सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1125 · Raag Bhairao

1रागु भैरउ महला १ घरु १ चउपदे

2वह अनंतशक्ति ओमकार-स्वरूप केवल एक है, उसका नाम सत्य है, वह आदिपुरुष, संसार का रचयिता है, वह भय से रहित है, वह वैर भावना से रहित (प्रेम-स्वरूप) है, वह कालातीत ब्रह्म-मूर्ति है, वह जन्म-मरण से रहित (अमर) है, वह अपने आप ही प्रगट हुआ है, गुरु-कृपा से पाया जाता है।

3हे स्रष्टा ! तेरी रज़ा से बाहर कुछ नहीं होता,

4तू सब कर-करके देखता और जानता है॥१॥

5तेरे रहस्य के बारे में क्या कहा जाए, कुछ भी कहा नहीं जा सकता।

6जो कुछ यह संसार है, सब तेरी रज़ा में (चल रहा) है॥१॥ रहाउ॥

7जो कुछ करना है, वह तेरे पास ही कहना है,

8फिर किसके सम्मुख प्रार्थना करें॥२॥

9हमारा कहना एवं सुनना तेरी ही वाणी है,

10हे सब लीला करने वाले ! तू स्वयं ही सब जानता है॥३॥

11गुरु नानक का मत है कि करने-कराने एवं जानने वाला आप परमेश्वर ही है,

12बनाकर तोड़कर वही देखता संभालता है॥४॥१॥

13ੴ सतिगुर प्रसादि॥

14रागु भैरउ महला १ घरु २॥

15गुरु के उपदेश से कितने ही मुनि, स्वर्गाधिपति इन्द्र, ब्रह्मा इत्यादि पार हो गए।

16सनक-सनंदन जैसे अनेकों ही तपस्वी जन गुरु की कृपा से मुक्ति पा गए॥१॥

17गुरु-उपदेश के बिना संसार-समुद्र को कैसे पार किया जा सकता है।

18हरिनाम बिना पूरा जगत रोगी बना हुआ है और दुविधा में लीन होकर डूबकर मर रहा है॥१॥ रहाउ॥

19गुरु ही देव है, वह अदृश्य एवं रहस्यमय है और गुरु की सेवा से तीनों लोकों की सूझ होती है।

20दाता गुरु ने स्वयं ही देन प्रदान की, जिसके फलस्वरूप अदृश्य एवं रहस्यातीत परमसत्य को पाया है॥२॥

21मन ही राजा है, साक्षात्कार के उपरांत मन स्वयं से ही प्रसन्न होता है और मन की लालसाएँ समाप्त हो जाती हैं।

22मन ही योगी है और वियोगी बनकर विनष्ट होता है। ईश्वर का गुणगान करने से उसे सूझ प्राप्त होती है।॥३॥

23संसार में ऐसे विरले ही व्यक्ति है, जिन्होंने गुरु द्वारा मन को मारा है और शब्द का मनन किया है।

24गुरु नानक का कथन है कि ईश्वर सबमें भरपूर है और सच्चे शब्द से ही जीव मुक्ति पाता है ॥४॥१॥२॥

25भैरउ महला १॥

26आँखों में रोशनी नहीं, शरीर बिल्कुल कमजोर हो चुका है, बुढ़ापे ने कब्जा कर लिया है और मौत सिर पर खड़ी है।

27रूप-रंग तो सदा रहने वाला नहीं, फिर मौत का जाल क्योंकर छोड़ सकता है॥१॥

28हे प्राणी ! ईश्वर का जाप कर ले, यह जीवन खत्म हो गया है।

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं