सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1124 · Raag Kaydaaraa · Bhagat Kabeer Ji

1वे भला टेढ़े क्यों चलते हैं?

2वे तो हड्डी, चमड़ा और विष्ठा के बंधे हुए दुर्गन्ध में लिपटे हुए हैं।॥१॥ रहाउ॥

3अरे भाई ! राम का जाप कर नहीं रहे हो, किस भ्रम में भूले हुए हो, तुम से मौत दूर नहीं है।

4अनेक यत्न कर इस शरीर को तुम बचाकर रखते हो, मगर जीवनावधि पूरी होने पर यह यहीं रह जाता है॥२॥

5निस्संकोच प्राणी कुछ भी कर ले, मगर अपने आप करने से कुछ नहीं होता।

6जब ईश्वर की मर्जी होती है तो सतगुरु से भेंट हो जाती है और फिर वह हरिनाम का बखान करता है॥३॥

7रेत के घर में बस रहा नादान जीव बेकार में ही शरीर का अहंकार करता है।

8कबीर जी कहते हैं कि जिन्होंने कभी राम का स्मरण नहीं किया, ऐसे बहुत बुद्धिमान भी डूब चुके हैं।॥४॥४॥

9कुछ व्यक्ति टेढ़ी पगड़ी बाँधकर टेढ़े रास्ते चलते हैं और पान बीड़े खाते हैं।

10उनकी यही सोच है कि प्रेम-भक्ति से कुछ भी वास्ता नहीं अपितु हमारा काम केवल लोगों पर शासन करना है।॥१॥

11ऐसे अभिमानी पुरुषों ने ईश्वर को भुला दिया है और

12स्वर्ण (धन-दौलत, मदिरा) एवं खूबसूरत स्त्रियों को देख-देखकर उन्हें सच मान लिया है॥१॥ रहाउ॥

13लालच, झूठ एवं विकारों के नशे में इनका पूरा जीवन बीत जाता है।

14कबीर जी कहते हैं कि आखिरकार मौत उन्हें अपना शिकार बना लेती है॥२॥५॥

15मनुष्य चार दिन अपनी नौबत बजाकर चल देता है और

16अनेक प्रकार से कमाया हुआ धन-दौलत एवं जायदाद कुछ भी साथ नहीं जाता॥१॥ रहाउ॥

17दहलीज पर बैठी पत्नी रोती है और द्वार पर माता भी ऑसू बहाती है।

18परिवार के सदस्य एवं अन्य रिश्तेदार श्मशान तक आते हैं परन्तु आत्मा रूपी हंस अकेला ही जाता है॥१॥

19वे पुत्र, धन-दौलत, नगर-गलियां पुनः देखने को नहीं मिलते।

20कबीर जी जनमानस को चेताते हुए कहते हैं, फिर भला राम का स्मरण क्यों नहीं करते, क्योंकि जीवन तो निरर्थक जा रहा है॥२॥६॥

21रागु केदारा बाणी रविदास जीउ की

22ੴ सतिगुर प्रसादि॥

23अगर कोई षट् कर्म (भजन, याजन, अध्ययन, अध्यापन, दान देना अथवा लेना) करने वाला है, उच्च कुल से नाता रखता है, अगर हृदय में हरि-भक्ति नहीं,

24प्रभु-चरणों की कथा उसे अच्छी नहीं लगती तो वह चाण्डाल समान है॥१॥

25अरे मन ! क्यों अचेत बना हुआ है, होश में आ।

26वाल्मीकि की ओर क्यों नहीं देख रहा,

27किस जाति से था और किस प्रकार राम भक्ति के फलस्वरूप विशेषता अमर पद पा गया॥१॥ रहाउ॥

28वह कुत्तों को मारने वाला था, सबसे हिंसक था, उसने भगवान कृष्ण से प्रेम लगा लिया,

29लोग भला उस बेचारे की क्या प्रशंसा करेंगे, उसकी कीर्ति तो तीनों लोकों में फैल गई॥२॥

30वेश्यागामी अजामिल, पिंगला, शिकारी एवं कुंचर सभी संसार के बन्धनों से छूटकर ईश्वर में विलीन हो गए।

31रविदास जनमानस को उपदेश करते हैं कि जब ऐसी दुर्मति वाले संसार से मुक्ति पा गए, फिर प्रभु-स्मरण कर तू क्यों नहीं पार होगा॥३॥१॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं