सिख धर्म
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गुरु ग्रंथ साहिब 1084 · Raag Maaroo · Guru Arjan Dev Ji

1सत्य का आचरण अपनाने वाला ही सच्चा काजी हैं।

2जो अपने दिल को शुद्ध कर लेता है, वास्तव में वहीं मक्के का हज्ज़ करने वाला हाजी है।

3वहीं मुल्ला हैं, जो अपने मन की अहम् रूपी मैल को दूर करता है और दरवेश वहीं कहलाता है,जो अल्लाह की प्रशंसा का सहारा लेता है॥६॥

4हर वक्त को बंदगी करने का समय बना लो, दुनिया को बनाने वाले उस परवरदगार को हर समय अपने दिल में याद करो।

5खुदा को याद करते रहो, यहीं तस्बीह अर्थात् माला जपना है, दस इन्द्रियों को मार देना ही सुन्नत करवाना है और शील स्वभाव ही सबसे बड़ा नियंत्रण है॥७॥

6अपने दिल में यह बात समझ लो जगत् का सब कुछ थोड़े समय के लिए ही रहने वाला हैं।

7है मेरे भाई ! परिवार एवं घरबार जंजाल ही हैं।

8एक खुदा का दरबार ही सदा अटल रहने वाला मुकाम है और बादशाह, मलिक एवं सरदार फना होने वाले हैं॥ ८॥

9अल्लाह की प्रशंसा पहली नमाज, संतोष रखना दूसरी नमाज,

10नम्रता धारण करना तीसरे वक्त की नमाज, जरुरतमंदों को दान-पुण्य करना चौथी नमाज और

11पॉच इन्द्रियों को एक स्थान पर स्थिर करके रखना तेरी पाँचवी नमाज है। तेरी नमाज़ के ये पाँच वक्त ही सबसे उत्तम हैं॥९॥

12यह समझकर कि खुदा सारी दुनिया में रहता है, इस ज्ञान को वज़ीफा बना अर्थात् अपने मनोरथ पूर्ति का पाठ बना और

13पाप कर्मों के त्याग को हाथ में पकड़ने वाला लोटा बना।

14खुदा को एक ही समझकर मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बाँग दिया कर और उस खुदा का नेक पुत्र बनना ही बिगुल बजाना है। १०॥

15हक की कमाई का ही भोजन किया करो,

16अपने दिल को दरिया की तरह बड़ा बनाओं और मन की मैल साफ कर लो।

17अपने पीर को पहचान कर सेवा में लीन रहने वाला ही बिहिश्त में जाने का हकदार हैं और मृत्यु का फरिश्ता (यम) उसे दोजख (नरक) में नहीं डालता॥ ११॥

18जिस शरीर द्वारा तू शुभाशुभ कर्म करता है, उसे अपनी विश्वासपात्र औरत बना और

19फिर उस द्वारा खुदा को मिलकर रंग-तमाशों का आनंद भोग।

20हे नापाक बंदे ! अपने आपको पवित्र बना। खुदा को साक्षात् समझना ही कुरान की हदीसों को पढ़ना हैं। साबत सूरत रहना ही सिर पर पगड़ी पहनना है॥ १२॥

21सच्चा मुसलमान वहीं है, जिसका दिल मोम की तरह नरम होता है,

22वह अपने अन्तर्मन की मैल को दिल से धो देता है।

23वह दुनिया के रंग-तमाशों के निकट नहीं आता और यूं पवित्र होता है, जिस प्रकार फूल, रेशम, घी एवं मृग-चरम पाक पवित्र होता है| १३॥

24जिस पर मेहरबान अल्लाह की मेहर होती है,

25वास्तव में वहीं मर्दो में शूरवीर मर्द है।

26जिस पर खुदा की कृपा-दृष्टि है, वहीं शेख, शेखों का पीर, हाजी एवं खुदा का नेक बंदा है॥ १४॥

27हे कृपालु, रहमदिल, सच्चे खुदा ! तू कुदरत का रचयिता है,

28सब को बनाने वाला है, तेरी स्तुति एवं मुहब्बत अथाह है, तेरा हुक्म भी सत्य है।

29हे नानक ! उस खुदा के भेद को बूझने वाला आदमी बन्धनों से मुक्त होकर संसार-सागर से पार हो जाता हैं॥१५॥ ३॥ १२॥

30मारू महला ५॥

31परब्रहा सर्वोच्च स्थान पर विराजमान है,

32सारी दुनिया को बनाने, मिटाने एवं पुनः स्थापना करने वाला भी वह आप ही हैं।

33उस सर्वोच्च शक्ति प्रभु की शरण लेने से ही सुख प्राप्त होता है और मृत्यु इत्यादि कोई भय व्याप्त नहीं होता॥१॥

34जिस निरंकार ने गर्भ-अग्नि में से बचाया है,

35माँ के रक्त में छोटा-सा कृमि होने के बावजूद भी मिटने नहीं दिया,

36जिसने अपना सिमरन देकर पोषण किया है, वह सब शरीरों का मालिक हैं॥२३॥

37मैं तो प्रभु के चरण-कमल की शरण में आया हैं,

38सज्जन साधुओं के संग ईश्वर का हीं यश गाया है।

39परमात्मा का नाम जपने से जन्म-मरण के सभी दुख टूट जाते हैं और मृत्यु का भय भी नहीं रहता॥३॥

40देवाधिदेव सर्वोच्च शक्ति परमेश्वर सर्वकला समर्थ हैं, उसकी लीलाएँ अकथनीय हैं, वह अदृष्ट है।

41सृष्टि के सब जीव उसकी ही उपासना करते हैं।

42अण्डज, जेरज, स्वदेज एवं उभिज्ज से पैदा होने वाले अनेक प्रकार के सब जीवों का पोषण कर रहा है॥४॥

43सुखों का खजाना उसे ही प्राप्त होता है,

44जो अपने अन्तर्मन में राम नाम का आनंद लेता है।

45उसने स्वयं ही हाथ पकड़कर संसार-सागर रूपी अन्धकूप में से बाहर निकाल लिया है, परन्तु कोई विरला ही ऐसा साधक है॥५॥

स्रोत: Sri Guru Granth Sahib · BaniDB

WEBREATH · 11:11

«हे ईश्वर, तुम ही जीवन की श्वास के आधार हो» — गुरु ग्रंथ साहिब 208

श्वास सबकी एक है: हर कोई इसी से जीता है, चाहे वह कोई भी हो और किसी में भी आस्था रखता हो। हर दिन स्थानीय समय 11:11 पर लोग साठ सेकंड के लिए रुकते हैं, साँस लेते हैं और साँस के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं — हर कोई अपने शब्दों में, हर कोई अपने भीतर। इस मिनट में हम एक ही श्वास हैं।

WEBREATH — आपके स्थानीय समय 11:11 पर मिनट — हम एक ही श्वास हैं