सिख धर्म
वापस

गुरु ग्रंथ साहिब 1326 · Raag Kalyaan · Guru Raam Daas Ji

1इससे तन-मन को शान्ति प्राप्त होगी, अधिकतर रोग कट जाएँगे और सुख प्राप्त होगा॥ ३॥

2जैसे सूरज की किरणें हर जगह पर पहुँचती हैं, वैसे ही घट घट में ईश्वर व्याप्त है।

3जब साधु पुरुष से होती है तो हरिनाम रस का पान होता है।॥ ४॥

4सेवक की गुरु से ऐसी प्रीति लगी हुई भेंट है, ज्यों चकवी सूर्य दर्शन करके अपने प्रेम का इजहार करती है।

5वह रात भर देखती है, जब सूर्य मुँह दिखाता है तो दर्शन का अमृतपान करती है॥ ५॥

6मायावी व्यक्ति कुत्ते की तरह लालची कहलाता है और उसमें दुर्मति की बहुत मैल भरी होती है।

7अपने स्वार्थ के लिए वह बहुत बातें करता है, लेकिन ऐसे व्यक्ति पर कैसे विश्वास किया जा सकता है॥ ६॥

8साधु पुरुषों की शरण में आओ, उनकी संगत में रहना चाहिए, जिससे हरिनाम रस प्राप्त किया जाए।

9गुणवान मनुष्य परोपकार की बातें करते हैं, अतः संतों एवं भक्तों के सम्मुख रहना चाहिए॥ ७॥

10हे ईश्वर ! तू अगम्य, दयालु, दया का भण्डार और सब को देने वाला है, दया करके हमें बचा लो।

11नानक का कथन है- सब जीवों का एकमात्र तू ही जीवनदाता है, सबका पोषण करता है॥ ८॥ ५॥

12कलिआन महला ४ ॥

13हे ईश्वर ! हमें दासों का दास बना लो।

14जब तक अन्तर्मन में जीवन सॉसें चल रही हैं, साधु पुरुषों की चरण-धूल पान करते रहें॥ १॥रहाउ॥

15शिवशंकर, देवर्षि नारद, शेषनाग एवं मुनिजन भी साधुओं की चरण-धूल चाहते हैं।

16जहाँ साधु अपने चरण रखते हैं, वे सभी स्थान पवित्र हो जाते हैं॥ १॥

17लाज, अहंकार सब छोड़कर साधु पुरुषों की संगत में रहना चाहिए।

18साधु धर्मराज का भय दूर करते हैं और विकारों के सागर में डूबने से बचा लेते हैं।॥ २॥

19जो भ्रम में भटक कर सूख जाते हैं, खड़े-खड़े सूख जाते हैं, साधुओं के संग रहकर पुनः हरे भरे हो जाते हैं।

20अतः पल भर की देरी किए बिना साधुओं के चरणों में लग जाना चाहिए॥ ३॥

21प्रभु नामकीर्तन रूपी अमूल्य रत्न साधुओं के पास मौजूद है।

22जो गुरु के वचन को सत्य मानता है, गुरु उसके सम्मुख नाम-रत्न निकाल कर रख देता हैं।॥ ४॥

23हे सज्जनो, हे मेरे भाई ! मेरी बात जरा ध्यान से सुनना, गुरु बाँह उठाकर पुकार रहा है कि

24यदि आत्मा को नित्य सुख चाहते हो तो सतिगुरु की शरण में पड़ो।॥ ५॥

25यदि उत्तम भाग्य हो तो गुरु के उपदेश से हरिनाम का स्मरण होता है।

26तदन्तर माया-मोह के विषम संसार-समुद्र से पार हुआ जाता है और स्वाभाविक ही हरिनाम रस का पान होता है॥ ६॥

27जो लोग धन-दौलत के अभिलाषी होते हैं, वे धन में ही मरते खपते हैं।

28अज्ञान के अन्धेरे वाला रास्ता बहुत विषम है, परन्तु मनुष्य अहंकार का बोझ लाद लेता है॥ ७॥

29गुरु नानक का फुरमान है कि राम-राम जपते रहो, राम नाम से मुक्ति होती है।

30जब सच्चा गुरु मिल जाता है तो वह नाम का जाप करवाता है, तदन्तर जीव राम नाम में विलीन हो जाता है।॥ ८॥ ६॥ छ: अष्टपदियों का जोड।

31First Set of Six||

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं