सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1430 · Raag Maalaa

1जिसके संग पाँच रागिनियाँ भी गाती हैं।

2राग भैरब की पहली नारी भैरवी, तदन्तर बिलावली,

3पुण्या और बंगली गाती है,

4फिर असलेखी की गाने की बारी आती है।

5यह राग भैरब की पाँच स्त्रियाँ हैं।

6इसके पुत्र पंचम, हर्ष, दिसाख, बंगालम,

7मधु, माधव भी अपना गान सुनाते हैं।॥१॥

8साथ ही साथ ललित एवं बिलावल भी अपने तरीके से गाते हैं।

9इस राग भैरब के आठ पुत्रों का गायक गान करते हैं।॥१॥

10दूसरा राग मालकींस गाया जाता है,

11जिसके संग पाँच रागिनियाँ भी शामिल हैं।

12गोंडकी, देवगंधारी,

13गान्धारी, सीहुति और

14धनासरी- इन पाँचों को गाया जाता है।

15ये राग मालकौंस के साथ ही हैं।

16मारू, मस्तअंग, मेवारा,

17प्रबलचंड, कौसक, उभारा,

18खौखट और भौरानद गाए जाते हैं।

19ये आठों ही राग मालकौसक के साथ सुर के साथ सुर मिलाकर लगे हुए हैं।॥१॥

20फिर राग हिंडोल पाँच रागिनियों एवं आठ पुत्रों के साथ आता है।

21यह तान उठाकर किल्लोल करता स्वर मिलाकर गान करता है॥१॥

22इसकी पत्नी तेलंगी, देवकरी,

23बसंती, सुन्दर संदूर और

24सरस अहीरी भी आती है।

25ये पाँचों अपने पति के संग ही रहती हैं।

26सुरमानंद, भास्कर,

27चंद्रबिंब, मंगलन शोभा सहित आते हैं।

28सरसवान, विनोद,

29बसंत, कमोद भी साथ ही गाते हैं।

30इस तरह आठ पुत्रों के साथ हिंडोल सवारी करता है और

31फिर दीपक की बारी आती है॥१॥

32कछेली, पटमंजरी, टोडी गाती है और

33कामोदी एवं गूजरी साथ ही दीपक के संग रागिनियाँ मौजूद हैं॥१॥

34कालंका, कुंतल, रामा,

35कमल-कुसुम, चंपक,

36गौरा, कानड़ा एवं कल्याण

37नामक दीपक राग के आठ पुत्र माने जाते हैं।॥१॥

38रार्गी, विद्वान, गायक सब मिलकर सिरी राग गाते हैं और

39साथ ही पाँच रागिनियों को भी शामिल करते हैं।

40बैराड़ी, करनाटी,

41गवरी, आसावरी को वे गाते हैं और

42साथ सिंधर्वी का गान होता है।

43ये पाँचों रागिनियाँ सिरी राग के साथ विद्यमान हैं।॥ १॥

44सालू, सारग, सागर, गोंड, गंभीर,

45गुंड, कुंभ तथा हमीर- ये श्री राग के आठ पुत्र हैं।॥ १॥

46संगीतकार, रागी, गीतकार छठवाँ राग मेघ गायन करते हैं।

47इसके साथ ही पाँच रागिनियों को भी शामिल करते हैं।

48इसकी रागिनी सोरठ, गोंड, मलारी की ध्वनि होती है,

49फिर आसा को मधुर स्वर में गाया जाता है।

50उच्च स्वर में सूही का गान होता है।

51इस तरह मेघ राग के साथ पाँच रागिनियाँ हैं॥१॥

52वैराधर, गजधर, केदारा,

53जवलीधर, नट, जलधारा,

54शंकर और श्यामा भी गाए जाते हैं।

55ये मेघ राग के पुत्रों के नाम हैं॥१॥

56इस तरह गायकों ने छः रागों का गान किया है, जिनके साथ तीस रागिनियाँ हैं।

57इन सभी रागों के अठारह+दस+ बीस = अड़तालीस पुत्र हैं, सबका जोड़ छः राग, पाँच रागिनियाँ, अड़तालीस पुत्र ६+ ३० + ४६ कुल चौरासी हैं॥१॥१

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं