गुरु ग्रंथ साहिब 1208 · Raag Saarang · Guru Arjan Dev Ji
1जिसका स्मरण करने से सभी पदार्थ प्राप्त होते हैं, हे मेरे मन ! आठ प्रहर उसका जाप कर॥१॥रहाउ॥।
2हे स्वामी ! जो तेरा नामामृत पान करता है, वह तृप्त हो जाता है।
3उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आगे प्रभु-दरबार में मुक्ति होती है।॥१॥
4हे पूर्ण अविनाशी, परब्रह्म कर्ता ! मैं तुम्हारी शरण में आया हूँ।
5कृपा करो ताकि तेरे चरणों का ध्यान करता रहूँ, नानक के मन तन में तेरे दर्शन की ही तीव्र आकांक्षा है॥२ ॥५ ॥ १६ ॥
6सारग महला ५ घरु ३
7ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
8हे मन ! संसार की चीजों की ओर क्यों लुब्ध हो रहे हो ?
9इहलोक-परलोक प्रभु सदा सहायक है, वह प्राणों का साथी ही तेरे काम आने वाला है॥१॥रहाउ॥।
10प्रियतम का नाम अमृतमय है, उसका मनोहर प्रेम ही तृप्ति प्रदान करने वाला है।
11उस कालातीत ब्रह्मा मूर्ति परमेश्वर का ध्यान करने के लिए साधु-संतों की संगत ही अच्छा ठिकाना है॥१॥
12महापुरुषों की वाणी ऐसा महामंत्र है, जो मन का अभिमान निवृत्त कर देती है।
13नानक फुरमाते हैं कि प्रभु का नाम शान्ति प्रदान करने वाला है, अतः इस सुख के स्थान को खोज लो॥२॥१॥ २०॥
14सारग महला ५ ॥
15हे मन ! सदा भगवान का मंगल-गान करो।
16यदि पल भर हृदय में हरिनाम का ध्यान करोगे तो तेरे सभी पाप, रोग एवं शोक मिट जाएँगे।॥१॥रहाउ॥।
17अपनी बुद्धिमानी एवं चतुराई को छोड़कर साधुओं की शरण में पड़ जाओ।
18दीनों के दुख नाश करने वाला प्रभु जब कृपालु होता है तो यम भी धर्मराज सरीखा आचरण करता है॥१॥
19एक परमेश्वर के अतिरिक्त दूसरा कोई नहीं है और कोई अन्य उसकी बराबरी नहीं कर सकता।
20नानक का मत है कि माता-पिता एवं भाई समान प्राणों का स्वामी परमेश्वर ही सुख प्रदान करने वाला है॥२॥ २ ॥ २१ ॥
21सारग महला ५ ॥
22परमात्मा के भक्त अपने संगियों का भी उद्धार कर देते हैं।
23उनका मन पवित्र होता है और जन्म-जन्म के दुखों को हरण कर लेते हैं।॥१॥रहाउ॥।
24जो भी सन्मार्ग चले हैं, उन्होंने सुख ही पाया है, जिनके साथ उनके प्रवचन हुए, वे भी संसार-सागर से तैर गए हैं।
25जो अज्ञान के घोर अंधकूप में निरे हुए थे, वे साधु-पुरुषों की संगत में पार उतर गए हैं।॥१॥
26हे भाई ! जिनके उत्तम भाग्य होते हैं, वे साधुओं की संगत में ही सम्मिलित रहते हैं।
27नानक कथन करते हैं कि हम भी उनकी चरण-धूलि के आकांक्षी हैं, यदि मेरा प्रभु कृपा करे तो मिल जाए॥२॥३॥ २२॥
28सारग महला ५ ॥
29भक्तजन परमात्मा के गहन चिंतन में ही लीन रहते हैं।
30साधु पुरुषों की संगत में एक पल भर रहने से करोड़ों स्वर्गों के सुखों का फल प्राप्त होता है।॥१॥रहाउ॥।
31परमेश्वर का जप करने से दुर्लभ शरीर पवित्र हो जाता है और यम की पीड़ा का निवारण कर देता है।
32हरिनाम को हृदय में धारण करने से महा पापियों के भी पाप उतर जाते हैं।॥१॥
33जो जो पावन राम यश सुनता है, उसका जन्म-मरण का दुख नाश हो जाता है।
34नानक फुरमाते हैं कि अहोभाग्य से (हरि यश) प्राप्त होता है और मन तन खिल उठता है॥२॥४॥ २३ ॥
WEBREATH · 11:11
«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208
श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।
WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं