गुरु ग्रंथ साहिब 1288 · Raag Malaar · Guru Nanak Dev Ji
1दरअसल इस सच्चाई को मानना चाहिए कि पूर्व कर्मानुसार फल भोगना पड़ता है।
2उसके हुक्म के अन्तर्गत ही किए कर्मों का फैसला होता है।
3यह भी जान लो कि भयानक संसार-सागर से शब्द-गुरु ही पार करवाने वाला है।
4चोरों, जुआरियों एवं बुरे लोगों को कोल्हू में पिराया जाता है।
5चुगलखोर, निंदक पापियों को कठोर दण्ड प्राप्त होता है।
6गुरु के द्वारा सत्य में लीन रहने वाले ही प्रभु की अदालत में इज्जत के हकदार बनते हैं।॥२१॥
7श्लोक महला २॥
8(कलियुग में सब उलट ही चल रहा है क्योंकि) दौलत के पुजारी को बादशाह माना जा रहा है, मूर्ख व्यक्ति विद्वान के नाम से मशहूर हो रहा है।
9अज्ञानांध को पारखी माना जा रहा है, इस तरह की बातें हो रही हैं।
10बदमाशी करने वाले का नाम चौधरी है और झूठ एवं मक्कारी का हर तरफ बोलबाला है।
11हे नानक ! गुरु से यही सच्चाई पता चलती है कि कलियुग का यह उलटा ही इंसाफ है॥१॥
12महला १॥
13हिरण की तरह (व्यक्ति जिस कुटिल कार्य में फंस जाता है, वे अपने अन्य संगियों को भी उसी दलदल में फंसा देता है) बाज सरीखे (चालबाज अपनों को ही लूटते हैं) और सरकारी कर्मचारी अपनों के साथ रिश्वत एवं अत्याचार करते हैं।
14जिस फंदे में फंसे होते हैं, अपने सगे-संबंधियों को भी फसा देते हैं और आगे ठिकाना नहीं मिलता।
15दरअसल वही शिक्षित, पण्डित एवं विद्वान माने जाते हैं, जो प्रभु उपासना का कर्म करते हैं।
16सर्वप्रथम भूमि में पौधे की जड़ लगती है, तदन्तर वृक्ष बना कर छांव देता है।
17आजकल स्थिति यह है कि राजे शेर की मानिंद अत्याचार करके जनता का लहू बहा रहे हैं और
18सरकारी कर्मचारी कुत्तों की तरह किसी भी जगह पहुँच कर अच्छे भले लोगों को परेशान कर रहे हैं।
19नौकर नाखुनों की तरह लोगों को जख्म पहुँचाते हैं और
20कुतों की तरह जनता पर जुल्म करके उनका खून चूस रहे हैं।
21जहाँ प्रभु की अदालत में किए कर्मो का हिसाब होगा,
22ऐसे बुरे लोगों की नाक काट दी जाएगी॥२॥
23पउड़ी॥
24निरंकार स्वयं दुनिया को उत्पन्न करता है और स्वयं ही रोजी देकर पोषण करता है।
25प्रभु भय-भाव बिना भ्रम नहीं कटता और न ही प्रभु नाम से प्रेम उत्पन्न होता है।
26सतगुरु से ही परमात्मा के प्रति श्रद्धा भाव उत्पन्न होता है और मोक्ष का द्वार प्राप्त हो जाता है।
27प्रभु-भय से ही सुख शान्ति प्राप्त होती है और आत्म-ज्योति परम-ज्योति में विलीन हो जाती है।
28गुरु की शिक्षाओं का मनन करके परमात्मा के भय-भाव से ही भयानक संसार समुद्र से पार हुआ जाता है।
29भय से निर्भय प्रभु प्राप्त होता है, जिसका कोई अन्त एवं आर-पार नहीं।
30स्वेच्छाचारी प्रभु भय-भाव का महत्व नहीं जानते और तृष्णा में जलते हुए पुकार करते रहते हैं।
31हे नानक ! गुरु की शिक्षानुसार प्रभु-नाम को हृदय में बसाकर ही परम सुख पाया जाता है।॥२२॥
32श्लोक महला १॥
33रूप-जवानी की कामवासना से दोस्ती है और भूख का स्वाद से नाता है।
34लालची धन दौलत से ही घुलमिल जाता है और नींद से ऊँघे हुए जीव के लिए छोटी-सी जगह भी पलंग बन जाता है।
35क्रोध कुत्ते की तरह भौंकता है, ख्वार होता है और अन्धा बनकर व्यर्थ चिल्लाता है।
36हे नानक ! चुप रहना ही भला है, अन्यथा हरिनाम के बिना मुँह से गंदगी निकलती है॥१॥
37महला १॥
38राज, माल, रूप, जाति एवं यौयन पाँचों ही ठग हैं।
39इन ठगों ने पूरे जगत को ठग लिया है और कोई शर्म नहीं रखी।
40जो गुरु के चरणों में लीन हो गए हैं, इन ठगों को उन्होंने ही ठगा है।
41हे नानक ! दुर्भाग्यशाली कितने ही लोग लुटते जा रहे हैं।॥२॥
42पउड़ी॥
43किसी लायक पढ़े-लिखे पुरुष से यदि हिसाब मांगा जाए तो वह जिम्मेदार बनता है।
44ईश्वर के नाम से विहीन व्यक्ति झूठा ही सिद्ध होता है और मुश्किल एवं तंगी काटता है।
45उसके लिए सभी राह कठिन एवं गलियों में बाधा उत्पन्न होती है।
46सच्चा बेपरवाह प्रभु शब्द के चिंतन से संतोष प्रदान करता है।
47वह गहन गंभीर एवं अथाह है, उस तक पहुँचना संभव नहीं।
48ईश्वर से विमुख रहने वाला दुख, मुसीबतें एवं परेशानियां झेलता है और गुरु के बिना कोई मुक्त नहीं होता।
49प्रभु नाम की चर्चा करके सम्मानपूर्वक अपने सच्चे घर जाओ।
50यह सच्चाई जान लो कि ईश्वर अपने हुक्म से जीवन-सांसें एवं रोजी-रोटी देता है॥२३॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं