सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1142 · Raag Bhairao · Guru Arjan Dev Ji

1अगर वह किसी हरामखोर एवं गुणविहीन पुरुष पर प्रसन्न हो जाता है तो

2उसका मन-तन शीतल हो जाता है और उसके मन में अमृत स्थित हो जाता है।

3परब्रह्म गुरु उस पर दयालु हो गया है,

4दास नानक उसकी दया-दृष्टि को देखकर आनंदित हो गया है॥४॥ १०॥ २३॥

5भैरउ महला ५॥

6मेरा सतगुरु किसी पर निर्भर नहीं,

7उसका कार्य भी सच्चा है।

8मेरा सतगुरु सबको देने वाला है और

9वही मेरा विधाता है॥१॥

10गुरु जैसा पूज्य देवता कोई नहीं,

11जिसके माथे पर भाग्य है, वही उसकी सेवा में तल्लीन होता है।॥१॥रहाउ॥

12मेरा सतगुरु सब का पोषण करता है,

13वही मारने-जिंदा करने वाला है।

14मेरे सतगुरु की कीर्ति सारे संसार में फैल गई है॥२॥

15मेरा सतगुरु बलहीनों का बल है और

16वही मेरा घर अवलम्ब है।

17मैं सतगुरु पर सदैव बलिहारी जाता हूँ,

18जिसने सच्चा मार्ग दिखा दिया है॥३॥

19जिसने गुरु की सेवा की है, उसे कोई भय नहीं छूता।

20गुरु की आराधना करने वाले जीव को कोई दुख अथवा संताप वेिचलित नहीं करता।

21नानक फुरमाते हैं कि वेदों एवं स्मृतियों का विश्लेषण कर यही परिणाम मिला है कि

22परब्रह्म एवं गुरु में कोई भेद नहीं।॥४॥ ११॥ २४॥

23भैरउ महला ५॥

24ईश्वर का नाम लेने से वह मन में ही प्रगट हो गया है,

25प्रभु का नाम जपने से तन के पाप निवृत्त हो गए हैं।

26हरिनाम जपने से सब पर्वो का फल प्राप्त होता है,

27प्रभु नाम के जाप से अड़सठ तीर्थों में स्नान हो जाता है।॥१॥

28प्रभु का नाम जपना ही हमारा तीर्थ है और

29गुरु ने उपदेश देकर यही तत्व ज्ञान बताया है॥१॥ रहाउ॥

30हरिनाम के जाप से सब दुःख दूर हो जाते हैं,

31प्रभु का नाम लेने से मूर्ख भी ज्ञानवान बन जाता है।

32नाम-स्मरण से मन में ज्ञान का उजाला हो जाता है।

33प्रभु नाम का जाप करने से सब जंजालों से छुटकारा हो जाता है।॥२॥

34नाम जपने से यम भी पास नहीं आता,

35हरिनाम-स्मरण करने से प्रभु-दरबार में सुख प्राप्त होता है।

36नाम जपने वाले भक्त की प्रभु श्लाघा करता है,

37अतः प्रभु-नाम ही हमारी सच्ची जीवन-राशि है॥३॥

38गुरु ने उपदेश देकर यही सार बताया है कि

39हरिनाम का कीर्ति-गान ही मन का आसरा है।

40हे नानक ! प्रभु-नाम के जाप से प्रायश्चित है,

41अन्य कर्मकाण्ड तो लोगों को खुश करने के लिए हैं।॥४॥ १२॥ २५॥

42भैरउ महला ५॥

43लाखों बार ईश्वर को नमस्कार है,

44यह मन भी उसे न्यौछावर कर देना चाहिए।

45उसका स्मरण करने से सब संताप मिट जाते हैं

46एवं ताप निवृत्त होकर आनंद प्राप्त होता है।॥१॥

47प्रभु का निर्मल नाम ऐसा अमोल हीरा है,

48जिसका जाप करने से सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं।॥१॥ रहाउ॥

49जिसकी करुणा-दृष्टि से दु:खों का पहाड़ नष्ट हो जाता है और

50मन अमृतमय शीतल नाम को लेता है।

51अनेकानेक भक्त जिसके चरणों के पुजारी हैं,

52वह उनके सब मनोरथ पूर्ण करनेवाला है॥२॥

53ईश्वर की लीला इतनी विचित्र है कि वह पल में खाली चीजों को पूर्ण रूप से भर देता है,

54पल में ही सूखी धरती को हरा-भरा कर देता है।

55वह पल में ही बेसहारा को सहारा दे देता है और

56पल में ही सम्मानहीन को सम्मान प्रदान करता है॥३॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं