सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1191 · Raag Basant · Guru Nanak Dev Ji

1लालच मनुष्य के लिए घोर अंधेरा एवं कैदखाना है और उसके पैर में अवगुणों की बेड़ी पड़ी हुई है॥३॥

2मनुष्य की दौलत यह है कि हर रोज मुदगरों की मार पड़ रही है और पाप कोतवाल का कार्य करता है।

3हे ईश्वर ! जैसी तुम्हारी कृपा-दृष्टि होती है, वैसा ही मनुष्य हो जाता है, अगर तुझे अच्छा लगे तो मनुष्य अच्छा बन जाता है और अगर बुरा लगे तो वह बुरा इन्सान बन जाता है।॥४॥

4अब इस कलियुग में मुसलमानों का शासन आ गया है, आदिपुरुष परमेश्वर को अल्लाह' कहा जा रहा है।

5ऐसी प्रथा चल पड़ी है कि देवताओं के मन्दिरों पर टैक्स लगाया जा रहा है।॥५॥

6हे इंश्वर ! मुसलमानों ने हाथ में कूजा ले लिया है, बांग दी जा रही है, नमाज पढ़ी जा रही है, मुसल्ला नजर आ रहा है, लोगों ने नीली वेशभूषा धारण कर ली है और

7सब ओर अल्लाह-हू-अकबर हो रहा है, घर-घर में मियाँ जी मियाँ जी कहा जा रहा है, और सब लोगों की बोली (उर्दू) बदल गई है॥६॥

8हे मालिक ! तू सम्पूर्ण विश्व का बादशाह है, यदि यह (मुसलमानी राज्य) तेरी मर्जी है, तो हम जीवों की क्या जुर्रत है?

9चारों दिशाएँ तुझे सलाम करती हैं और घर-घर में तेरी प्रशंसा का गान हो रहा है।॥७॥

10तीर्थ-यात्रा, स्मृतियों के पाठ एवं दान-पुण्य से तो कुछ दिन भर का लाभ मिलता है,

11मगर गुरु नानक साहिब का फुरमान है कि यदि परमात्मा के नाम का घड़ी भर सिमरन किया जाए तो ही सच्ची बड़ाई प्राप्त होती है॥८॥१॥८॥

12बसंतु हिंडोलु महला १ घरु ४

13ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

14शरीर रूपी नगर में मन रूपी एक नादान बालक रहता है, जो पल भर भी टिक कर नहीं रहता।

15इसके लिए अनेक उपाय इस्तेमाल कर थक गए हैं परन्तु बार-बार यह भटकता है॥१॥

16हे मेरे ठाकुर ! इस बालक को तुम ही स्थिर रख सकते हो।

17अगर सतगुरु से साक्षात्कार हो जाए तो पूर्ण परमेश्वर प्राप्त होता है। राम नाम का भजन करो, यही सच्चा रास्ता है॥१॥रहाउ॥।

18अगर शरीर में राम नाम नहीं बसा तो यह मुर्दा और मिट्टी की ढेरी है। पूरा संसार नाम के बिना लाश समान है।

19जब गुरु राम नाम रूपी जल मुँह में डालता है तो यह पुनः हरा भरा हो जाता है॥२॥

20मैंने जांच पड़ताल कर पूरे शरीर को खोजा है और गुरु ने मुझे एक कौतुक दिखाया है कि

21बाहर खोजते हुए सभी मायावी जीव मर खप गए हैं मगर गुरु की धारणा का अनुसरण करते हुए प्रभु को हृदय-घर में ही पा लिया है॥३॥

22ईश्वर निर्धनों पर ऐसे दयालु होता है, ज्यों श्रीकृष्ण विदुर के घर आया था।

23जब सुदामा श्रद्धा भावना से श्रीकृष्ण से मिला तो उन्होंने सब चीजें उसके घर पहुँचाकर सुदामा की गरीबी को दूर किया था ॥४॥

24राम नाम का भजन करने वाले की प्रतिष्ठा बहुत बड़ी है और मेरे मालिक ने स्वयं उसकी रक्षा की है।

25यदि सभी मायावी जीव चुगली एवं निन्दा करते रहे तो फिर भी एक तिल भर उसकी शोभा में कमी नहीं आती ॥५॥

26राम नाम का भजन करने वाला भक्त ही प्रशंसा का पात्र है और वह संसार भर में शोभा प्राप्त करता है,

27मगर निन्दा करने वाला मायावी जीव भक्त की शोभा बदाश्त नहीं करता और तृष्णा की अग्नि में जलता रहता है॥ ६ ॥

28ईश्वर का भक्त अन्य भक्तगणों से मिलकर शोभा पाता है और उसके गुणों में और भी बढ़ौत्तरी होती है।

29जो ईश्वर के दासों के दास बन जाते हैं, वही भक्त मेरे प्रभु को प्यारे लगते हैं।॥७॥

30अपरंपार कर्ता आप ही जल है और स्वयं ही गुरुमुखों से मिलाता है।

31हे नानक ! वह स्वाभाविक ही गुरु के संपर्क में मिला लेता है, ज्यों जल जल में विलीन हो जाता है॥ ८ ॥ १॥ ६ ॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं