सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 154 · Raag Gauree

1गउड़ी महला १ ॥

2पूर्व जन्म के कर्मों के कारण जो मेरी किस्मत में लिखा हुआ है, उसे कोई भी मिटा नहीं सकता।

3मैं नहीं जानता कि मेरे साथ आगे क्या बीतेगा?

4जो कुछ ईश्वर की इच्छा है, वहीं कुछ हुआ है।

5प्रभु के अलावा दूसरा कोई करने वाला नहीं ॥ १॥

6हे ईश्वर ! मैं नहीं जानता कि तेरी कृपा की देन कितनी बड़ी है।

7सभी शुभ कर्म, धर्म, श्रेष्ठ जाति तेरे नाम अधीन हैं॥१॥ रहाउ ॥

8हे ईश्वर ! तू देन देने वाला इतना बड़ा दाता है

9कि तेरी भक्ति के भण्डार कभी कम नहीं होते।

10अहंकार करने से कोई भी कार्य सम्पूर्ण नहीं होता।

11हे प्रभु ! मेरी आत्मा एवं शरीर सभी तेरे पास अर्पण हैं।॥ २॥

12हे भगवान ! तू जीव को मार कर फिर जीवित कर देता है और तू ही क्षमा करके जीव को अपने साथ मिल लेता है।

13जैसे तुझे उपयुक्त लगता है वैसे ही तू जीव से अपना नाम सिमरन करवाता है।

14हे मेरे परमेश्वर ! तुम बड़े बुद्धिमान हो और मेरे मन की दशा जानते हो, तुम मेरे रक्षक हो और सत्य स्वरूप हो।

15हे प्रभु! मुझे गुरु की मति दीजिए, चूंकि मैं तेरे भरोसे पर ही बैठा हूँ॥ ३॥

16जिसका हृदय प्रभु के प्रेम में मग्न है, उसके तन में पापों की कोई मलिनता नहीं।

17मैंने तेरे सत्य-नाम को गुरु की वाणी द्वारा पहचान लिया है।

18मेरे शरीर में तेरा ही दिया हुआ बल है और तूने ही मुझे अपने नाम की ख्याति प्रदान की है।

19हे नानक! मुझे तो तेरी भक्ति की शरण में ही रहना है॥ ४॥ १०॥

20गउड़ी महला १ ॥

21जिस प्राणी ने अकथनीय परमात्मा को स्मरण किया है और दूसरों को आराधना हेतु प्रेरित किया है, उस प्राणी ने स्वयं अमृत पान किया है।

22वह प्राणी दूसरे समस्त भय विस्मृत कर देता है, क्योंकि वह ईश्वर के नाम में समा जाता है॥ १॥

23हम क्यों भयभीत हों, जब तमाम भय परमात्मा के भय में नष्ट हो जाते हैं।

24पूर्ण गुरु के शब्द द्वारा मैंने ईश्वर को पहचान लिया है॥ १॥ रहाउ॥

25जिस व्यक्ति के हृदय में राम का निवास हो जाता है, उसे हरि-नाम की पूंजी मिल जाती है और उसे सहज ही प्रभु के दरबार में प्रशंसा भी मिलती है॥ २॥

26परमात्मा जिन स्वेच्छाचारी जीवों को संध्याकाल एवं प्रातःकाल मोह-माया-रुपी निद्रा में मग्न रखता है,

27ऐसे मनमुख इहलोक तथा परलोक में काल द्वारा बंधे रहते हैं।॥ ३॥

28जिन व्यक्तियों के हृदय में दिन-रात राम का निवास होता है, वहीं पूर्ण संत हैं।

29हे नानक ! जिसे राम मिल जाता है, उसका भ्रम दूर हो जाता है॥ ४॥ ११॥

30गउड़ी महला १ ॥

31जिस व्यक्ति का त्रिगुणात्मक दुनिया से प्रेम है, वह जन्मता-मरता ही रहता है।

32चारों ही वेद सृष्टि का कथन करते हैं।

33वह मन् की तीन अवस्थाओं का बखान करते हैं।

34मन की तुरीयावस्था भगवान रूप सतिगुरु से ही जानी जाती है॥ १॥

35राम की भक्ति एवं गुरु की सेवा करने से प्राणी भवसागर से पार हो जाता है।

36जो भवसागर से पार हो जाता है, उसका पुनः दुनिया में जन्म-मरण नहीं होता ॥ १॥ रहाउ॥

37प्रत्येक प्राणी घर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चार उत्तम पदार्थों का वर्णन करता है।

38सत्ताइस स्मृतिर्यो, छ: शास्त्रों और पण्डितों के मुख से यही सुना जाता है।

39गुरु के बिना अर्थ का ज्ञान किसी ने भी नहीं पाया।

40मुक्ति पदार्थ अर्थात् मोक्ष ईश्वर की भक्ति द्वारा ही प्राप्त होता है॥ २॥

41जिस व्यक्ति के हृदय में परमात्मा का निवास हो जाता है,

42उसे गुरु के माध्यम से परमात्मा की भक्ति प्राप्त हो जाती है।

43परमात्मा की भक्ति करने से मोक्ष एवं आनंद प्राप्त हो जाता है।

44गुरु की मति द्वारा उसे परमानन्द प्राप्त होता है॥ ३॥

45जिसने गुरु को पा लिया है, गुरु स्वयं ही उसे भगवान के दर्शन करवा देता है।

46मुझे आशावादी को गुरु ने निर्लिप्त रहना सिखा दिया है।

47दीनानाथ प्रभु जीवों को सर्व सुख प्रदान करने वाला है।

48हे नानक ! मेरा मन भगवान के सुन्दर चरणों में मग्न हो गया है॥ ४॥ १२॥

49गउड़ी चेती महला १ ॥

50यह सुन्दर काया स्वयं को अमर समझकर जीवन के सुख भोगने में लगी रहती है किन्तु उसे यह ज्ञान नहीं कि यह दुनिया तो (भगवान की) एक खेल है।

51हे मेरी काया ! तू लालच, लोभ एवं बहुत झूठ कमा रही है और तू अपने सिर पर पापों का अत्यधिक भार उठा रही है।

52हे मेरी काया ! मैंने तुझे पृथ्वी पर राख की भाँति बर्बाद होते देखा है॥ १॥

53हे मेरी काया ! मेरी सीख ध्यानपूर्वक सुन।

54तेरे किए हुए शुभ कर्म ही अन्तिम समय तेरे साथ रहेंगे। हे मेरे मन ! इस तरह का सुनहरी अवसर दोबारा तेरे हाथ नहीं लगेगा ॥ १॥ रहाउ॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं