सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1397 · Svaiyay Mehl 5 · Bhatt Kal

1इनके सच्चे गुरु अमरदास जी ने दयालु होकर मन में हरिनाम ही दृढ़ करवाया, जिसकी कृपा से उन्होंने कामादिक पाँच विकारों को वश में किया।

2कवि कलसहार का कथन है कि ठाकुर हरदास जी के सुपुत्र गुरु रामदास जी खाली दिल रूपी सरोवरों को नाम जल से भर देते हैं ।॥३॥

3गुरु रामदास जी ने पूर्ण ज्ञान एवं अनुभव पाया, ईश्वर में उनकी लगन लगी, क्योंकि पारस रूप गुरु अमरदास जी से भेंट हुई थी और स्वाभाविक शान्ति प्राप्त की।

4सतगुरु (अमरदास जी) की कृपा से उनको परमपद प्राप्त हुआ और भाव-भक्ति प्रेम के भण्डार उनमें भरे रहते थे।

5उनका मन संतोष के सरोवर (प्रभु) में लीन था, अतः उनका जन्म-मरण मिट चुका था और मृत्यु का भय निवृत्त हो गया था।

6कवि कलसहार का कथन है कि ठाकुर हरदास जी के सुपुत्र गुरु रामदास जी ने खाली सरोवर भी भर दिए हैं ॥ ४॥

7खाली दिल रूपी सरोवर भरने वाले गुरु रामदास जी ने ईश्वर को पा लिया है, मन में उसे ही बसाया है।

8दुख विनाशक, आत्मा को ज्ञान देने वाले परम तत्व (परमेश्वर) का ही मन में उन्होंने चिंतन किया।

9गुरु रामदास जी को सदैव हरि-भक्ति का चाव बना रहा है और इस प्रेम रस को वे स्वयं ही जानते हैं।

10सतगुरु (अमरदास जी) की कृपा से वे प्रभु प्रेम का स्वाभाविक ही आनंद पा रहे हैं।

11गुरु नानक की कृपा, गुरु अंगद देव की सुमति से गुरु अमरदास ने विधाता के विधान सेवा-सिमरन का पालन किया है।

12कवि कलसहार का कथन है कि हे गुरु रामदास ! तुमने भी अटल अमर पद पा लिया है ॥५॥

13गुरु रामदास जी संतोष सरोवर में रहते हैं और अपनी जीभ से नामामृत का रस व्यक्त करते हैं।

14उनके दर्शन एवं मिलन से मन को शान्ति प्राप्त होती है और पाप इत्यादि दूर से ही नाश हो जाते हैं।

15उन्होंने सुखों के सागर हरि को पा लिया है, अतः हरि-भक्ति मार्ग से पीछे नहीं हटते।

16गुरु रामदास जी ने संयम, सत्य, संतोष एवं शील स्वभाव का अटूट कवच धारण किया हुआ है।

17सतगुरु अमरदास की तरह गुरु रामदास को भी विधाता ने वैसा ही कीर्तिस्तंभ स्थापित किया है, पूरा जगत उनका यशोगान कर रहा है।

18फलसहार का कथन है कि हे गुरु रामदास ! तूने अभय ईश्वर समान अमर पद पा लिया है ॥६॥

19(गुरु अमरदास की तरह) गुरु रामदास ने पूरी दुनिया को जीत लिया है और मन में ईश्वर का ही ध्यान किया।

20सतिगुरु अमरदास धन्य धन्य हैं, जिन्होंने उनके मन में हरिनाम स्थापित किया।

21उन्होंने नौ निधियों वाला सुखों का भण्डार हरिनाम पाया है, ऋद्धियाँ-सिद्धियाँ उनकी दासियाँ हैं।

22इनको शान्ति का सरोवर मिल गया है, अविनाशी कर्तापुरुष से इनका साक्षात्कार हो गया है।

23सृष्टि रचना से अब तक जिस हरिनाम में लीन होकर भक्त संसार-सागर से पार हुए हैं, वह हरिनाम् इनके गुरु अमरदास जी ने गुरु रामदास जी को दृढ़ करवाया।

24कलसहार भाट का कथन है कि हे गुरु रामदास ! तूने भी हरि प्रेम-भक्ति रूपी पदार्थ को ही पाया है ॥७॥

25गुरु रामदास के मन में प्रेम-भक्ति का प्रवाह चलता रहता है, पूर्व जन्म का प्रेम बिल्कुल नहीं टूट पाया।

26सतिगुरु अमरदास के अथाह शब्द की अमृतधारा का रस वे आनंदपूर्वक लेते हैं।

27विवेक बुद्धि इनकी माता है, संतोष गुरु रामदास जी के पिता हैं, वे शान्ति के सरोवर में लीन रहते हैं।

28जन्म-मरण से मुक्त, स्वतः प्रकाशमान रूप गुरु (रामदास जी) ने वचनों द्वारा पूरे जगत को संसार-सागर से तिरा दिया है।

29वे अव्यक्त, ज्ञानेन्द्रियों से परे, अपरंपार रूप हैं और शब्द-गुरु को मन में बसाया हुआ है।

30भाट कलसहार (स्तुति करता हुआ) कहता है कि हे गुरु रामदास ! तूने तो जगत उद्धारक परमेश्वर को पा लिया है ॥८॥

31हरिनाम संसार का उद्धार करने वाला है, नवनिधान सुखों का घर है, भक्तों को संसार-सागर से पार उतारने वाला है,

32यह हरिनाम रूपी अमृत की बूंद गुरु रामदास जी के पास है, जो विश्व के विकार रूपी जहर का निवारण कर देती है।

33सहज-शान्ति का वृक्ष फला फूला है, जिस पर ज्ञान अमृत का फल लगा हुआ है,

34वे लोग धन्य एवं भाग्यशाली है, जो गुरु की कृपा से इसे प्राप्त करते हैं।

35जिन्होंने मन से गुरु रामदास पर श्रद्धा धारण की, प्रेम लगाया वे सतिगुरु के उपदेश द्वारा संसार के बन्धनों से मुक्त हो गए।

36भाट कलसहार का कथन है कि हे गुरु रामदास ! तूने प्रभु-शब्द का बिगुल बजाया है अर्थात् सब ओर ब्रह्म शब्द का प्रसार कर दिया है ॥६॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं