गुरु ग्रंथ साहिब 1279 · Raag Malaar · Guru Amar Daas Ji
1ध्यानपूर्वक देख लो, स्वेच्छाचारी उलटा ही चलता है।
2फंदे में फसे हिरण की तरह सिर पर मौत ही नजर आती है।
3भूख, तृष्णा एवं निंदा बहुत बुरी है और काम, क्रोध विकराल चाण्डाल समान है।
4जब तक वह शब्द का चिंतन नहीं करता, उसे आँखों से कुछ नजर नहीं आता।
5हे स्रष्टा ! जब तुझे उपयुक्त लगता है तो मन को संतोष मिलता है और व्यर्थ के जंजाल दूर हो जाते हैं।
6गुरु की सेवा से ही मनुष्य की जड़ मजबूत होती है, गुरु ही ऐसी सीढ़ी है जो मंजिल तक पहुँचाती है, गुरु ही ऐसा जहाज है, जो संसार-सागर से पार उतारता है।
7हे नानक ! जब लगन लगती है तो मन सत्यशील होकर सत्य में लीन रहता है॥१॥
8महला १॥
9मंजिल एक ही है, द्वार भी एक (प्रभु) ही है। गुरु ही उस स्थान तक पहुँचने के लिए सीढ़ी है।
10हे नानक ! ईश्वर अत्यंत सुन्दर है और सभी सुख सच्चे नाम के सिमरन में हैं।॥२॥
11पउड़ी॥
12परमात्मा स्वतः प्रकाशमान हुआ, संसार बनाकर स्वयं ही पहचान दी।
13आसमान को धरती से अलग कर विशाल चंदोआ स्थापित कर दिया।
14अपने हुक्म से गगन को बिना स्तंभ के सहारा दिया हुआ है।
15सूर्य एवं चांद को उत्पन्न कर दुनिया को रोशनी प्रदान की।
16उसने दिन-रात बनाकर अद्भुत लीला की है।
17धर्म का विचार करते हुए तीर्थों पर स्नान के लिए पर्वो की रचना कर दी।
18हे स्रष्टा ! क्या कहकर व्याख्या करूँ, तुझ सरीखा अन्य कोई नहीं।
19तू ही सच्चे सिंहासन पर अटल रूप में विराजमान है, अन्य दुनिया आवागमन में पड़ी हुई है॥१॥
20श्लोक महला १॥
21गुरु नानक का कथन है कि जब सावन के मौसम में बरसात आती है तो इन चारों को बहुत खुशी मिलती है
22नागों को छोटे-छोटे जीवों के रूप में खाने को मिलता है, पशुओं को गर्मी से निजात मिलती है, मछलियों को भरपूर पानी मिलता है, धनवानों को धन-दौलत के साधनों से खुशी प्राप्त होती है।॥१॥
23महला १॥
24गुरु नानक का कथन है कि सावन के मौसम में भरपूर वर्षा होने से चारों को तकलीफ भी झेलनी पड़ती है।
25गाय बछड़ों से अलग होकर चरने लग जाती है और बैल जोतने लग जाते हैं, निर्धनों को काम-धंधा नहीं मिलता, जलथल की वजह से राहगीरों को बहुत मुश्किल होती है, नौकर-चाकरों को वर्षा में भी अधिक मशक्कत करनी पड़ती है॥२॥
26पउड़ी॥
27हे परमेश्वर ! तू शाश्वत है, सत्यशील है, सच्चा इन्साफ करके सत्य में कार्यशील है।
28हृदय कमल में गुप्त रूप में समाधि लगाई हुई है।
29ब्रह्मा स्वयं को बड़ा कहलाता है, पर वह भी रहस्य नहीं पा सका।
30न उसका पिता है, न कोई माता है, किस प्रकार जन्म हुआ, इसका भी कोई रहस्य नहीं पा सकता।
31वह रूप, चिन्ह एवं वर्ण से भी रहित है।
32उसे कोई भूख-प्यास प्रभावित नहीं करती, वह पूर्णरूपेण तृप्त है।
33गुरु में स्वयं को समाकर उपदेश बांटता है।
34वह सत्य से ही प्रसन्न होता है और सत्य में ही लीन है॥२॥
35श्लोक महला १॥
36रोगी समझ कर वैद्य को बुलाया गया तो वह बाँह पकड़ कर नब्ज ढूंढने लग गया।
37पर भोला वैद्य नहीं जानता कि दिल में क्या दर्द है॥१॥
38महला २॥
39वैद्य जी ! माना कि आप कुशल वैद्य हैं, पहले रोग को तो पहचान लो।
40ऐसी दवा ढूंढ लो जिससे रोग बिल्कुल नष्ट हो जाए।
41जिस दवा से रोग दूर हो और शरीर में सुख उत्पन्न हो।
42नानक कथन करते हैं, वैद्य तभी माना जाए यदि रोग नष्ट हो जाए॥२॥
43पउड़ी॥
44सृष्टिकर्ता ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश इत्यादि देवताओं को उत्पन्न किया।
45ब्रह्मा को वेद देकर पूजा-पाठ में लगाया।
46विष्णु के दस अवतारों में दशरथ-पुत्र राजा राम का भी जन्म हुआ,
47जिसने परमात्मा के हुक्म से राक्षसों का संहार किया।
48ईश, महेश्वर इत्यादि रुद्र भी उपासना करके परमेश्वर का अंत नहीं पा सके।
49परमेश्वर ने सच्चा सिंहासन बनाकर अपनी महत्ता प्रदान की है।
50दुनिया को भिन्न-भिन्न कार्यों में लगाकर स्वयं को गुप्त रखा हुआ है।
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं