गुरु ग्रंथ साहिब 1412 · Salok Vaaraan Thay Vadheek · Guru Nanak Dev Ji
1सब में ईश्वर बसा हुआ है, ऐसा कोई घट नहीं, जिसमें ईश्वर न हो।
2गुरु नानक का मत है कि वही सुहागिन है, जिसके मन में गुरु द्वारा ईश्वर प्रगट होता है।॥१६॥
3हे मानव ! अगर तुझे प्रेम का खेल खेलने का चाव है तो
4जान हथेली पर रखकर मेरी गली में चले आओ।
5अगर इस रास्ते पर पैर रखना है तो
6जान कुर्बान करने में संकोच मत करो ॥२०॥
7बुज़दिल से दोस्ती झूठी ही सिद्ध हुई है।
8मूला किराड़ मौत के बारे में नहीं जानता, किसी भी स्थान पर आ जाती है॥२१ ॥
9ज्ञानविहीन व्यक्ति अज्ञान की पूजा में लीन रहते हैं।
10वे द्वैतभाव में फँसकर झूठा व्यवहार ही करते हैं ॥२२ ॥
11गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता और धर्म के बिना ध्यान नहीं लगता।
12सत्य के बिना बिल्कुल हामी नहीं भरी जाती ॥२३॥
13इस बात का भी क्या मजा, जीव जैसा (खाली) भेजा गया, वैसे ही उठकर चला गया,
14कोई भजन-बंदगी एवं शुभ कर्म ही नहीं किया तो क्या फायदा ॥२४॥
15दशरथ-सुत श्रीरामचन्द्र को भी दुखी होना पड़ा, चाहे उनके मन में अधिकार बल भी था, (सुग्रीव, हनुमान सहित) बहुत सारी सेना मिला ली।
16वानरों की सेना सेवा के लिए तैयार हुई, मन तन में लड़ने का जोश भी था।
17दशानन रावण छलपूर्वक सीता का हरण करके ले गया था, श्राप की वजह से लक्ष्मण युद्ध में मूर्छित हो गया।
18गुरु नानक का फुरमान है कि ईश्वर सब करने वाला है, वही बनाने-बिगाड़ने वाला है॥२५॥
19रामचन्द्र सीता एवं लक्ष्मण के लिए दिल में बहुत दुखी हुए।
20उन्होंने हनुमान का स्मरण किया तो वह भी संयोग से उनके पास आ गया था।
21भूला हुआ दैत्य रावण यह नहीं समझ रहा था कि प्रभु ही (उसके अंत के लिए) सब काम कर रहा है।
22गुरु नानक फुरमान करते हैं कि ईश्वर बेपरवाह है, किए कमाँ का फल कदापि नहीं मिटता, अतः कर्मफल भोगना पड़ता है॥२६ ॥
23लाहौर शहर में जुल्म का जहर फैला हुआ है, सवा प्रहर मासूम लोगों पर मौत का कहर मचा हुआ है॥२७ ॥
24महला ३॥
25गुरु अमरदास जी कथन करते हैं, (गुरु रामदास के आने से) अब लाहौर शहर नामामृत का सरोवर तथा प्रभु-स्तुति का घर बन गया है॥२८ ॥
26महला १।
27उदो नामक अमीर शाह की क्या निशानी है ? उसके घर में किसी चीज़ की कोई कभी नहीं।
28उसके पूरे घर में बेटी-बहू, पत्नी की चहलपहल है।
29घर में सात औरतें हैं जिस कारण रोज़ लड़ाई झगड़ा बना रहता है, किसी.का एक दूसरे से प्रेम नहीं।
30उदो शाह, जो किसी से रुपया, गहना या सौदा अमानत के तौर पर रख लेता है, वह वापिस नहीं देता, दुख देकर पैसा जमा करता है॥२६ ॥
31हे सरोवर ! तू पहले बहुत हरा-भरा था, स्वर्ण सरीखे कमल खिले रहते थेi (पर यह तो बता) किस कसूर के कारण तू जलकर काला हो गया है।
32गुरु नानक देव जी सरोवर के हवाले से कहते हैं कि मेरा शरीर टूटा हुआ है अर्थात् मुझे जल प्राप्त नहीं हो रहा।
33मैं जानता हूँ, जिस जल से मेरा जीवन है, वह मुझे नहीं मिल रहा।
34जिसे देखकर खिल जाता हूँ और चौगुणा रंग चढ़ जाता है ॥३० ॥
35कोई जितना भी जीवन गुजार ले, मगर जीने की तमन्ना बनी रहती है, संसारं का कार्य पूरा नहीं होता।
36ज्ञानी पुरुष सदैव जीता है, प्रभु-ध्यान में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
37धीरे-धीरे जीवन बेकार ही चला जाता है
38गुरु नानक फुरमान करते हैं- किससे शिकायत की जाये, जब बिना इजाज़त ही वह ले जाता है॥३१॥
39प्रभु राय को दोष क्या दें; जब कोई बूढ़ा हो जाता है, तो उसकी बुद्धि उसे छोड़ देती है।
40बहुत बड़ी-बड़ी करता है, पर अज्ञान कें कारण नीचे ही गिरता है॥३२॥
41धनवान को दोष मत दो, जब बूढ़ा हो जाती है तो उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है।
42वह बातें हैं कि गुरुमुख उसे ही माना जाता है, जो हरदम पूर्ण परमेश्वर के ध्यान में समाया रहता है॥३३॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं