सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 203 · Raag Gauree

1गउड़ी महला ५ ॥

2हे भुजबल शूरवीर प्रभु ! हे सुखों के सागर! मैं (विकारों के) गड्ढे में गिर रहा हूँ, मुझे अंगुलि से पकड़ लीजिए॥ १॥ रहाउ॥

3हे प्रभु ! मेरे कानों में तेरी महिमा सुनने की सूझ नहीं, मेरे नयन सुन्दर नहीं और मैं दुखी एवं लंगड़ा तेरे द्वार पर पुकारता हूँ (कि मुझे विकारों के गङ्गे से बचा लो)॥ १॥

4हे दीनानाथ ! हे अनाथों पर करुणा करने वाले ! तू ही मेरा मित्र, सखा, पिता एवं माता है।

5हे नानक ! प्रभु के चरण कमलों को अपने ह्रदय से लगा कर रख, जो अपने संतों को भयानक सागर से पार कर देता है। ॥ २ ॥ २ ॥ ११५ ॥

6रागु गउड़ी बैरागणि महला ५

7ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।

8हे दया के पुंज ! हे गुसाई ! तू मेरा प्रिय मित्र है और हमेशा ही मेरे साथ बसता रह॥ १॥ रहाउ॥

9हे प्रभु ! तेरे बिना मैं एक क्षण भर के लिए भी जीवित नहीं रह सकता और तेरे बिना इस दुनिया में जीना धिक्कार योग्य है।

10हे आत्मा, प्राण एवं सुख प्रदान करने वाले प्रभु ! हर क्षण मैं तुझ पर कुर्बान जाता हूँ॥ १॥

11हे गोपाल ! मुझे अपने हाथ का आश्रय दीजिए और मुझे गड्ढ़े में से बाहर निकालें

12क्योंकि मैं निर्गुण एवं अल्पबुद्धि वाला हूँ लेकिन तू सदैव ही दीनदयाल है॥ २॥

13तेरे दिए हुए कौन-कौन से सुख मैं स्मरण कर सकता हूँ और किस विधि से मैं तेरी आराधना कर सकता हूँ?

14हे सर्वोच्च, अगम्य एवं अपार प्रभु ! तू अपने सेवकों से प्रेम करता है और जो तेरा आश्रय लेते हैं, उनको अपने साथ लीन कर लेता है ॥ ३ ॥

15हे भाई ! संसार के समस्त पदार्थ, आठों सिद्धियाँ, महा रस नाम के परम अमृत में विद्यमान हैं।

16हे भाई ! जिन पर केशव सुप्रसन्न होता है, वे व्यक्ति प्रभु की गुणस्तुति करते रहते हैं। ॥ ४॥

17हे प्राणों के आधार प्रभु ! तू ही मेरी माता, पिता, पुत्र, रिश्तेदार सब कुछ तू ही है।

18संतों की संगति में नानक तेरा भजन करता है, जो तेरी स्तुति करता है वह विष से भरे संसार सागर से पार हो जाता है॥५ ॥१॥ ११६ ॥

19गउड़ी बैरागणि रहोए के छंत के घरि मः ५

20ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।

21कोई विरला व्यक्ति ही प्रिय राम का यश गायन करता है ?

22वह सत्य, सर्व कल्याण एवं सुख प्राप्त कर लेता है॥ रहाउ॥

23वैरागी अनेकों वनों में प्रभु की खोज हेतु जाता है।

24परन्तु कोई विरला पुरुष ही है जिसकी सुरति एक ईश्वर से लगती है।

25जिन्होंने भगवान को पा लिया है, ऐसे व्यक्ति बड़े भाग्यशाली हैं।॥ १॥

26ब्रह्मा इत्यादि देवते एवं सनक, सनन्दन एवं सनत कुमार भी भगवान को मिलने की लालसा करते हैं।

27योगी, ब्रह्मचारी एवं सिद्ध पुरुष ईश्वर से मिलने की आशा करते रहते हैं।

28जिसको यह देन प्राप्त हुई है, वह ईश्वर की महिमा करता रहता है।॥ २॥

29मैंने उनकी शरण ली है, जिनको ईश्वर नहीं भूलता।

30बड़ी किस्मत से ही हरि का संत मिलता है।

31चूंकि वह जीवन-मृत्यु से वास्तव में मुक्त है। ३॥

32हे मेरे प्रियतम प्यारे ! कृपा करके मुझे दर्शन दीजिए।

33हे मेरे सर्वोपरि एवं अपार प्रभु! मेरी एक प्रार्थना सुनो,

34नानक तेरे नाम का आधार ही मांगता है ॥ ४॥ १॥ ११७॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं