सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1427 · Salok Mehl 9 · Guru Tegh Bahaadur Ji

1हे मित्र ! जिसका सुमिरन (स्मरण) करने से मुक्ति प्राप्त होती है, उसी का तुम कीर्तिगान करो।

2गुरु नानक कहते हैं केि हे मन ! मेरी बात सुन, जिंदगी हर रोज़ घट रही है॥१०॥

3हे चतुर व्यक्तियो ! यह जान लो कि ईश्वर ने पाँच तत्वों से तन की रचना की है।

4नानक का कथन है कि यह अच्छी तरह मान लो, जिससे उत्पन्न हुए हो, उसी में विलीन हो जाना है ॥११॥

5संत पुरुष पुकार कर यही कहते हैं कि ईश्वर घट-घट में रहता है।

6गुरु नानक निर्देश करते हैं कि हे मन ! हरि भजन कर लो, भव-सागर से पार उतर जाओगे ॥१२॥

7जिसे कोई सुख-दुख, लोभ, मोह एवं अभिमान स्पर्श नहीं करते।

8नानक संबोधन करते हैं कि हे मन ! सुन, दरअसल वही भगवान की मूर्ति है॥१३॥

9जिसे प्रशंसा अथवा निंदा का असर नहीं होता, लोहे एवं सोने को भी बराबर ही मानता है।

10नानक फुरमाते हैं कि हे मन ! सुन, उसी से मुक्ति मिल सकती है॥१४॥

11जिसे खुशी अथवा गम प्रभावित नहीं करता, शत्रुओं एवं मित्रों को भी बराबर मानता है।

12गुरु नानक कथन करते हैं कि हे मन ! सुन, उसी से मुक्ति निहित है॥१५॥

13जो न किसी व्यक्ति को डराता है, न ही किसी का डर मानता है।

14नानक का कथन है कि हे मन ! सुन, उसी को ज्ञानी कहना चाहिए ॥१६॥

15जो विषय-विकारों को छोड़ देता है, संसार को त्याग कर वैराग्यवान हो जाता है।

16नानक का कथन है कि हे मन ! सुन, वही व्यक्ति भाग्यवान् है॥१७॥

17जो माया-ममता सब छोड़कर विरक्त हो गया है।

18नानक संयोधन करते हैं- हे मन ! सुन, दरअसल उसी के दिल में ब्रह्म का निवास है॥१८ ॥

19जिस प्राणी ने अहम् को छोड़कर कर्ता परमेश्वर को पहचान लिया है।

20नानक का कथन है कि दरअसल वही व्यक्ति संसार के बन्धनों से मुक्त है, इस सच्चाई को मन में स्वीकार कर लो॥१६॥

21कलियुग में परमात्मा का नाम भय को नष्ट करने वाला और दुर्मति का हरण करने वाला है।

22गुरु नानक फुरमाते हैं- जो व्यक्ति रात-दिन परमात्मा का भजन करते हैं, उनके सब काम सफल हो जाते हैं ॥ २० ॥

23जिह्म से गोविन्द का भजन करो, कानों से हरिनाम-कीर्तन सुनो।

24नानक संबोधन करते हैं कि हे मन ! सुन, इससे यमपुरी में नहीं पड़ोगे ॥ २१ ॥

25जो प्राणी ममता, लोभ, मोह एवं अहंकार को तज देता है।

26नानक का कथन है कि वह आप तो संसार-सागर से तैरता ही है, अन्य लोगों का भी उद्धार कर देता है॥ २२ ॥

27ज्यों सपना एवं थोड़ी देर के लिए कुछ देखना है, ऐसे ही दुनिया को मान।

28नानक का कथन है कि भगवान के बिना इन में से कुछ भी सत्य नहीं ॥ २३॥

29धन-दौलत की खातिर प्राणी दिन-रात डोलता फिरता है।

30हे नानक ! करोड़ों में कोई विरला ही है, जिसके दिल में ईश्वर रहता है।॥२४॥

31जैसे जल से बुलबुला रोज़ उत्पन्न व नष्ट होता है।

32नानक का कथन है कि हे मित्र ! सुन, जगत-रचना भी वैसे ही रची हुई है॥२५॥

33माया के नशे में अन्धा बनकर प्राणी को कुछ याद नहीं रहता।

34हे नानक ! परमात्मा के भजन बिना तभी यम के फंदे में पड़ता है॥२६॥

35यदि सदैव सुख चाहते हो तो राम की शरण लो।

36गुरु नानक निर्देश करते हैं कि हे मन ! सुन, यह मानव शरीर दुर्लभ है, इसे व्यर्थ मत गंवाना॥२७॥

37मूर्ख लोग धन की खातिर दौड़ते फिरते हैं।

38हे नानक ! भगवान के भजन बिना जीवन व्यर्थ हो जाता है॥२८ ॥

39जो प्राणी दिन-रात भजन करता है, उसे परमात्मा का रूप मानो।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं