श्लोक महला ४॥
3जिनके मन में भगवान निवास करता है, तमाम रस (खुशिया) उनके भीतर मौजूद हैं।
4भगवान के दरबार में उनके मुख उज्ज्वल होते हैं और सभी उनके दर्शन हेतु जाते हैं।
5जिन लोगों ने निर्भय परमेश्वर के नाम का ध्यान किया है, उन्हें कोई भय नहीं होता।
6जिनकी तकदीर में आदि से ही लिखा होता है, उन्होंने उत्तम परमात्मा का सिमरन किया है।
7जिनके मन में भगवान निवास करता है, उन्हें उसके दरबार में ख्याति मिलती है।
8वह अपने समूचे परिवार सहित भवसागर से पार हो जाते हैं और उनके पद्चिन्हों पर चलकर सारी दुनिया मुक्त हो जाती है।
9नानक का कथन है कि हे भगवान ! मुझे भी ऐसे महापुरुषों से मिला दे, जिन्हें देख-देख कर हम जीते रहें ॥ १॥
10महला ४॥
11जिस धरती पर मेरा सतिगुरु आकर बैठा है, वह धरती समृद्ध हो गई है।
12वे लोग भी कृतार्थ हो चुके हैं, जिन्होंने मेरे सतिगुरु के जाकर दर्शन प्राप्त किए हैं।
13हे माँ! वह पिता बड़ा भाग्यशाली है, वह कुल भी भाग्यवान है, वह माँ बड़ी भाग्यवान है, जिसने गुरु को जन्म दिया है।
14वह गुरु धन्य-धन्य है, जिसने भगवान के नाम की आराधना की है। यह स्वयं भी भवसागर से पार हुए हैं और जिन्होंने गुरु के दर्शन किए हैं, उन्हें भी गुरु ने भवसागर से मुक्त करवा दिया है।
15हे हरि ! दया करके मुझे (ऐसे) गुरु से मिला दे, चूंकि नानक उनके चरण जल से घोए॥ २॥
16पउड़ी ॥
17सत्य का पुंज सतिगुरु अमर है, जिसने ईश्वर को अपने हृदय में बसाया है।
18सत्य का पुंज सतिगुरु ऐसे महापुरुष हैं, जिन्होंने अपने हृदय से काम-क्रोध रूपी विष को नाश कर दिया है।
19जब पूर्ण सतिगुरु के दर्शन किए तो मुझ में धैर्य हो गया,
20(इसलिए) मैं अपने गुरु पर कुर्बान जाता हूँ और सदैव उन पर न्यौछावर हूँ।
21गुरमुख ने मानव जन्म सफल कर लिया है और स्वेच्छाचारी ने मानव जन्म व्यर्थ गंवा दिया है॥ १७ ॥
22श्लोक महला ४॥
23भगवान ने कृपा करके जिस व्यक्ति को सतिगुरु से मिला दिया है, ऐसा गुरमुख अपने मुख से भगवान के नाम का ही ध्यान करता रहता है।
24वह गुरमुख वही कार्य करता है, जो कार्य सतिगुरु को अच्छा लगता है। अत: पूर्ण गुरु उसे आत्मस्वरूप में बसाते हैं।
25जिनके अन्तर्मन में नाम रूपी खजाना है, गुरु उसका तमाम भय निवृत्त कर देता है।
26जिनकी भगवान स्वयं रक्षा करता है, अनेकों ही उनको नुक्सान पहुँचाने के प्रयास में खप-खप कर मर जाते हैं।
27हे नानक ! तुम भगवान के नाम का ध्यान करो। भगवान लोक तथा परलोक में मुक्त कर देगा ॥ १ ॥
28महला ४॥
29सतिगुरु की महिमा गुरु के सिक्खों को बड़ी प्यारी लगती है।
30भगवान स्वयं ही सतिगुरु की लाज-प्रतिष्ठा रखता है, इसलिए सतिगुरु की महिमा नित्य ही बढ़ती रहती है।
31सतिगुरु के हृदय में भगवान निवास कर रहा है, इसलिए भगवान स्वयं ही गुरु को दुष्टों से बचाता है।
32भगवान ही गुरु का बल एवं सहारा है। उस भगवान ने सारी दुनिया लाकर गुरु के समक्ष झुका दी है।
33जिन्होंने श्रद्धा से मेरे सतिगुरु के दर्शन किए हैं, उनके सभी पाप नाश हो गए हैं।
34भगवान के दरबार में ऐसे लोगों के मुख उज्जवल हुए हैं और उन्होंने बड़ी शोभा प्राप्त की है।
35नानक का कथन है कि मैं उनकी चरण-धूलि माँगता हूँ जो गुरु के सिक्ख मेरे भाई हैं।॥ २॥
36पउड़ी॥
37जिस सत्य के पुंज सच्चे परमात्मा की कीर्ति सारे विश्व में हो रही है, मैं उस सच्चे (परमात्मा) की अपने मुख से महिमा-स्तुति करता हूँ।
38वह सच्वा परमात्मा जो हमेशा ही सराहनीय है, उस सच्चे का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं