गुरु ग्रंथ साहिब 1300 · Raag Kaanraa
1नानक का कथन है कि जब संतों के चरणों में नतमस्तक हो गया तो अभयदान हरिनाम पा लिया॥२॥९॥
2कानड़ा महला ५ ॥
3साधु महापुरुष के चरण-कमल में मन लगाया है।
4मैंने दुनिया के सपना होने की बात सुनी थी, अब सच्चे गुरु ने नाम उपदेश दिया तो सच्चाई को देख लिया है कि यह सपना ही है॥१॥रहाउ॥
5राज्य, यौवन, धन-दौलत इत्यादि से व्यक्ति तृप्त नहीं होता और बार-बार अधिकाधिक पाने की लालसा करता है।
6परमात्मा के गुणगान से शान्ति प्राप्त होती है, सब तृष्णा बुझ जाती है और सुख ही सुख मिलता है॥१॥
7सत्य को समझे बिना जीव पशु की तरह है और भ्रम, मोह एवं माया में ही व्याप्त रहता है।
8हे नानक ! साधु पुरुष के साथ हमारी मृत्यु की जंजीर कट गई है और स्वाभाविक ही सत्य में लीन हो गया हूँ॥२॥१०॥
9कानड़ा महला ५ ॥
10परमात्मा के चरणों का हृदय में स्तुतिगान करो,
11शीतल सुख शान्ति की मूर्ति प्रभु का नित्य स्मरण करो॥१॥रहाउ॥
12इसके फलस्वरूप सब आशाएँ पूर्ण होती हैं और करोड़ों जन्मों के दुख दूर हो जाते हैं।॥१॥
13साधुजनों के साथ दान-पुण्य एवं अनेक कर्मों का फल है।
14हे नानक ! इस तरह सब ताप-संताप मिट जाते हैं और पुनः मृत्यु भी ग्रास नहीं बनाती॥२॥११॥
15कानड़ा महला ५ घरु ३
16ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
17संत-महापुरुषों के साथ प्रभु का ज्ञान कथन करना चाहिए।
18पूर्ण परम ज्योति परमेश्वर का सुमिरन (स्मरण) करने से मान-सम्मान प्राप्त होता है॥१॥रहाउ॥
19साधुओं के साथ भगवान का स्मरण करने से आवागमन दूर हो जाता है और हर श्रम नष्ट हो जाता है।
20परब्रह्म के रंग में लीन होने वाले पापी भी पल में पावन हो जाते हैं।॥१॥
21जो-जो हरि-कीर्तन सुनता या कथन करता, उसकी दुर्मति नाश हो जाती है।
22हे नानक ! वह सभी मनोरथ प्राप्त करता है और उसकी हर आशा पूर्ण होती है॥२॥१॥१२॥
23कानड़ा महला ५ ॥
24साधु पुरुषों की संगत में सुखों का भण्डार हरिनाम है,
25यही सच्चा साथी एवं सहायक है, जो जीव के काम आता है।१॥रहाउ॥
26नित्य संतों की चरणरज में स्नान करना चाहिए,
27इससे जन्म-जन्मांतर के पाप खत्म हो जाते हैं।॥१॥
28संतजनों की वाणी बहुत ऊँची है,
29हे नानक ! स्मरण करने वाला प्राणी संसार-समुद्र से पार हो जाता है॥२॥२॥१३॥
30कानड़ा महला ५ ॥
31हे साधु पुरुषो ! परमात्मा का गुण-गान करो।
32मान-सम्मान, तन, धन, प्रण सब यही है और प्रभु के स्मरण से सब दुख दूर हो जाते हैं।॥१॥रहाउ॥
33इधर-उधर क्यों लोभ करते हो, एक ईश्वर में मन लगाओ॥१॥
34संतों का स्थान महा पवित्र है, इनके साथ मिलकर ईश्वर का चिंतन करो॥२॥
35नानक की विनती है कि मैं सब त्याग कर शरण में आया हूँ, साथ मिला लो॥३॥३॥१४॥
36कानड़ा महला ५ ॥
37मैं अपने सज्जन प्रभु को देख-देख कर खुशी मनाता हूँ॥१॥रहाउ॥
38वह आनंद एवं परम सुख की मूर्ति है, उसके अलावा अन्य कुछ भी अच्छा नहीं लगता॥१॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं