गुरु ग्रंथ साहिब 1312 · Raag Kaanraa
1कानड़ा छंत महला ५
2ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
3वही लोग संसार से मुक्त हुए हैं, जिन्होंने परमात्मा का ध्यान किया है।
4माया के यत्न किसी काम नहीं आते।
5परमात्मा का चिंतन करने वाले सब फल प्राप्त करते हैं, ऐसे लोग धन्य एवं भाग्यशाली हैं।
6वे सत्संग में सावधान रहकर नाम-कीर्तन में लगे रहते हैं और उनकी एक ईश्वर में ही लगन लगी रहती है।
7अभिमान, मोह एवं विकारों को छोड़कर साधु पुरुषों के चरणों में लग जाओ और मुक्ति पा लो।
8नानक विनती करते हैं कि हे स्वामी ! तेरी शरण में भाग्यशाली ही दर्शन पाते हैं।॥ १॥
9साधु-पुरुषों के संग मिलकर नित्य परमात्मा का भजन करो,
10खूब मजे लेकर आनंदपूर्वक स्वामी का गुणगान करो,
11गुणानुवाद करके हरिनाम अमृत पान करके जीवन पाओ, इस तरह जन्म-मरण से मुक्त हो जाओ।
12सत्संग में रहकर परमात्मा का मनन करने से पुनः कोई दुख नहीं लगता।
13हे दाता, परमपुरुष विधाता ! दया करो और संतों की सेवा में तल्लीन रखो।
14नानक विनती करते हैं कि हे प्रभु ! हम तो केवल भक्तजनों की चरण-धूल ही चाहते हैं और तेरे दर्शनों से सहजावस्था में लीन होते हैं॥ २॥
15सब जीव भगवान का भजन करते हैं,
16इसी से जप, तपस्या, संयम इत्यादि सब कर्म पूरे हो जाते हैं।
17अतः नित्य अन्तर्यामी स्वामी का भजन करो, इसी से जन्म सफल होता है।
18जो ईश्वर का गुणानुवाद करते हैं, नित्य उसी के चिंतन में लीन रहते हैं, ऐसे लोगों का जन्म सफल हो जाता है।
19मायातीत परमेश्वर ही जप, तप एवं संयम है और प्रभु-नाम धन ही साथ चलता है।
20नानक विनती करते हैं कि हे प्रभु ! दया पूर्वक नाम रत्न साथ बांध दो॥ ३॥
21खुशी के गीत गाए जा रहे हैं,
22आनंद कौतुक हो गया है, कृपा करके परमानंद प्रभु मिल गया है।
23सुख देने वाला प्रभु मिल गया है, मन की कामना पूरी हो गई है।
24अब खुशियाँ ही खुशियाँ छा गई हैं, स्वाभाविक सुख मिला है और पुन: कोई दुख नहीं लगता।
25जब गले लगाकर मिलता है तो सुख ही प्राप्त होता है और पाप विकार सब बुराइयों दूर हो जाती हैं।
26नानक विनय करते हैं कि मुझे परमानंद स्वामी मिल गया है।॥ ४॥ १॥
27कानड़े की वार महला ४ मूसे की वार की धुनी
28ੴ सतिगुर प्रसादि
29श्लोक महला ४॥
30परमात्मा का नाम सुखों का घर है, गुरु के उपदेशानुसार इसे हृदय में बसाकर रखो।
31जो अहम् एवं विषय-विकारों को मारकर दासों का दास बनकर रहता है,
32वह जन्म जीत लेता है और कभी पराजित नहीं होता।
33हे नानक ! जो गुरु की शिक्षानुसार परमात्मा का मनन करते हैं, वे भाग्यशाली हैं।॥ १॥
34महला ४॥
35ईश्वर जगत का पालक है, गुणों का भण्डार है, उसी की महिमा गाओ।
36गुरु के उपदेश से ईश्वर का भजन करो, तो ही दरबार में सम्मान प्राप्त होता है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं