सिख धर्म
वापस

गुरु ग्रंथ साहिब 122 · Raag Maajh · Guru Amar Daas Ji

1जो इस मन को मोह-माया में नचाता है तथा मन में कपट है, वह बड़ा दुःखी होता है।॥४॥

2जब भगवान स्वयं मनुष्य से गुरु के सान्निध्य द्वारा अपनी भक्ति करवाता है

3तो सहज-स्वभाव ही उसका मन एवं तन भगवान के प्रेम में मग्न हो जाता है।

4जब वाणी का बजाया हुआ अनहद शब्द गुरमुख के ह्रदय में गूंजने लग जाता है तो ही उसकी भक्ति प्रभु को स्वीकार होती है॥५॥

5स्वेच्छाचारी अत्यधिक ताल लगाते एवं बाजे बजाते हैं

6परन्तु उन में कोई भी न ही प्रभु के नाम को सुनता है और न ही नाम को अपने मन में बसाते हैं।

7वह तो माया के लिए अखाड़ा बांध कर नाचते हैं और माया के मोह में फँसकर दुःखी होते रहते हैं। ६॥

8जिस व्यक्ति के मन में प्रभु की प्रीति उत्पन्न हो जाती है, वही मोह-माया से मुक्त है।

9इन्द्रियों को नियंत्रण में कर लेना ही संयम रूप सच्ची युक्ति है।

10भगवान को यही भक्ति अच्छी लगती है कि उसे हमेशा ही गुरु की वाणी द्वारा स्मरण किया जाए॥७॥

11भगवान की भक्ति चारों युगों में गुरु के माध्यम से ही होती रही है।

12किसी अन्य विधि द्वारा भगवान की भक्ति होती ही नहीं।

13हे नानक ! गुरु के चरणों में चित्त लगाने से भगवान का नाम गुरु-भक्ति द्वारा प्राप्त होता है॥ ८ ॥ २० ॥ २१ ॥

14माझ महला ३ ॥

15में तो सत्यस्वरूप परमात्मा की ही सेवा करता हूँ और उस सत्यस्वरूप परमात्मा की ही महिमा स्तुति करता रहता हूँ।

16सत्य परमेश्वर का नाम-सिमरन करने से दुःख कभी भी निकट नहीं आता।

17जो व्यक्ति सुखदाता भगवान की सेवा करते हैं और गुरु की मति द्वारा उसे अपने हृदय में बसाकर रखते हैं, ऐसे व्यक्ति सदैव सुखी रहते हैं।॥१॥

18मैं उन पर तन एवं मन से न्यौछावर हूँ, जो सहज सुखदायक समाधि लगाते हैं।

19जो व्यक्ति भगवान की सेवा करते हैं, वह सदैव ही सुन्दर लगते हैं। वह भगवान में वृति लगाकर शोभा के पात्र बन जाते हैं और भगवान के दरबार में बड़ी शोभा प्राप्त करते हैं॥१॥ रहाउ ॥

20हे प्रभु-परमेश्वर ! प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को तेरा भक्त कहलवाता है

21परन्तु तेरे भक्त वहीं हैं जो तेरे मन को प्रिय लगते हैं।

22वह सच्ची वाणी द्वारा तेरी सराहना करते रहते हैं और तेरे प्रेम में मग्न हुए तेरी भक्ति करते रहते हैं।॥२॥

23हे सच्चे परमेश्वर ! प्रत्येक जीव तेरा ही उत्पन्न किया हुआ है।

24यदि मनुष्य को गुरु मिल जाए तो उसका जीवन एवं मृत्यु का चक्र मिट जाता है।

25हे भगवान ! जब तुझे उपयुक्त लगता है तो तू अपने नाम में जीव की रुचि उत्पन्न कर देता है और तू स्वयं ही उससे अपना नाम जपवाता है॥३॥

26हे पूज्य-परमेश्वर ! गुरु के उपदेश द्वारा तू मनुष्य के मन में अपना नाम बसा देता है

27और उसका हर्ष, शोक एवं मोह सब नष्ट कर देता है।

28जिसकी सुरति सदैव ही एक परमेश्वर में लीन रहती है, वह भगवान के नाम को अपने मन में बसा लेता है॥ ४ ॥

29हे प्रभु परमेश्वर ! तेरे भक्त हमेशा ही बड़े चाव से तेरे प्रेम में मग्न रहते हैं

30और नवनिधियाँ प्रदान करने वाला तेरा नाम, उनके मन में आकर बस जाता है।

31जो व्यक्ति सौभाग्य से सतिगुरु को पा लेता है, गुरु उसे शब्द द्वारा भगवान से मिला देता है॥५॥

32हे प्रभु ! तू बड़ा दयालु एवं सदैव ही जीवों को सुख देता रहता है।

33तू स्वयं ही जीवों को अपने साथ मिला लेता है और तुझे गुरु के माध्यम से ही जाना जाता है।

34तू स्वयं ही जीवों को नाम रूपी महानता प्रदान करता है। जो व्यक्ति तेरे नाम में मग्न रहते हैं, वे सदैव ही सुखी रहते हैं।॥६॥

35हे सत्यस्वरूप परमेश्वर ! मैं हमेशा ही तेरी महिमा-स्तुति करता रहता हूँ।

36तुझे गुरमुख ने ही जाना है और कोई दूसरा तुझे जान ही नहीं सकता।

37यदि मनुष्य का मन विश्वस्त हो जाए और वह एक परमेश्वर में ही समाया रहे तो सतिगुरु उसे उसके मन में ही प्रभु से मिला देता है॥ ७ ॥

38तेरी महिमा-स्तुति वही मनुष्य करता है जो गुरमुख बन जाता है।

39हे मेरे सच्चे ठाकुर ! तू बेपरवाह है,

40हे नानक ! जिनके मन में नाम का निवास हो जाता है, गुरु अपनी वाणी द्वारा उसे भगवान से मिला देते हैं॥ ८ ॥ २१ ॥ २२ ॥

41माझ महला ३ ॥

42हे सत्यस्वरूप परमेश्वर ! तेरे भक्त तेरे सत्य-दरबार में बैठे बड़ी शोभा पा रहे हैं।

43तूने उन्हें गुरु के शब्द द्वारा नाम में लगाकर ही संवारा है।

44वह दिन-रात सदैव आनंद में रहते हैं और गुणों के भण्डार प्रभु का गुणानुवाद कर-करके उसमें ही लीन रहते हैं।॥१॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं