सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1339 · Raag Prabhaatee · Guru Arjan Dev Ji

1हमने तो आठ प्रहर परब्रह्म का ध्यान किया है और सदैव उसके गुण गाते रहते हैं।

2नानक कथन करते हैं कि परब्रह्म गुरु को पाकर मेरा मनोरथ पूरा हो गया है॥ ४॥ ४॥

3प्रभाती महला ५ ॥

4ईश्वर का स्मरण करने से सब पाप दूर हो जाते हैं।

5गुरु ने सच्चे नाम की राशि प्रदान की है।

6भक्तजन प्रभु के दरबार में शोभा के पात्र बनते हैं और

7भक्ति करके सदैव सुन्दर लगते हैं।॥ १॥

8हे मेरे भाई ! परमात्मा के नाम का जाप करो;

9इससे सब रोग दोष नाश हो जाते हैं और मन से अज्ञान का अंधेरा समाप्त हो जाता है॥ १॥रहाउ॥

10मित्र गुरु ने मुझे जन्म-मरण के चक्र से बचा लिया है और

11हमारी परमात्मा के नाम से प्रीति लग गई है।

12इससे करोड़ों जन्मों के दुख-क्लेश मिट गए हैं।

13जो उसे मंजूर है, वह अच्छा ही होता है।॥ २॥

14मैं उस गुरु को सदैव कुर्बान जाता हूँ,

15जिसकी कृपा से परमात्मा का ध्यान किया है।

16सो ऐसा गुरु भाग्यशाली को ही प्राप्त होता है,

17जिसे मिलकर ईश्वर में लगन लगती है॥ ३॥

18हे परब्रह्म स्वामी ! कृपा करो,

19तू सबके दिल की जानता है।

20आठ प्रहर अपनी भक्ति में लगाकर रखो,

21हे प्रभु ! दास नानक तेरी शरण में है॥ ४॥ ५॥

22प्रभाती महला ५ ॥

23प्रभु ने कृपा करके मुझे अपना बना लिया है और

24मुझे हरिनाम जपने के लिए प्रदान कर दिया है।

25अब मैं आठ प्रहर ईश्वर का गुणगान करता रहता हूँ,

26जिससे सब भय नाश हो गए हैं और मेरी सारी चिंता दूर हो गई है॥ १॥

27गुरु के चरणों में लगकर हम बन्धनों से मुक्त हो गए हैं।

28जो गुरु कहता है, वही भला है और हमने मन की चतुराई त्याग दी है॥ १॥रहाउ॥

29हमारे मन तन में केवल प्रभु ही बसा हुआ है,

30जिस कारण कोई कलह-क्लेश एवं विध्न नहीं आता।

31प्रभु सदैव जीव के साथ रहता है और

32प्रभु के नाम में लीन होने से पापों की मैल दूर हो जाती है॥ २॥

33हमारा तो प्रभु के चरणों से प्रेम लगा हुआ है,

34जिससे काम-क्रोध, अहंकार सब नष्ट हो गए हैं।

35मैंने तो प्रभु मिलन का ही मार्ग जाना है और

36परमात्मा की भक्ति से मन संतुष्ट हो गया है।३॥

37हे सज्जनो, संतो, सुखदायी मित्रो ! सुनो;

38हरिनाम रत्न असीम है, इसकी तुलना नहीं की जा सकती।

39तुम सदैव गुणों के भण्डार प्रभु का गुणगान करो,

40नानक का कथन है कि वह भाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।॥ ४॥ ६॥

41प्रभाती महला ५ ॥

42वही लोग धनवान् हैं, वही प्रभु दरबार में सच्चे साहूकार माने जाते हैं,

43जिनकी हरिनाम पर पूर्ण निष्ठा होती है।॥ १॥

44हे मेरे मित्र मन ! हरिनाम का जाप करो;

45पूर्ण गुरु उत्तम भाग्य से ही प्राप्त होता है, जिसकी रीति पूर्ण निर्मल है॥ १॥रहाउ॥

46तब लाभ प्राप्त होता है और शुभकामनाएं मिलती हैं

47जब संतों की कृपा से ईश्वर का गुणगान किया जाता है ॥ २॥

48तब जन्म सफल होता है और तभी जीवन मान्य होता है

49जब गुरु की कृपा से ईश्वर-भक्ति का आनंद पाया जाता है।॥ ३॥

50नानक फुरमान करते हैं कि मनुष्य के काम-क्रोध अहंकार सब नष्ट हो जाते हैं और

51गुरु द्वारा वह संसार-समुद्र से पार उतर जाता है।॥ ४॥ ७॥

52प्रभाती महला ५ ॥

53पूर्ण गुरु की शक्ति भी पूर्ण है,

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं