सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1390 · Svaiyay Mehl 5 · Bhatt Kal

1ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र- चार वर्ण, योगी, सन्यासी, वैष्णव इत्यादि छः शास्त्रं, ब्रह्मा इत्यादि सब लोग गुरु नानक का गुणगान करते हुए उनका स्मरण कर रहे हैं।

2हजार जिव्हाओं से युग-युग ध्यान लगाकर शेषनाग भी उनकी महिमा-गान में लीन है।

3जिसने निरन्तर ध्यान लगाकर ब्रह्मा को जाना है, वैरागी शिवशंकर भी उनके स्तोत्र गा रहा है।

4कवि कल्ह का कथन है कि मैं गुरु नानक देव जी का यशोगान कर रहा हूँ, जिन्होंने राज-योग का आनंद लिया ॥५॥

5उस गुरु नानक ने राज-योग का पूर्ण आनंद लिया है, जिसके हृदय में निर्वेर ईश्वर बस रहा है।

6हरिनाम का जाप करके गुरु नानक देव जी स्वयं तो संसार-सागर से पार हुए ही हैं, उन्होंने समूची सृष्टि को भी पार उतार दिया है।

7ब्रह्मा-सुत सनक इत्यादि एवं जनक सरीखे युग-युग से गुण-गान कर रहे हैं।

8हे गुरु नानक ! तू धन्य है, महान् है, प्रशंसा के योग्य है, दुनिया का भला करने के कारण तेरा जन्म सफल हो गया है।

9कवि कल्ह बखान करता है कि पातालपुरी से जय-जयकार की ध्वनि सुनाई दे रही है।

10हरिनाम के रसिया, गुरु नानक ! तूने राज एवं योग दोनों का आनंद प्राप्त किया है॥ ६ ॥

11हे गुरु नानक ! सतयुग में भी तूने ही राज-योग का आनंद लिया और वामनावतार में राजा बलि को छलना तेरी ही मर्जी थी।

12त्रेतायुग में तुम्हीं रघुवंशी राम कहलाए और तब भी तूने ही राज-योग का आनंद लिया।

13द्वापर युग में कृष्णावतार में तूने ही कंस को मुक्ति दी,

14राजा उग्रसेन को राज दिया और भक्तजनों को अभयदान दिया।

15कलियुग में भी साक्षी रूप में गुरु नानक, गुरु अंगद, गुरु अमरदास कहलाए।

16अनादि परमपिता परमेश्वर का हुक्म है कि श्री गुरु नानक का राज्य सदा अविचल एवं अटल है॥७ ॥

17भक्त रविदास, जयदेव, त्रिलोचन गुरु नानक जी का गुणानुवाद कर रहे हैं और

18भक्त नामदेव एवं कबीर भी समदृष्टि मानते हुए सदा गुरु नानक साहिब का स्तुतिगान करते हैं।

19भक्त बेणी भी उनके यशोगान में लीन है, जो सहजावस्था में आनंद पाता है और

20गुरु ज्ञान द्वारा उसी में ध्यानमग्न होकर प्रभु के सिवा किसी अन्य को नहीं मानता।

21शुकदेव, राजा परीक्षित एवं गौतम ऋषि भी गुरु नानक का मंगलगान कर रहे हैं।

22कवि कल्ह भी उस गुरु नानक का सुयश गा रहा है, जिसकी नित्यनवीन कीर्ति पूरे जगत में फैली हुई है॥८॥

23पाताललोक में नाग, भुजंग इत्यादिभक्त भी (गुरु नानक का) कीर्ति-गान कर रहे हैं।

24महादेव, योगी, सन्यासी, जंगम इत्यादि सदा उसी के गौरव-गान में लीन रहते हैं।

25वेद एवं व्याकरण का चिंतन करने वाले मुनि व्यास भी गुरु नानक का ही गुणगान कर रहा है।

26जिसके हुक्म से समूची सृष्टि की सृजना हुई, वह ब्रह्मा भी स्तुतिगान कर रहा है।

27जिसने ब्रह्माण्ड के सब खण्डों में पूर्णब्रह्म को सगुण-निर्गुण रूप में एक समान माना है,

28जिस गुरु नानक ने सहज योग का आनंद लिया है, कवि कल्ह उसी का जाप करते हुए सुयश गा रहा है।॥६॥

29गोरख, मच्छन्द्र, गोपी इत्यादि नौ नाथ भी गुण गाते हैं और उनका कथन है कि सत्य में समाहित गुरु नानक धन्य हैं।

30चक्रवर्ती कहे जाने वाले मानधाता भी गुणानुवाद करते हैं।

31सातवें पाताल में रहने वाला राजा बलि भी गुरु नानक का स्तुतिगान कर रहा है।

32गुरु नानक के संग रहने वाला भर्तृहरि योगी भी उनकी प्रशंसा गा रहा है।

33दुर्वासा ऋषि, राजा पुरुरवा एवं अंगिरा मुनि भी गुरु नानक का यशोगान कर रहे हैं।

34कवि कल्ह घट घट में समाहित गुरु नानक देव जी का सुयश गा रहा है॥१०॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं