सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1385 · Svaiyay Mehl 5

1वह अद्वितीय ईश्वर जिसका वाचक ओम् है, केवल एक (ऑकार स्वरूप) है, उसका नाम सत्य है। वह आदिपुरुष देवी-देवताओं, जीवों सहित सम्पूर्ण संसार को बनाने वाला है, वह सर्वशक्तिमान है, वह भय से रहित है, वह निर्वेर (प्रेम की मूर्ति) है, वह कालातीत (अतीत, वर्तमान, भविष्य से परे) ब्रह्ममूर्ति शाश्वत-स्वरूप, अमर है, वह जन्म-मरण से मुक्त है, वह स्वजन्मा है, गुरु-कृपा से प्राप्त होता है।

2सवये स्री मुखबाक्य महला ५ ॥

3हे आदिपुरुष ! केवल तू ही बनानेवाला है, सम्पूर्ण सृष्टि का मूल है, करण कारण है, सब कुछ करने में परिपूर्ण है।

4तू सम्पूर्ण विश्व में विद्यमान है, तू सब शरीरों में व्याप्त है।

5पूरे जगत में फैला हुआ तू ही दृष्टिगत होता है, तेरी महिमा को कौन जानता है, तू सब की रक्षा कर रहा है, पूरे विश्व का मालिक है।

6तू अनश्वर है, अव्यक्त है, तू अपने आप ही उत्पन्न हुआ है।

7सृष्टि में एकमात्र तू ही बड़ा है, तेरे जैसा बड़ा कोई नहीं।

8हे परमेश्वर ! तेरा रहस्य एवं आर-पार कोई नहीं पा सकता, कौन विचार कर सकता है। तू जगत पिता है, सबके प्राणों का आसरा है।

9गुरु नानक फुरमाते हैं कि हे प्रभु ! तेरे दर पर मान्य ब्रह्म-रूप हो चुके भक्त का एक जीभ से कैसे बखान कर सकता हूँ।

10हाँ, मैं केवल उस पर सदैव कुर्बान जाता हूँ॥१॥

11तेरे यहाँ अमृत का प्रवाह चल रहा है, जितने तेरे भण्डार भरे हुए हैं, उनकी भी तुलना नहीं की जा सकती। तू परे से परे, बेअंत है।

12तू सब अपनी मर्जी से करता है, किसी से सलाह-मशविरा नहीं करता। तेरे हुक्म से एक पल में सृष्टि की उत्पति एवं प्रलय हो जाती है।

13तेरे बराबर कोई नहीं, तू निर्मल है, ज्ञान का उजाला है, तेरा नाम जपने से तो करोड़ों पाप दूर हो जाते हैं।

14गुरु नानक कथन करते हैं कि ईश्वर का भक्त जो उसी का रूप हो गया है, एक जीभ से उसकी क्या महिमा की जाए,

15हाँ, मैं केवल उस पर सदैव कुर्बान जाता हूँ॥२॥

16ईश्वर ने समूचे लोक धारण किए हुए हैं, एक उसी से जगत का प्रसार हुआ है, वह सर्वव्यापक है और स्वयं ही अलिप्त है।

17ईश्वर की महिमा या कोई अन्त नहीं, संसार के सब जीव उसी के हैं, केवल वही सब को देने वाला है, वह दुष्टदमन है, अदृष्ट है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं