गुरु ग्रंथ साहिब 1399 · Svaiyay Mehl 5 · Bhatt Nal
1कवि नल्ह का कथन है कि गुरु रामदास रूपी पारस के स्पर्श से कंचन सरीखा हो गया हूँ, ज्यों चंदन की खुशबू से अन्य पेड़-पौधे खुशबूदार हो जाते हैं।
2जिसके दर्शनों से काम-क्रोध का निवारण हो जाता है, उस सतिगुरु रामदास के सच्चे नाम पर मैं हरदम बलिहारी जाता हूँ॥३॥
3गुरु रामदास जी को (तीसरे गुरु अमरदास जी ने) राज योग (अर्थात् गुरुगद्वी) के सिंहासन पर स्थापित किया।
4सर्वप्रथम चन्द्रमा के रूप में गुरु नानक देव जी संसार में प्रगट हुए, उनके आगमन से संसार को आनंद प्राप्त हुआ, मनुष्यों को संसार के बन्धनों से मुक्त करने के लिए उन्होंने हरिनाम का प्रकाश किया।
5तदन्तर गुरु अंगद देव जी को सुखनिधान नाम प्रदान किया, जिन्होंने प्रभु की अकथ कथा का ज्ञान प्रदान किया, उन्होंने पाँच विकारों को वश में किया और मौत भी उनको डरा न सकी।
6फिर श्री गुरु अमरदास ने महामहिम परम सत्य ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया, कलियुग में जीवों की लाज बचाई। उनके दर्शन एवं चरण-कमल के स्पर्श से शिष्यों के पाप दूर हुए।
7उसके बाद उन्होंने अपने शिष्य भाई जेठा को सब प्रकार से ज्ञान, भक्ति, सेवा के योग्य माना तो उनका मन बहुत प्रसन्न हुआ, श्री गुरु अमरदास जी ने (गुरु नानक की गद्दी) राज-योग के सिंहासन पर गुरु रामदास जी को आसीन कर दिया ॥४॥
8रड ॥
9जिस परमपिता परमेश्वर ने धरती और आकाश को धारण किया, वायु, पानी, सरोवर, अग्नि एवं अन्न-भोजन इत्यादि को उत्पन्न किया है,
10रात को दिखाई देने वाले चन्द्रमा एवं तारे बनाए, दिन में निकलने वाला सूर्य, पहाड़ों की रचना की, पेड़-पौधे, फल-फूल दिए हैं।
11देवता, मनुष्य, सात समुद्रों की सृजना करके तीन लोकों को जिस प्रभु ने धारण किया हुआ है।
12वह परम सत्य अद्वितीय हरिनाम गुरु रामदास ने अपने सच्चे गुरु अमरदास से प्राप्त किया ॥ १॥ ५ ॥
13जिसने गुरु का वचन कानों से सुना है, वह काँच से स्वर्ण हो गया है।
14जिसने अपने मुँह से सतिगुरु का नाम उच्चारण किया है, वह जहर से अमृत हो गया है।
15जब सतिगुरु की कृपा-दृष्टि होती है तो लोहे सरीखा व्यक्ति भी लाल समान गुणवान् हो जाता है।
16गुरु के ज्ञान का चिंतन करने से पत्थर सरीखा व्यक्ति अमूल्य मोती बन जाता है।
17सतिगुरु के चरण स्पर्श से लकड़ी चन्दन हो जाती है और दुख-दर्द सब दूर हो जाते हैं।
18जिन्होंने सतिगुरु रामदास का चरण-स्पर्श किया है, वे पशु प्रेत से देवता समान भले मनुष्य हो गए हैं।॥२॥६॥
19जब गुरु सहाई हो जाए तो व्यक्ति धन-दौलत के बावजूद अभिमान नहीं करता।
20जब गुरु सहायक बन जाता है तो लाखों लोग भी बुरा नहीं कर पाते।
21जब गुरु साथ हो तो ज्ञान और ध्यान पाकर जीव प्रभु के सिवा किसी को नहीं मानता।
22जब गुरु साथ हो जाता है तो जिज्ञासु को शब्द-गुरु का दर्शन होता है और वह सच्चे घर में टिक जाता है।
23दास नल्ह भाट विनती करता है कि जो व्यक्ति दिन-रात गुरु का नाम जपता है,
24जो गुरु (रामदास) के नाम को हृदय में धारण करता है, वह जन्म-मरण दोनों से मुक्त हो जाता है।॥ ३ ॥ ७ ॥
25गुरु के बिना दुनिया में अज्ञान का अन्धेरा ही अन्धेरा है, गुरु के बिना समझ नहीं आती।
26गुरु बिना ज्ञान, सफलता एवं मुक्ति भी प्राप्त नहीं होती।
27हे मेरे मन ! सच्ची बात यही है कि गुरु का यशोगान करो, उसी का नामोच्चारण करो।
28गुरु का शब्द जीवन सम्पन्न करने वाला है, वह तेरे सब पाप-दोष काटने वाला है।
29गुरु को आँखों में बसाओ, गुरु का नामोच्चारण करो, गुरु की स्तुति करो, कवि नल्ह का कथन है कि गुरु ही सत्य है।
30जिसने गुरु के दर्शन नहीं किए, न ही शरण ली, उस अभागे का संसार में जन्म व्यर्थ हो रहा ॥४॥८ ॥
31हे मेरे मन ! गुरु (रामदास) का स्तुतिगान करो,
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं