गुरु ग्रंथ साहिब 1352 · Raag Jaijaavantee
1वह अनंतशक्ति परमपिता केवल एक है, उसका नाम सत्य है, वही सृष्टि की रचना करने वाला है, सर्वशक्तिमान है।वह भय से रहित है, उसका किसी से वैर नहीं वस्तुतः सब जीवों पर उसकी समान दृष्टि है। वह (भूत, वर्तमान, भविष्य से रहित) कालातीत, अनंत है। वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त है, वह स्वतः प्रकाशमान हुआ, गुरु-कृपा से प्राप्त होता है।
2रागु जैजावंती महला ९ ॥
3हे मनुष्य ! परमात्मा का भजन कर,राम का भजन-संकीर्तन कर ले, यही तुम्हारा उपयुक्त कार्य है।
4माया का साथ छोड़कर प्रभु की शरण में आ जाओ।
5जगत के सुख एवं मान-सम्मान मिथ्या हैं और सब चीजें झूठी हैं।॥ १॥रहाउ॥
6इस तथ्य को पहचान ले केि यह धन-दौलत सब सपने की तरह है, फिर किस चीज़ का अभिमान कर रहे हो।
7संसार का राज तो रेत की दीवार की तरह नाशवान् है॥ १॥
8गुरु नानक यही बात कहते हैं कि तेरा शरीर खत्म हो जाना है।
9ज्यों पल-पल समय गुजर गया है, वैसे ही वर्तमान भी गुजर रहा है (राम भजन कर ले)॥ २॥१॥
10जैजावंती महला ९ ॥
11भगवान का भजन कर ले, (मैं पुनः आग्रह करता हूँ) हरि-भजन कर ले, क्योंकेि तेरा जीवन गुजरता जा रहा है।
12मैं बार-बार यही कह रहा हूँ, अरे मूर्ख ! तू क्यों नहीं समझ रहा।
13इस शरीर को नष्ट होते देरी नहीं लगती, ओले की तरह यह शीघ्र ही पिघल जाता है॥ १॥रहाउ॥
14सब वहमों को छोड़कर भगवान का नाम जप ले,
15क्योंकि अन्तिम समय यही तेरे साथ जाता है॥ १॥
16विषय-विकारों को भुलाकर प्रभु का यश मन में बसा ले।
17नानक पुकार-पुकार कर कह रहे हैं कि यह सुनहरी जीवन-अवसर बीतता जा रहा है॥ २॥२॥
18जैजावंती महला ९ ॥
19(बुढ़ापा आने पर मौत निकट आ रही है) हे मन ! तेरा क्या हाल हो गया है।
20(किस तरह मुक्ति होगी) इस जगत् में राम का नाम-संकीर्तन तो तूने सुना नहीं और न ही ध्यान दिया।
21उम्र भर विषय-विकारों में आसक्त रहे और इनकी ओर से अपनी बुद्धि को बिल्कुल नहीं हटाया॥ १॥रहाउ॥
22मनुष्य का जन्म मिला था, परन्तु एक पल भी भगवान का स्मरण नहीं किया।
23अपने पुत्र एवं पत्नी के सुखों की खातिर गुलाम बन गए और पैरों में जंजीर पड़ गई॥ १॥
24नानक पुकार कर कहते हैं कि जगत का प्रसार सपने की तरह है,
25उस ईश्वर का सिमरन क्यों नहीं किया, जिसकी माया भी दासी है॥ २॥३॥
26जैजावंती महला ९ ॥
27हे प्राणी ! यह जिन्दगी व्यर्थ ही गुजर रही है।
28हे नासमझ ! दिन-रात पुराणों की कथा सुनकर भी समझ नहीं रहे।
29मृत्यु तो तेरे सामने आ गई है, फिर भला इससे बचकर किधर भागोगे॥ १॥रहाउ॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं