सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1241 · Raag Saarang · Guru Nanak Dev Ji

1वह नित्य इनकी पूजा-अर्चना करता है और स्नान भी करवाता है।

2वह केसर, चन्दन एवं फूल चढ़ाता है और

3उनके पैरों में पड़-पड़कर मनाने का भरसक प्रयास करता है।

4(समाज की अजीब विडम्बना है कि) वह लोगों से (दान-दक्षिणा इत्यादि) मांग-मांगकर खाता-पहनता है।

5इस प्रकार अज्ञानपूर्ण कर्म में अन्धा दण्ड ही प्राप्त होता है।

6पत्थरों की मूर्तियाँ न तो भूखे लोगों का पेट भर सकती हैं और न ही मरने से बचा सकती हैं।

7फिर भला अन्धों की झुण्डली में अंधा झगड़ा किसलिए ॥१॥

8महला १ ॥

9सभी चिन्तन, योग-साधना, सभी वेद-पुराणों का पाठ-पठन,

10सभी कर्म, तपस्या, गीत, ज्ञान,

11सब बुद्धियाँ, शुद्धता, सभी तीर्थ, पावन स्थल,

12सब हकूमतें, सब कानून, सब खुशियां, सब भोजन,

13सभी मनुष्यों, देवताओं, योगियों, ध्यानशीलों,

14सब पुरियों, खण्डों, संसार के सब जीवों को

15ईश्वर अपने हुक्म से चला रहा है और कर्मों के अनुसार फल देता जा रहा है।

16गुरु नानक कथन करते हैं कि ईश्वर सत्य है, उसका नाम शाश्वत है, उसकी अदालत भी अटल है॥२॥

17पउड़ी ॥

18हरि नाम का मनन करने से ही सुख उत्पन्न होता है और नाम से ही मुक्ति होती है

19नाम का मनन करने से संसार में इज्जत प्राप्त होती है और हृदय में ईश्वर ही बसता है।

20यदि हरिनाम का मनन किया जाए तो संसार-सागर से पार हुआ जा सकता है, पुनः कोई विपति का सामना नहीं करना पड़ता।

21प्रभु के नाम-मनन से सच्चा मार्ग प्राप्त होता है और नाम से दुनिया में कीर्ति होती है।

22हे नानक ! यदि सच्चा गुरु मिल जाए तो ही हरिनाम का मनन होता है, जिसे वह देता है, वही पाता है ॥६॥

23श्लोक महला १॥

24बड़े-बड़े नगरों एवं प्रदेशों को जीत लिया जाए, एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की जाए।

25प्राणायाम कर जप किया जाए, शीर्षासन कर लिया जाए।

26जीव कोई भी तरीका अपना ले, बेशक कोई भी ताकत अपना ले।

27हे नानक ! किसी को कहा नहीं जा सकता, ईश्वर किस को खुश होकर देता है।

28सब ईश्वर के हुक्म से हो रहा है, किन्तु मूर्ख यह मानता है कि यह मेरी शक्ति का फल हे ॥१॥

29महला १ ॥

30मैं करोड़ों दफा परमात्मा की हस्ती, अनंतशक्ति, सर्वव्यापकता, सत्ता एवं महिमा की बात कहता रहूँ।

31मैं बेशक सदैव कहता रहूँ, वह शाश्वत, चिरस्थाई, अटल है और मेरे यह कहने में कोई कमी भी न आए।

32वह मुझे इतनी समर्था दे कि यह बात कहते कभी थक न पाऊँ, कोई रुकावट भी पेश न आए।

33गुरु नानक फुरमाते हैं कि इन सबके बावजूद भी उस सर्वशक्तिमान के बारे में जितना भी कहता हूँ बहुत थोड़ा है उसकी प्रशंशा के लिए कहना पूरा नहीं है ॥२॥

34पउड़ी ॥

35हरिनाम के मनन से समूचे परिवार सहित कुल का उद्धार हो जाता है।

36नाम का मनन करने से उसकी संगत में उद्धार हो जाता है, जिसने दिल में परमात्मा को बसाया होता है।

37हरिनाम के मनन एवं श्रवण से उसी का उद्धार होता है, जो रसना से हरि का भजन करता है।

38हरिनाम के मनन से दुख एवं भूख भी दूर हो गई, जिसने नाम में मन लगाया है।

39गुरु नानक का फुरमान है कि उन्होंने ही ईश्वर का स्तुतिगान किया है, जिनका गुरु से साक्षात्कार हुआ है॥१०॥

40श्लोक महला १ ॥

41सभी दिन-रात, सब तिथियाँ एवं वार,

42मौसम, महीने, समूची धरती, पर्वत,

43हवा, पानी, अग्नि, पाताल,

44सभी प्रदेश, नगर, चौदह लोक, संसार सब कितना बड़ा है।

45परमात्मा के हुक्म का रहस्य प्राप्त नहीं हो सकता, उसकी महिमा, उपलब्धियों एवं लीलाओं का वर्णन भी नहीं हो सकता।

46उसकी स्तुति करने वाले स्तुतिगान कर करके थक गए हैं।

47हे नानक ! उन गंवारों को थोड़ा-सा भी रहस्य प्राप्त नहीं हुआ ॥१॥

48महला १ ॥

49यदि आँखों के भार धूमकर सृष्टि को देखें।

50ज्ञानी, पण्डितों से सच्चाई पूछे, वेदों का चिन्तन करके रहस्य पूछे ,

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं