सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1298 · Raag Kaanraa · Guru Raam Daas Ji

1हे प्रभु ! भक्तजन एकाग्रचित होकर तेरा ध्यान करते हैं। परमात्मा का नाम सुखों का घर है, इस तरह साधु-महात्मा जन नाम जपकर सुख ही पाते हैं।

2हे प्रभु ! गुरु-सतगुरु के साथ मिलकर साधुजन तेरी उस्तति करते हैं॥१॥

3हे स्वामी ! जिनके हृदय में तू रहता है, वे सर्व सुख एवं फल पाते हैं और भक्तों के साथ संसार-समुद्र से पार हो जाते हैं।

4उनकी सेवा में हमें लगाए रखना, हे नानक के प्रभु ! तू ही तू तू ही हमारा सर्वस्व है॥२॥६॥१२॥

5कानड़ा महला ५ घरु २

6ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

7कृपानिधि ईश्वर का गुणानुवाद करो।

8वह सब दुख नष्ट करने वाला है, सुखों का दाता है, वही सच्चा गुरु है, जिससे साक्षात्कार होते ही सर्व सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।॥१॥रहाउ॥

9प्रभु का नाम स्मरण करने से मन को शान्ति प्राप्त होती है,

10(नाम स्मरण से) करोड़ों अपराधी पल में तिर गए हैं।॥१॥

11जिसे अपना गुरु याद आता है,

12उसे सपने में भी कोई दुख नहीं छूता॥२॥

13जिसे अपना सतिगुरु बचाता है,

14वह भक्त अपनी जिव्हा से ईश्वर का जाप करता है॥३॥

15नानक फुरमाते हैं कि गुरु ने कृपा की है,

16लोक-परलोक में मुख उज्ज्वल हो गया है॥४॥१॥

17कानड़ा महला ५ ॥

18हे स्वामी ! मैं तेरी ही आराधना करता हूँ,

19उठते-बैठते, सोते-जागते, श्वास-श्वास तेरा ही जाप करता हूँ॥१॥रहाउ॥

20उसी के हृदय में हरिनाम बसता है,

21जिसे स्वामी दान करता है।१॥

22उसी के हृदय को शान्ति प्राप्त होती है,

23जिसकी गुरु के वचनों से ठाकुर जी से भेंट होती है॥२॥

24वही सर्व कलाओं में प्रवीण होता है,

25जिसे गुरु हरिनाम मंत्र देता है।॥३॥

26हे नानक ! मैं उस पर बलिहारी जाता हूँ,

27जिसने कलियुग में हरिनाम पाया है॥४॥२॥

28कानड़ा महला ५ ॥

29हे मेरी रसना ! प्रभु की कीर्ति-गान करो,

30अनेक बार संत पुरुषों की वन्दना करो, क्योंकि प्रभु जी के चरण यहाँ बसते हैं।॥१॥रहाउ॥

31अनेक कोशिशें करने पर भी द्वार प्राप्त नहीं होता,

32जब कृपालु होता है तो व्यक्ति परमात्मा का ध्यान करने लगता है।॥१॥

33करोड़ों कर्मकाण्ड करने पर भी शरीर शुद्ध नहीं होता,

34मगर साधु-पुरुषों की संगत में मन को ज्ञान प्राप्त होता है।॥२॥

35माया के अनेक रंगों में तृष्णा नहीं बुझती,

36प्रभु का नाम लेते ही सर्व सुख प्राप्त हो जाते हैं।॥३॥

37हे नानक ! जब परब्रह्म दयालु होता है तो

38संसार के झंझटों से छुटकारा हो जाता है।॥४॥३॥

39कानड़ा महला ५ ॥

40ईश्वर से हमारी यही कामना है कि

41संतों की सेवा में तल्लीन रहकर हरिनाम जपता रहूँ और इस तरह परमगति प्राप्त हो जाए॥१॥

42ठाकुर जी की चरण-शरण में पूजा-अर्चना करता रहूँ।

43जो प्रभु करता है, वही अच्छा होता है।॥१॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं