सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1100 · Raag Maaroo · Guru Arjan Dev Ji

1हे नानक ! वे आँखें अन्य ही हैं, जिससे प्रियतम प्रभु दिखाई देता है॥ ३॥

2पउड़ी।

3जिस व्यक्ति ने गुरुमुख बनकर परमात्मा की उपासना की है, उसने सब सुख पा लिए हैं।

4वह अपने परिवार सहित स्वयं तो पार हुआ ही है, उसने समूचे जगत् का भी उद्धार कर दिया है।

5उसने हरि-नाम रूपी धन ही संचय किया है और सारी तृष्णा बुझा ली है।

6दुनिया के सब लालच छोड़कर उसने अन्तर्मन में ईश्वर से ही लगन लगाई है।

7उसके हृदय-घर में सदैव आनंद बना रहता है और ईश्वर उसका सहायक व शुभचिंतक बन गया है।

8उसने शत्रु और मित्रों को एक समान ही समझा है और सबके संग प्रेमपूर्वक रहता है।

9वहू गुरु के ज्ञान द्वारा नाम जपकर समूचे जगत् में विख्यात हो गया है।

10उसकी ईश्वर से प्रीति लगी हुई है और उसने पूर्व जन्म में किए शुभ कर्मों का फल पा लिया है॥ १६॥

11डखणे महला ५॥

12एक सत्य ही सुन्दर कहा जाता है, परन्तु झूठ की शोभा झूठी ही होती है।

13हे नानक ! जिनके पास सत्य होता है, ऐसे व्यक्ति विरले ही ज्ञात होते हैं।॥ १॥

14महला ५॥

15मेरे सज्जन का मुख अनुपम है, आठ प्रहर उसे ही निहारती रहूँगी।

16मैंने सोते समय उस मालिक को देखा है, और सपने में भी उस पर कुर्बान जाती हूँ॥ २॥

17महला ५॥

18सज्जन प्रभु को अपने हृदय में ही पहचानो, मुँह से बोलना तो सब व्यर्थ ही है।

19वह प्रियतम तुझसे कहीं दूर नहीं अपितु उसे अपने मन में देख लो॥ ३॥

20पउड़ी॥

21धरती, आकाश, पाताल, चाँद-सूर्य सब नाशवान् हैं।

22बड़े-बड़े बादशाह, साहूकार, नवाब एवं सरदार मौत को प्राप्त हो जाएँगे।

23कगाल, अमीर, गरीब एवं मस्त सभी लोग संसार में से चले जाएँगे।

24काजी, शेख, सम्पन्न लोग सभी दुनिया से चले जाएँगे।

25पीर-पैगम्बर, औलिये सब की मृत्यु निश्चित है।

26रोज़ा रखने वाले, बाँग देने वाले, नमाज पढ़ने वाले, कुरान शरीफ पढ़ने वाले सत्य को बूझे बिना सब नाश हो जाएँगे।

27संसार की चौरासी लाख योनियाँ सब आवागमन में पड़ी हुई है।

28सत्य तो यही है कि एक सच्चा खुदा ही सदा अटल है और एक खुदा की बंदगी करने वाला बंदा ही नाश रहित है॥ १७॥

29डखणे महला ५॥

30मैंने सारी दुनिया ढूंढ कर देख ली है, मगर ईश्वर के सिवा अन्य कोई हितैषी नहीं है।

31हे सज्जन ! तुम मेरे पास आओ, अपने दर्शन दो, जिससे मेरा तन-मन शीतल हो जाए॥ १॥

32महला ५॥

33सच्चा आशिक वही है, जिसके मन में कोई आशा नहीं होती, लेकिन मेरे मन में तो बड़ी-बड़ी आशाएँ बनी हुई हैं।

34हे ईश्वर ! एक तू हो आशा से रहित है और मैं तुझ पर बारंबार बलिहारी जाता हूँ॥ २॥

35महला ५॥

36जब वियोग की बात सुनकर ही बहुत दुख होता है तो दर्शन किए बिना वह मृतक समान हो जाता है।

37अपने प्यारे के बिना वियोगी को धैर्य नहीं होता।॥ ३॥

38पउड़ी।

39पावन तीर्थ स्थल, देवताओं के देवालय, केदारनाथ, मथुरा, काशी,

40देवराज इन्द्र समेत तेंतीस करोड़ देवते सब नाश हो जाएँगे।

41स्मृतियाँ, शास्त्र, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, छः दर्शन सर्भी समाहित हो जाएँगे।

42बड़े-बड़े ग्रंथ, पण्डित, गीत, कविता एवं कवि भी यहाँ से चले जाएँगे।

43बड़े-बड़े ब्रह्मचारी, सदाचारी, संन्यासी सभी काल के वश में पड़ जाएँगे।

44मुनि, योगी, दिगम्बर भी एक न एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाएँगे।

45जो भी दृष्टिगत है, वह नाश हो जाना है, सब कुछ पूर्णतया नष्ट हो जाएगा।

46लेकिन परब्रह्म परमेश्वर सदा अटल अमर है और उसका सेवक भी स्थिर रहेगा॥ १८॥

47श्लोक डखणे महला ५॥

48सौ नंगे आदमी भी नग्नपन की परवाह नहीं करते, लाखों भूखे भी भूख से व्याकुल नहीं होते।

49हे नानक ! अगर इन पर भगवान् की शुभ-दृष्टि हो तो करोड़ों दुखयारे भी दुख से परेशान नहीं होते॥ १॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं