सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1155 · Raag Bhairao · Guru Amar Daas Ji

1तदन्तर भक्त प्रहलाद प्रभु के चरणों में लग गया॥ ११॥

2सतगुरु ने हरि-नाम रूपी सुखों का भण्डार ही पक्का करवाया है।

3राज, सम्पदा एवं समूची माया झूठी है,

4मगर लोभी व्यक्ति इससे ही लिपटे रहते हैं।

5हरि-नाम स्मरण के बिना दरबार में दण्ड ही मिलता है॥ १२॥

6हे नानक ! ईश्वर ही सब करने एवं करवाने वाला है।

7वही व्यक्ति मान्य हैं, जिन्होंने ईश्वर से मन लगाया है।

8वह सदैव भवतों का साथ देता आया है,

9अतः भक्तों के लिए कर्ता-प्रभु ने अपना रूप दिखाया है॥ १३॥१॥२॥

10भैरउ महला ५॥

11गुरु की सेवा से अमृत फल पाया जा सकता है और अहम् तथा तृष्णा निवृत्त हो जाती है।

12प्रभु का नाम हृदय में अवस्थित हो जाए तो मन की लालसाएँ दूर हो जाती हैं।॥१॥

13हे प्यारे प्रभु ! कृपा करो,

14दीन सेवक तुझसे तेरा गुणगान ही चाहता है, गुरु के उपदेश से उद्धार करो॥१॥ रहाउ॥

15संतजनों के पास यम नहीं फटकता और उन्हें किंचित मात्र भी दु:ख नहीं होता।

16जो तेरी शरण में आ जाते हैं, वे स्वयं तो संसार-सागर से मुक्त होते ही हैं, अपनी समस्त वंशावलि को भी मुक्त करवाते हैं।॥२॥

17यह तेरा बड़प्पन है केि तू स्वयं ही भक्तों की लाज रखता है,

18तू जन्म-जन्मांतर के पाप-दुःख काट देता है और उन में रती भर दुविधा नहीं रहती॥३॥

19हम मूर्ख-नादान तो कुछ भी नहीं समझते, तू स्वयं ही समझा दे।

20जो तू चाहता है, वही करता है और अन्य कुछ नहीं हो पाता॥४॥

21जगत को उत्पन्न कर तूने काम-धन्धे में लगा दिया, परन्तु लोग मन्दे काम करते रहते हैं।

22लोगों ने अमूल्य जीवन को जुए में पराजित कर दिया और शब्द को अन्तर्मन में नहीं बसाया॥ ५॥

23स्वेच्छाचारी मर जाते हैं और दुर्मति एवं अज्ञान अंधेरे के कारण कोई सूझ नहीं होती।

24वे संसार-सागर से पार नहीं उतरते और गुरु के बिना पापों का बोझ लेकर डूब मरते हैं।॥६॥

25सच्चे शब्द में लीन व्यक्ति ही सत्यनिष्ठ हैं और प्रभु स्वयं ही उन्हें मिला लेता है।

26गुरु की वाणी द्वारा शब्द रहस्य को जानकर वे सत्य में लगन लगाए रखते हैं।॥७॥

27तू स्वयं तो निर्मल ही है, तेरे सेवक भी निर्मल हैं, गुरु के उपदेश द्वारा यह विचार किया है।

28नानक उन पर सदैव कुर्बान जाता है, जिन्होंने राम नाम को मन में धारण कर लिया है॥ ८॥२॥३॥

29भैरउ महला ५ असटपदीआ घरु २

30ੴ सतिगुर प्रसादि॥

31जिसके हृदय में हरि-नाम है, वही सबसे बड़ा बादशाह है,

32जिसके हृदय में नाम है, उसके सभी कार्य सम्पन्न हो जाते हैं।

33जिसके हृदय में राम नाम है, वही करोड़ों धन पाता है,

34किन्तु प्रभु-नाम बिना जीवन व्यर्थ ही जाता है॥१॥

35जिसके पास प्रभु-नाम रूपी धन राशि है, उसकी ही प्रशंसा करता हूँ।

36वही भाग्यशाली है, जिसके माथे पर गुरु का हाथ (आशीष) है॥१॥ रहाउ॥

37जिसके हृदय में राम नाम है, उसके पास अनेक किले एवं बेशुमार सेना है।

38जिसके हृदय में नाम है, वही परम सुखी है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं