सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1381 · Salok Fareed Jee · Bhagat Sheikh Fareed Ji

1उस परलोक को भी याद रखो, जहाँ तूने जाना है॥५८॥

2फरीद जी शिक्षा देते हुए कहते हैं कि जिन कामों से कोई फायदा नहीं, ऐसे काम बिल्कुल छोड़ दो।

3अन्यथा बुरे कामों के कारण तुम्हें मालिक के दरबार में शर्मिन्दा होना पड़ेगा ॥५६॥

4फरीद जी उपदेश देते हैं कि मालिक की सेवा करो और दिल का वहम निकाल दो।

5फकीरों को वस्तुतः पेड् की तरह सहनशील होना चाहिए॥६०॥

6फरीद जी कहते हैं कि मेरे कपड़े काले हैं, भेरी वेशभूषा भी काली है।

7मैं गुनाहों से भरा हुआ हूँ, इसके बावजूद भी लोग मुझे दरवेश कह रहे हैं।॥६१॥

8जली हुई खेती पुनः हरी-भरी नहीं होती, चाहे उसे ठण्डे जल में कितना ही डुबो दिया जाए।

9हे फरीद ! वैसे ही जो जीव-स्त्री परमात्मा से बिछुड़ी हुई है, वह सदैव दुखी रहती है।॥६२॥

10जब लड़की कुंआरी थी तो उसे विवाह करने का चाव था। जब विवाह हो गया तो वह घर-गृहस्थी के झंझटों में फॅस गई।

11हे फरीद ! तदन्तर वह पछताती है कि वह दोबारा कुंआरी नहीं हो सकती ॥६३ ॥

12हंस यदि कल्लर के तालाब में आकर बैठ जाएँ तो

13वे अपनी चोंच को पानी में डालने के बावजूद भी नहीं पीते और वहाँ से शीघ्र उड़ने का प्रयास करते हैं।(वैसे ही संत संसार की वासनाओं को देखकर प्रभु-चरणों में विराजने की कामना करते हैं) ॥६४ ॥

14यदि हंस उड़कर कोधरे के खेत पर आ जाए तो लोग उसको उड़ाने के लिए जाते हैं (अर्थात् यदि संत-महात्मा संसार में आए तो लोग उसे हटाने की कोशिश करते हैं)

15परन्तु भोले लोग ये नहीं जानते कि हंस कभी कोधरा नहीं खाता (अर्थात् संत संसार की मोह-माया से निर्लिप्त होता है) ॥६५ ॥

16उन जीव रूपी पक्षियों की कतारें भी बारी-बारी से चली गई, जिन्होंने जगत् रूपी सरोवर को बसाकर रौनक लगाई हुई थी।

17हे फरीद ! यह जगत् रूपी सरोवर भी सूख जाएगा, परन्तु संत रूपी अकेला कमल ही रहेगा ॥६६ ॥

18बाबा फरीद कहते हैं कि मरणोपरांत कब्र में सिर के नीचे ईट रखकर धरती पर सोना पड़ेगा और बदन को कीड़े काट डालेंगे।

19इस तरह एक जगह पड़े कितने ही युग बीत जाने हैं।॥६७ ॥

20हे फरीद ! सुन्दर शरीर रूपी घड़ा टूट-फूट गया है, साँसों की डोरी भी टूट चुकी है।

21अब मौत का फरिश्ता इजराईल किस घर का मेहमान है॥६८ ॥

22हे फरीद ! सुन्दर देह रूपी घड़ा नष्ट हो गया है, साँसों की डोर भी टूट गई है।

23जो व्यक्ति पापों के कारण केवल बोझ मात्र थे, अब उनको मनुष्य जन्म दोबारा कैसे मिल सकता है॥६६ ॥

24बाबा फरीद कहते हैं कि हे नमाज़ न पढ़ने वाले कुत्ते ! तेरा यह तरीका ठीक नहीं है कि

25तू कभी भी पाँच वक्त की नमाज के लिए मस्जिद में नहीं आता ॥७० ॥

26(रब की बंदगी के लिए प्रेरित करते हुए) बाबा फरीद कहते हैं कि हे भाई ! उठ, हाथ-मुँह धोकर सुबह की नमाज अदा कर।

27जो सिर मालिक के आगे नहीं झुकता, उसे गर्दन से काट देना चाहिए॥७१ ॥

28जो सिर मालिक के आगे नहीं झुकता, उस सिर का क्या करना चाहिए?

29(स्वयं ही उत्तर देते हैं) उसको चुल्हे के नीचे ईंधन में जला देना चाहिए ॥७२॥

30बाबा फरीद समझाते हैं कि तेरे माता-पिता अब कहाँ हैं, जिन्होंने तुझे जन्म दिया था।

31वे भी देखते ही देखते तुझे छोड़कर चले गए हैं, परन्तु अब भी तुझे यकीन नहीं हो रहा (तूने भी मृत्यु को ही गले लगाना है) ॥७३॥

32बाबा फरीद कहते हैं कि ऐ मनुष्य ! अपने मन को मैदान की तरह समतल कर और ऊँचे-नीचे स्थान (द्वैत, अहंकार को) दूर कर।

33फिर नरक की अग्नि तुझे जलाने के लिए नहीं आएगी॥७४ ।।

34महला ५ ॥

35पंचम गुरु उद्बोधन करते हैं, हे फरीद ! परमपिता परमेश्वर अपनी दुनिया में ही है और दुनिया परमेश्वर में बस रही है।

36तो फिर भला किस व्यक्ति को बुरा कहा जाए, जब उसके सिवा कोई नहीं ॥७५॥

37हे फरीद ! जिस दिन धाय (दायी) ने पोषक नलिका को काटा था, यदि उस वक्त गला भी काट देती तो अच्छा होता।

38अन्यथा आज इतनी परेशानियों का सामना न करना पड़ता, न ही इतने दुख मुझे भोगने पड़ते ॥७६॥

39बुढ़ापे के कारण शरीर के सब अंग कमजोर हो गए हैं, जिस कारण दाँत खाने-चबाने, पैर चलने-फिरने, आँखें देखने से और कान सुनने से रह गए हैं।

40यह देखकर शरीर विहल होकर कहता है कि मेरे सब साथी मुझे छोड़कर चले गए हैं।॥७७ ॥

41बाबा फरीद उपदेश देते हुए कथन करते हैं कि हे प्राणी ! अगर कोई तेरे साथ बुरा करे तो उसका भी भला ही कर और मन में गुस्सा मत आने दे।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं