सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1240 · Raag Saarang · Guru Nanak Dev Ji

1गुरु नानक कथन करते हैं कि ईश्वर की महिमा का बखान बहुत मुश्किल है, उसके रहस्य की मात्र बखान से अनुभूति नहीं हो सकती ॥२॥

2पउड़ी ॥

3हरि-नाम का संकीर्तन सुनने से मन प्रसन्न हो जाता है, इससे मन को शान्ति प्राप्त होती है।

4हरि-नाम की कीर्ति सुनने से मन तृप्त हो जाता है और सब दुख दूर होते हैं।

5हरि-नाम की महिमा सुनने से जगत में ख्याति होती है, समूची सृष्टि में हरिनाम का गौरवगान है।

6हरि-नाम ही जाति-प्रतिष्ठा है और इसी से मुक्ति होती है।

7गुरु नानक का मत है कि गुरुमुख बनकर हरि-नाम का ध्यान करो, नाम में ही लगन लगाओ ॥६॥

8श्लोक महला १॥

9गीत-संगीत में कोई जूठन नहीं और न ही वेदों के सस्वर पाठ-पठन में कोई जूठन है।

10सूर्य एवं चाँद की वजह से होने वाले मौसम परिवर्तन (अमावस्या, पूर्णिमा इत्यादि माह-त्यौहार) में कोई जूठन नहीं।

11अनाज एवं तीर्थ स्नान में भी कोई अपवित्रता नहीं।

12सब स्थानों में बारिश होती है, इसमें भी कोई जूठन नहीं।

13धरती एवं पानी में भी जूठन नहीं।

14हर तरफ फैली हुई वायु में भी अपवित्रता नहीं।

15गुरु नानक का कथन है कि निगुरे जीव के पास कोई गुण नहीं होता,

16गुरु से विमुख होने के कारण मुँह जूठा ही होता है।॥१॥

17महला १ ॥

18गुरु नानक उपदेश देते हैं कि यदि कोई अंजुलि भरना जानता हो तो ही शुद्ध एवं उपयोगी है (अर्थात् अपने कर्तव्य एवं संकल्प को पूरा निभाना जानता हो)

19विद्वान की अंजुलि (संकल्प) ज्ञान देना है और योगी की अंजुलि (कर्तव्य) ब्रह्मचार्य है।

20ब्राह्मण का कर्त्तव्य संतोष है और गृहस्थी का (कर्त्तव्य) सत्याचरण एवं दान-पुण्य है।

21राजा की अंजुलि (कर्त्तव्य) सच्चा न्याय करना है और शिक्षित का सत्य एवं ध्यान लगाना है।

22पानी से मन साफ नहीं होता, पानी पीने से प्यास ही बुझती है।

23पानी को जगत का पिता माना जाता है और पानी ही मौत का कारण भी बन जाता है। ॥२॥

24पउड़ी ॥

25परमात्मा का नाम सुनने से सब ऋद्धियाँ-सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं।

26हरि-नाम सुनने से नवनिधियाँ प्राप्त होती हैं और मन की समस्त कामनाएँ पूरी होती हैं।

27प्रभु-नाम श्रवण से संतोष होता है और धन-दौलत के ढेर लग जाते हैं।

28हरि-नाम श्रवण से स्वाभाविक शान्ति उत्पन्न होती है और सुखों की प्राप्ति होती है।

29गुरु की शिक्षा से ही हरि-नाम पाया जाता है, नानक तो हरि-नाम के गुण गा रहा है॥ ७ li

30श्लोक महला १॥

31दुख में जन्म होता है और दुख में ही मृत्यु होती है।

32जन्म-मरण दुख ही दुख है, इस तरह संसार का व्यवहार दुखमय है।

33हर कोई अपने दुख ही दुख बता रहा है, पढ़-पढ़कर फरियाद करता है।

34सब ओर दुखों की गठरियां खुली हुई हैं और कोई सुख नहीं दिखाई देता।

35जीव दुख में दिल जला रहा है और दुखी की मृत्यु पर रो रहा है।

36गुरु नानक फुरमान करते हैं कि परमात्मा की स्तुति में लीन रहने से मन तन खिलता है और दुख की अग्नि में जल रहे मनुष्यों की दवा भी दुख ही है॥१॥

37महला १॥

38गुरु नानक फुरमान करते हैं कि यह दुनिया धूल ही धूल है, इसके खेल-तमाशे, खुशियां धूल मात्र ही हैं।

39दुनियावी कमाई भी धूल समान है, यह शरीर भी अन्त में धूल हो जाता है।

40अगर शरीर में से प्राण निकाल दिए जाएँ तो धूल मिट्टी ही भूर जाता है।

41जब कर्मों का हिसाब-किताब मांगा जाता है तो दस गुणा और धूल प्राप्त होती है॥२॥

42पउड़ी ॥

43हरि-नाम सुनने से शुद्धता एवं संयम प्राप्त होता है और यम भी पास नहीं फटकते।

44प्रभु का नाम सुनने से हृदय में ज्ञान का आलोक होता है और अज्ञान का अंधेरा दूर हो जाता है।

45परमात्मा का नाम श्रवण करने से आत्म-ज्ञान की प्राप्ति होती है और नाम से ही लाभ मिलता है।

46ईश्वर का नाम सुनने से सब पाप कट जाते हैं और निर्मल जीवन-आचरण प्राप्त होता है।

47गुरु नानक का कथन है कि प्रभु का नाम सुनने से मान-प्रतिष्ठा मिलती है, गुरु-मतानुसार चलने वाला प्रभु-नाम का ध्यान करता है॥८॥

48श्लोक महला १ ॥

49पुजारी अपने घर अथवा मन्दिर में अन्य देवी-देवताओं सहित नारायण की मूर्ति रख लेता है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं